मध्यप्रदेश में खाद की मारामारी, जमकर हो रही है कालाबाजारी:मनीष श्रीवास्तव

शहडोल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष- मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि,
मध्यप्रदेश में खाद की भारी किल्लत हो रही है, रबी सीजन हो या खरीफ सीजन हर बार, हर साल किसान खाद के लिए मारामारी करता है, लंबी लाइन लगाता है, डंडे खाता है, कई दिन इंतजार करता है और नतीजा ये रहता है कि किसान को यदि खाद मिल भी जाती है तो उसे जितनी चाहिए उतनी नहीं,मजबूरन किसान दोगुने दामों में बाजार से खाद खरीदता है,इधर खाद व्यापारी भी कालाबाजारी करने से नहीं चूकते. इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि देश के लिए अन्न उगाने वाले अन्नदाता को समय पर पर्याप्त खाद नहीं मिल पाती।
मध्यप्रदेश के अधिकांश संभागोंऔर जिलों में खरीफ सीजन की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और अब किसानों को खाद की जरूरत है. किसानों को डीएपी और यूरिया खाद की इस समय सबसे ज्यादा जरुरत है, सहकारी समितियों की बात की जाए तो यहां कई बार खाद का स्टॉक होने के बावजूद तकनीकी समस्या के चलते खाद नहीं बंट पाता, वहीं कई समितियों और गोदामों के आगे लंबी-लंबी कतारें लगी हैं, हाल ये है कि किसानों को जरुरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है।
मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि, मध्यप्रदेश में खाद की
डिमांड और सप्लाई में भारी अंतर है,
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश में खरीफ 2025 के लिए 36 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद वितरण का लक्ष्य रखा गया है,इसमें यूरिया की खपत 17.40 लाख मीट्रिक टन बताई जा रही है, एसएसपी के लिए 6.50 लाख मीट्रिक टन, डीएपी के लिए 7.50 लाख मीट्रिक टन,एमओपी के लिए 5 हजार मीट्रिक टन और एनपीके के लिए 86 हजार मीट्रिक टन की डिमांड है। इतना बड़ा अंतर है तो मांग कैसे पूरी होगी।
मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि किसानों की हितैसी बताने वाली मोदी और मोहन सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है, खाद नहीं मिलने से सबसे ज्यादा असर बुवाई पर पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि समय से खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। प्रत्येक छोटे बड़े शहरों में खाद बीज व्यापारियों के दुकानों और गोदामों में अगर छापे मारे जाएं तो उनके पास मौजूद खाद के स्टॉक में से 90% सरकारी खाद अवश्य मिल जाएगी क्या देश की सरकार ने और मध्यप्रदेश की सरकार ने कभी यह नहीं किया क्योंकि वह कालाबाजारी करने वाले व्यापारियों को संरक्षण देती है।
मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि देश के किसानों का दुर्भाग्य है कि,जब से भाजपा सरकार केंद्र और प्रदेशों में आई है किसानों का बुरा हाल है ना तो उनको समय पर खाद बीज मिल पाता है ना ही उनका उत्पादन किया हुआ अनाज सही समय पर सही दाम में खरीदा जाता है और यहां तक की सरकार को बेचे गए धान और गेहूं को रखने के लिए सरकारों के पास 10% भी गोदाम नहीं है जो की वर्षा के मौसम में या अचानक आई वर्षा से करोड़ों टन अनाज बर्बाद होता है और कौड़ियों के दाम शराब फैक्ट्रीयों को मनमाने तरीके से बेचा जाता है।।

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