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पीएम मोदी के जन्मदिन पर नक्सलियों का एक पत्र सामने आया है, जिसमें शांति वार्ता का जिक्र है. पत्र 15 अगस्त को लिखा

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बस्तर\कवर्धा\रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर में बड़े नक्सल ऑपरेशन के बीच मंगलवार शाम से एक पत्र चर्चा में बना हुआ है. ये पत्र माओवादी संगठन के केंद्रीय कमेटी प्रवक्ता अभय ने जारी किया है. जिसमें 15 अगस्त 2025 की तारीख लिखी हुई है. लेकिन महीनेभर बाद 16 सितंबर को ये पत्र सामने आया है.
नक्सलियों ने एक महीने सीजफायर के लिए लिखा पत्र: माओवादियों के इस प्रेस नोट में लिखा गया है-” मार्च 2025 के आखिरी सप्ताह से हमारी पार्टी सरकार के साथ शांति वार्ता के लिए प्रयास कर रही है. हमारी पार्टी ने हथियार छोड़ने के लिए सीनियर नक्सली कॉमरेड से सलाह मशविरा के लिए एक माह का समय मांगते हुए सीजफायर की मांग की थी. लेकिन केंद्र की तरफ से इसका कोई जवाब नहीं आया. बल्कि इस दौरान हमले और तेज कर दिए गए.”
15 अगस्त को जारी दो पन्नों का ये प्रेस नोट बीजापुर मुठभेड़ में माओवादी के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू की हत्या के लगभग चार महीने बाद आया है. पत्र में आगे लिखा है-“पार्टी महासचिव बसवराजू की पहल पर शुरू की गई शांति वार्ता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए, हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि बदली हुई वैश्विक और राष्ट्रीय परिस्थितियों और सरकार के सरेंडर करने के लगातार अनुरोध को देखते हुए हथियार त्यागने का निर्णय लिया है.हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि भविष्य में, हम यथासंभव जनहित के लिए लड़ने वाले सभी राजनीतिक दलों और संगठनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करेंगे.”
नक्सलियों की केंद्र से सीधी बातचीत की पेशकश:* नक्सलियों के प्रेस नोट में आगे लिखा है-” हम इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री या उनके द्वारा नियुक्त अधिकारियों या किसी प्रतिनिधिमंडल से बात करने को तैयार हैं. लेकिन हमें अपनी बदली हुई राय से पार्टी को अवगत कराना होगा. इसलिए, केंद्र सरकार से हमारा अनुरोध है कि हमें देश भर के विभिन्न राज्यों में कार्यरत हमारे साथियों और जेल में बंद लोगों से परामर्श करने के लिए एक महीने का समय दिया जाए. हम इस विषय पर सरकार के साथ, वीडियो कॉल के माध्यम से, विचारों का आदान-प्रदान करने को भी तैयार हैं. इसलिए सरकार को तुरंत एक महीने के लिए औपचारिक युद्धविराम की घोषणा करनी चाहिए, तलाशी अभियान बंद करने चाहिए और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए. “
माओवादियों के प्रेस नोट पर गृह मंत्री का बयान* : नक्सलियों के सीजफायर के अनुरोध और एक महीने के समय देने के पत्र पर छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि 15 अगस्त का पत्र है. जिसमें उन्होंने लिखा है कि किन्ही कारणों से देरी से पत्र जारी किया गया है. अभय नामक प्रवक्ता ने कहा है कि उनके जनरल सेक्रेटरी बसवराजू ने इस विषय को आगे बढ़ाया था. उसी आधार पर वे इसे आगे बढ़ा रहे हैं. नक्सलियों के सामने आए पत्र के प्रमाणिकता की जांच की जा रही है. अगर इस पत्र में सच्चाई है, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सीएम विष्णुदेव साय इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेंगे

माओवादियों के जारी प्रेस नोट के सत्यता की जांच की जा रही है- विजय शर्मा, गृहमंत्री, छत्तीसगढ़

किस माध्यम से बात होगी के सवाल पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पत्र प्रमाणिक है और हथियार छोड़कर चर्चा करते हैं तो बात की जा सकती है. इसमें कई उपबंध है, जिन्हें नक्सलियों को खत्म करना चाहिए.

बस्तर में सुख शांति के लिए डबल इंजन की सरकार हर हाल में प्रयासरत है. यदि ऐसा हो सकता है तो बहुत अच्छा है- विजय शर्मा, गृहमंत्री, छत्तीसगढ़
नक्सलियों के प्रेस नोट में मिले कई अंतर:* डिप्टी सीएमविजय शर्मा ने कहा कि पहले भेजे गए पत्र और इस बार जारी प्रेस नोट में कई अंतर देखने को मिल रहा है. इस बार के पत्र में फोटो है. ईमेल आईडी, फेसबुक आईडी है. शब्दावली में भी अंतर देखने को मिल रहा है. पहले के पत्र में वे अपने कमांडर को कॉमरेड कहते थे लेकिन इस बार जनरल सेक्रेटरी कहा गया है. यदि माओवादियों के भाव में परिवर्तन आया है तो अच्छी बात है.

विजय शर्मा ने कहा कि पत्र 15 अगस्त को लिखा गया था. यदि उनका मनोभाव उस समय बना था तो उसके बाद शिक्षा दूतों की हत्या क्यों हुई. आईईडी ब्लास्ट क्यों हुए. ऐसे कई सवाल हैं, जो इस पत्र से जुड़े हैं. इसकी प्रमाणिकता की जांच होनी है.

इस बयान में एक नोट भी था, जिसमें कहा गया है कि कई कारणों से प्रेस नोट देरी से जारी किया गया.
   बेबाक शक्ति न्यूज़
राज्य ब्यूरो चीफ़ छत्तीसगढ़
   शांतनु श्रीवास्तव

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