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नूरी मस्जिद के पास बाबा फ़क़ीर की संदिग्ध हत्या,खून से लथपथ मिला शव

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शहडोल में सनसनीखेज वारदात

गश्त और सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल

शहडोल। 26 फरवरी 2026। पुरानी बस्ती स्थित नूरी मस्जिद और मजार के पास रेलवे लोको कॉलोनी के एक कमरे में रह रहे करीब 70,80 वर्षीय वृद्ध अब्दुल रहमान उर्फ़ “दद्दा”, जिन्हें मोहल्ले के लोग स्नेहपूर्वक “बाबा फ़क़ीर” कहकर पुकारते थे, की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। प्रारंभिक जांच में मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने धारा 194 बीएनएसएस के तहत मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। घटना गुरुवार दोपहर लगभग 12:30 बजे सामने आई, जब रोज़ की तरह भोजन देने पहुंचे एक युवक ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद पाया। झांककर देखने पर बाबा खून से लथपथ हालत में पड़े मिले। तुरंत कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।

IIF फॉर्म में दर्ज सनसनीखेज तथ्य

पुलिस द्वारा तैयार Registration of Unnatural Death under Section 194 BNSS” दस्तावेज के अनुसार: यूडी नंबर: 0024/2026 तारीख व समय: 26/02/2026, दोपहर 4:00 बजे पंजीयन थाना: कोतवाली शहडोल स्थान: वार्ड क्रमांक 27/36, पुरानी बस्ती, दुर्गा मंदिर के पास, नूरी मस्जिद क्षेत्र शव की स्थिति: खून से लथपथ। चेहरे, नाक और मुंह से अत्यधिक रक्तस्राव। हथेलियों व अंगुलियों पर चोट के निशान
गला घोंटने या फांसी के कोई साक्ष्य नहीं। आत्महत्या के संकेत नहीं। किसी रस्सी या अन्य वस्तु के उपयोग के प्रमाण नहीं दस्तावेज में उल्लेख है कि शव के सिर और चेहरे पर गंभीर चोट के निशान पाए गए। प्रथम दृष्टया किसी भारी वस्तु से वार किए जाने की आशंका जताई जा रही है। भीख से जीवन, मोहल्ले ने निभाई इंसानियत की मिसाल अब्दुल रहमान पिछले 15,20 वर्षों से उक्त कमरे में अकेले रह रहे थे। उम्रदराज़ और असहाय होने के कारण वे भीख मांगकर जीवन यापन करते थे। बीते कुछ वर्षों से उनकी सेहत कमजोर हो चुकी थी, जिसके बाद मोहल्ले के लोगों ने उनकी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली थी। कोई सुबह का नाश्ता देता था, कोई दोपहर का भोजन और कोई रात का खाना पहुंचाता था। लोग कपड़े, चप्पल और दवाइयों की व्यवस्था भी करते थे। हिंदू मुस्लिम सभी समुदाय के लोग उनके पास आते थे और आशीर्वाद लेते थे।

स्थानीय निवासियों का कहना है

कि बाबा बेहद सरल, शांत और धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। घटना से पहले का घटनाक्रम सूत्रों के अनुसार 25 फरवरी की शाम लगभग 6 बजे मोहल्ले के एक युवक ने उन्हें भोजन पहुंचाया था। उस समय बाबा कमरे में अकेले थे। इसके बाद गुरुवार को जब दोपहर में फिर भोजन देने जाया गया तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। शक होने पर झांककर देखा गया तो बाबा फर्श पर पड़े थे और कमरे में खून फैला हुआ था। सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। आसपास के लोगों से पूछताछ की गई। क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जा रही है।

नशेड़ी तत्वों पर संदेह, लूट की आशंका

मोहल्ले के कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि क्षेत्र में सक्रिय नशेड़ी तत्व पहले भी बाबा को परेशान करते थे। संभावना जताई जा रही है कि मामूली रकम या सामान लूटने की नीयत से वारदात को अंजाम दिया गया हो। हालांकि पुलिस ने किसी भी कोण से इनकार नहीं किया है और हर पहलू से जांच की बात कही है। घनी आबादी में हत्या, गश्त पर सवाल घटना घनी आबादी वाले क्षेत्र में हुई है, जहां रात में भी आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में स्थानीय लोगों ने पुलिस गश्त पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि नियमित गश्त और निगरानी होती तो शायद इस वारदात को रोका जा सकता था। बीच मोहल्ले में एक असहाय वृद्ध की हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण और वारदात की सटीक प्रकृति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस अज्ञात आरोपियों के खिलाफ जांच में जुटी है। शहर में शोक और आक्रोश। बाबा फ़क़ीर का कोई सगा-संबंधी नहीं था। पूरे मोहल्ले ने ही उन्हें अपना परिवार माना था। उनकी हत्या से क्षेत्र में शोक के साथ आक्रोश भी है। अब शहर की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं। क्या शहडोल पुलिस इस सनसनीखेज हत्याकांड का जल्द खुलासा कर पाएगी? क्या आरोपियों को गिरफ्तार कर न्याय दिलाया जाएगा? यह घटना केवल एक बुजुर्ग की हत्या नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी परीक्षा भी है।

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