साहब को न काम से मतलब, न अभियान से! जयसिंहनगर की मसीरा पंचायत में ‘लापता’ मिले सचिव

शिव महिमन मिश्रा
शहडोल/जयसिंहनगर: मध्य प्रदेश शासन द्वारा जल स्रोतों के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को जमीनी स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही का सामना करना पड़ रहा है। ताजा मामला शहडोल जिले के जयसिंहनगर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मसीरा से सामने आया है, जहाँ अभियान के दौरान जिम्मेदार पंचायत सचिव नदारद पाए गए।
अभियान की उड़ी धज्जियां शासन की मंशा है कि इस अभियान के माध्यम से जल संरचनाओं की सफाई और संरक्षण किया जाए, जिसमें पंचायत स्तर के अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन मसीरा पंचायत में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में सचिव साहब की अनुपस्थिति ने प्रशासन की गंभीरता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव महोदय का यह रवैया नया नहीं है। ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा:
सचिव साहब ग्राम पंचायत कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते।
शासकीय कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण अभियानों में भी उनकी सहभागिता शून्य रहती है।
आम जनता को अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए कई दिनों तक भटकना पड़ता है।
अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल एक तरफ जहाँ प्रदेश के मुख्यमंत्री और आला अधिकारी जल संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता फैलाने में जुटे हैं, वहीं मसीरा जैसे सुदूर अंचलों में बैठे पंचायत कर्मी सरकारी निर्देशों को ठेंगा दिखा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जनपद पंचायत और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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