शहडोल: न्याय के लिए भटक रहे श्रमिक और पक्षकार,जिला विकास सलाहकार समिति ने उप-मुख्यमंत्री से की स्थाई नियुक्तियों की मांग

शहडोल। संभाग में न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए जिला विकास सलाहकार समिति (विधि) ने मोर्चा खोल दिया है। समिति के सदस्यों ने मध्य प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री श्री राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल को पत्र लिखकर शहडोल में श्रम न्यायालय के नियमित संचालन और अपर आयुक्त की स्थाई पदस्थापना की मांग की है।
श्रमिकों के हक पर ‘कैम्प कोर्ट’ का साया
समिति के विधि सदस्य हर्ष वर्धन सिंह और रमेश त्रिपाठी ने बताया कि विंध्य प्रदेश का प्रथम श्रम न्यायालय वर्ष 1970-71 में शहडोल में ही खोला गया था। विडंबना यह है कि आज यह न्यायालय केवल सतना से आने वाले अधिकारियों के भरोसे ‘कैम्प कोर्ट’ के रूप में महीने में मात्र एक सप्ताह संचालित हो रहा है।
शहडोल संभाग श्रमिक बाहुल्य क्षेत्र है, जहाँ बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग निवास करते हैं। नियमित न्यायालय और स्थाई न्यायाधीश न होने के कारण शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिलों के सैकड़ों प्रकरण वर्षों से लंबित हैं, जिससे मजदूर न्याय से वंचित हो रहे हैं।
अपर आयुक्त के अभाव में लंबित पड़े हजारों मामले
दूसरे मांग पत्र में समिति ने संभाग में अपर आयुक्त की स्थाई पदस्थापना का मुद्दा उठाया है। वर्तमान में शहडोल कमिश्नर ही अपर आयुक्त न्यायालय का कार्यभार भी संभाल रहे हैं। एक ही अधिकारी पर दो न्यायालयों का बोझ होने के कारण मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। न्याय पाने के लिए पक्षकारों को वर्षों तक भटकना पड़ रहा है।
समिति की मुख्य मांगें:
शहडोल श्रम न्यायालय में स्थाई पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति कर इसे नियमित रूप से संचालित किया जाए।
संभाग में अपर आयुक्त की अविलंब स्थाई पदस्थापना के आदेश जारी किए जाएं।
सलाहकार समिति ने उम्मीद जताई है कि उप-मुख्यमंत्री इस गंभीर विषय पर त्वरित संज्ञान लेंगे ताकि क्षेत्र के नागरिकों और श्रमिकों को समय पर न्याय मिल सके।

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