एक ही क्रमांक, एक ही दिनांक… फिर दो अलग-अलग पत्र! आखिर जिम्मेदार कौन?

वेबाक शक्ति न्यूज़ | विशेष समाचार
रिपोर्ट: अनूप शर्मा, शहडोल डिवीज़न हेड
अनूपपुर वन विभाग से सामने आए दस्तावेज़ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। 14 जुलाई 2026 को एक ही पत्र क्रमांक 3701 और एक ही दिनांक पर दो अलग-अलग प्रथम अपीलीय अधिकारियों के नाम पत्र जारी होना रिकॉर्ड प्रबंधन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि दोनों पत्र आधिकारिक हैं, तो विभाग को स्पष्ट करना होगा कि वास्तविक पत्र कौन-सा है और दूसरा किस आधार पर जारी किया गया।
सरकारी अभिलेखों में प्रत्येक पत्र क्रमांक की अपनी अलग पहचान होती है। ऐसे में एक ही क्रमांक से दो अलग-अलग पत्र जारी होना साधारण प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। यह मामला रिकॉर्ड संधारण में गंभीर लापरवाही या अन्य प्रशासनिक त्रुटि की ओर संकेत करता है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह लापरवाही किस अधिकारी या कर्मचारी के स्तर पर हुई और जांच किसके विरुद्ध होगी? यदि रिकॉर्ड में गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदारी तय होना भी उतना ही आवश्यक है। सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है, इसलिए इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
अब निगाहें प्रशासन पर हैं—क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? जनता जवाब चाहती है, क्योंकि पारदर्शिता ही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान है।

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