भारत में सबसे तेजी से उभरता हुआ वेब न्यूज़ चैनल

श्रमिकों के हक की लड़ाई: एडवोकेट रमेश त्रिपाठी ने उठाई शहडोल लेबर कोर्ट को नियमित करने की मांग, प्रभारी मंत्री को सौंपा पत्र

23
Above News

शहडोल।शहडोल संभाग में न्याय की आस लगाए बैठे हजारों गरीब मजदूरों और श्रमिकों के हक पर प्रशासनिक उपेक्षा का ग्रहण लगा हुआ है। अनुसूचित जाति और जनजाति बाहुल्य इस संभाग में, जहाँ मजदूरी ही आजीविका का मुख्य साधन है, वहाँ श्रमिकों को अपने कानूनी अधिकारों के लिए बरसों इंतजार करना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर ‘कार्यालय जिला विकास सलाहकार समिति (विधि)’ ने प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिला प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रसाद शुक्ल को एक मांग पत्र सौंपकर शहडोल संभागीय मुख्यालय में नियमित श्रम न्यायालय (लेबर कोर्ट) संचालित करने और स्थायी न्यायाधीश की पदस्थापना की पुरजोर मांग की है।
गौरवशाली इतिहास, पर वर्तमान में बदहाली का शिकार
प्रभारी मंत्री को सौंपे गए पत्र में एडवोकेट हर्ष वर्धन सिंह और एडवोकेट रमेश त्रिपाठी (विधि सदस्य, जिला विकास सलाहकार समिति) ने बताया कि शहडोल का श्रम न्यायालय ऐतिहासिक महत्व रखता है। वर्ष 1970-71 में तत्कालीन विन्ध्य प्रदेश का पहला श्रम न्यायालय शहडोल में ही खोला गया था, जिसका कार्यक्षेत्र पूरा विन्ध्य क्षेत्र था। बाद में सतना, रीवा, सिंगरौली और छतरपुर में भी श्रम न्यायालय खोले गए। लेकिन विडंबना देखिए कि जहाँ से इसकी शुरुआत हुई, आज वही क्षेत्र उपेक्षा का दंश झेल रहा है।
महीने में सिर्फ 7 दिन कोर्ट, तीन जिलों के मजदूर परेशान
मांग पत्र में विधि सदस्यों ने जमीनी हकीकत उजागर करते हुए बताया कि वर्तमान में शहडोल श्रम न्यायालय में कोई स्थायी न्यायाधीश नहीं है। सतना से श्रम पदाधिकारी यहाँ आते हैं और हर महीने महज एक सप्ताह (7 दिन) के लिए कैम्प कोर्ट का संचालन किया जाता है।
इस एक सप्ताह के भीतर न केवल शहडोल, बल्कि पड़ोसी जिले उमरिया और अनूपपुर के श्रमिक भी अपने मामलों की सुनवाई के लिए भटकने को मजबूर हैं। नियमित न्यायालय न होने के कारण सामान्य और बेहद जरूरी प्रकरण भी वर्षों से लंबित पड़े हैं। आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक न्याय पाने के लिए दफ्तरों और तारीखों के चक्कर काटने को विवश हैं, जिससे वे व्यावहारिक रूप से ‘न्यायदान’ से वंचित हो रहे हैं। जिला विकास सलाहकार समिति ने की ये प्रमुख मांगें: नियमित संचालन: शहडोल संभागीय मुख्यालय में संचालित लेबर कोर्ट को तत्काल प्रभाव से फुल-टाइम (नियमित) रूप से संचालित किया जाए। स्थायी जज की नियुक्ति: कैम्प कोर्ट की व्यवस्था को बंद कर यहाँ एक स्थायी पीठासीन अधिकारी (जज) की पदस्थापना सुनिश्चित की जाए। त्वरित न्याय: लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा कर शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिलों के हजारों श्रमिकों को राहत दी जाए। बेबाक शक्ति न्यूज टिप्पणी: एक तरफ सरकार श्रमिकों के कल्याण और अंत्योदय की बातें करती है, वहीं दूसरी तरफ श्रमिक बाहुल्य संभाग में ही न्याय की गाड़ी महीनों पीछे चल रही है। अब देखना यह है कि जिले के प्रभारी मंत्री और उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल इस संवेदनशील मामले पर कितनी जल्दी संज्ञान लेते हैं और विन्ध्य के इस ऐतिहासिक लेबर कोर्ट को उसका पुराना गौरव और नियमित स्वरूप कब तक वापस मिलता है।
– ब्यूरो रिपोर्ट, बेबाक शक्ति न्यूज

खबरों के अपडेट पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमारा एंड्राइड ऐप भी डाउनलोड कर सकते है|

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy
E-Paper