MP//Rewa// RTI की धारा 2(जे) के तहत कॉलेक्ट्रेट बिल्डिंग का होगा निरीक्षण, RTI से जुड़ी जानकारी 17 पॉइंट्स मैनुअल और नोटिस बोर्ड का होगा निरीक्षण, RTI एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी के आवेदन पर अब होगी रीवा में ऐतिहासिक कार्यवाही

सामान्य तौर पर हर कोई व्यक्ति कुछ न कुछ जानकारी सूचना के अधिकार अथवा अन्य माध्यमों से प्राप्त करता रहता है। अमूमन हम सभी लोग जब आरटीआई आवेदन फाइल करते हैं तो किसी न किसी कागजात या दस्तावेज की प्रमाणित प्रति मांगते है। पर शायद कम लोगों को ही यह जानकारी होगी कि आरटीआई के आवेदन के दौरान हम धारा 2(जे)(1) के तहत किसी कार्य, किसी कार्यालय, किसी दस्तावेज अथवा किसी भी स्थल का निरीक्षण भी कर सकते हैं और साथ में धारा 2(जे)(3) के तहत किसी निर्माण कार्य का सैंपल भी ले सकते हैं।
धारा 2(जे) के तहत कलेक्टर बिल्डिंग से संबंधित सभी विभागों का किया जाएगा आधिकारिक निरीक्षण
अभी हाल ही में आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के द्वारा कार्यालय कलेक्टर रीवा में लोक सूचना अधिकारी के नाम पर एक आरटीआई आवेदन दायर किया गया था जिसमें अपीलार्थी के द्वारा धारा 4 के तहत 17 पॉइंट मैनुएल्स की जानकारी, धारा 6 के तहत प्रपत्र 5 एवं 6 की जानकारी एवं साथ में किसी भी कार्यालय में नोटिस बोर्ड में पंपलेट, पोस्टर अथवा अन्य माध्यमों से लिखे जाने वाले लोक सूचना अधिकारी, प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं राज्य सूचना आयोग के नाम पदनाम मोबाइल नंबर एवं अन्य जानकारी का निरीक्षण करने के लिए धारा 2(जे)(1) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
कार्यालय कलेक्टर लोक सूचना अधिकारी रीवा के द्वारा समस्त विभाग प्रमुखों को जारी हुआ पत्र
उक्त आवेदन के जवाब में लोक सूचना अधिकारी कार्यालय जिला कलेक्टर रीवा के द्वारा पत्र क्रमांक 36/आरटीआई/2020 दिनांक 23 नवंबर 2020 को आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी को पृष्ठांकित जारी पत्र जिसको समस्त विभाग प्रमुखों को लेख किया गया है कि आवेदक द्वारा धारा 2(जे) के तहत समस्त विभाग प्रमुखों के लोक सूचना अधिकारी कार्यालय का आधिकारिक निरीक्षण किया जाएगा जिसमें धारा 4 के तहत 17 पॉइंट्स मैनुअल एवं लोक सूचना अधिकारी के नाम पदनाम मोबाइल नंबर और इसी प्रकार अपील प्रक्रिया की जानकारी, पीआईओ एफएओ की सील की जानकारी, अन्य दस्तावेज की जानकारी का निरीक्षण किया जाएगा। डिप्टी कलेक्टर एवं लोक सूचना अधिकारी कार्यालय कलेक्टर रीवा के द्वारा सभी विभाग प्रमुखों को निर्देशित किया गया है कि आधिकारिक निरीक्षण के पूर्व समस्त नोटिस बोर्ड और दस्तावेज तैयार रखें जिससे आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा अधिकारिक निरीक्षण किया जा सके।
धारा 2(जे) में निरीक्षण और सैंपल के प्रावधान से सूचना के क्षेत्र में आ सकती है क्रांति
वास्तव में यदि देखा जाए तो आरटीआई कानून का सही प्रकार से इंप्लीमेंटेशन न हो पाने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह होता है कि न तो आवेदकों को यह जानकारी होती है कि आरटीआई आवेदन कहां और किस व्यक्ति को देना है और न ही संबंधित विभागों द्वारा इसकी कोई प्रक्रिया पूर्ण की जाती है कि वह यह जानकारी नोटिस बोर्ड में विधिवत चस्पा करें। इसलिए देखा जाए तो इन समस्त समस्याओं के समाधान के लिए आरटीआई की धारा 2(जे) जिसमें उप धारा 1 के तहत निरीक्षण का प्रावधान होता है एवं उपधारा 3 के तहत किसी कार्य का सैंपल लेने का प्रावधान होता है इसके तहत काफी परिवर्तन लाया जा सकता है। एक्टिविस्ट के निरीक्षण सम्बन्धी आवेदन के बाद ही कॉलेक्ट्रेट में मंथन प्रारंभ
यहीं पर देखा जाए तो एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के द्वारा जिस दिन से कलेक्टर बिल्डिंग कार्यालय में संलग्न समस्त विभागों के निरीक्षण के लिए धारा 2(जे) के तहत आरटीआई आवेदन दायर किया गया है उस दिन से कलेक्टर कार्यालय और बिल्डिंग से संबंधित सभी विभागों में हड़कंप मचा हुआ है। लोक सूचना अधिकारी के द्वारा 23 नवंबर को जारी किया गया पत्र इस बात का जीता जागता प्रमाण है कि आरटीआई कानून को मजबूत बनाने में एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी द्वारा निरंतर प्रयास हो रहे हैं।
कलेक्टर बिल्डिंग से संबंधित विभागों के निरीक्षण के बाद क्या होंगे इसके दूरगामी परिणाम?
अब सबसे बड़ा बड़ा सवाल यह है कि एक्टिविस्ट द्विवेदी के द्वारा कलेक्टर कार्यालय एवं उससे संबद्ध बिल्डिंग में अन्य विभागों में धारा 2(जे)(1) के तहत नोटिस बोर्ड, सील-ठप्पा, धारा 4 के तहत 17 पॉइंट्स मैनुअल रजिस्टर आदि के निरीक्षण के बाद की स्थिति पर क्या प्रतिक्रिया होगी? जाहिर है जिस प्रकार लोक सूचना अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर अरविंद कुमार झा के द्वारा समस्त विभाग प्रमुखों को पत्र जारी कर आधिकारिक निरीक्षण के पूर्व सभी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लिखा गया है उससे साफ जाहिर है कि आने वाले भविष्य में इसके दूरगामी परिणाम होंगे और सभी विभाग आरटीआई कानून को बेहतर तरीके से इंप्लीमेंटेशन करने के लिए बाध्य होंगे। वास्तव में देखा जाए तो कागज इकट्ठा करने के साथ साथ निरीक्षण और सैंपल लेने की प्रक्रिया जो की धारा 2(जे ) के तहत उपलब्ध कराई गई है ज्यादा उपयोगी समझी जा सकती है क्योंकि धारा 2(जे) के तहत निरीक्षण और सैंपल की स्थिति में आरटीआई कानून को मजबूत बनाने में काफी बल मिलता है।
आरटीआई की धारा 2(जे) के तहत निरीक्षण पर क्या कहना है एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी का
इस विषय में जब आरटीआई एक्टिविस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि आरटीआई कानून को मजबूत बनाने की दिशा में धारा 2(जे)(1) एवं 2(जे)(3) के तहत कार्यालय दस्तावेज एवं कार्य का निरीक्षण एवं अन्य निर्माण कार्यों की सैंपल लेने की जो सुविधा और अधिकार आरटीआई आवेदकों को प्रदान किए जाते हैं उससे वास्तव में सरकारी कामकाज और विभागों की स्थिति में काफी हद तक सुधार लाया जा सकता है। क्योंकि निरीक्षण और सैंपल लेने से वह विभाग और वह कार्य करने वाली एजेंसी अपने आपको सचेत करती है जिससे विभागों की स्थिति में सुधार हो जाता है तथा कार्य की गुणवत्ता में भी सुधार आ सकता है।
आरटीआई कानून को मजबूत बनाने एक्टिविस्ट मदद कर सकते हैं पर आयोग को त्वरित एक्शन लेना पड़ेगा – शिवानन्द द्विवेदी
इस प्रकार आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा बताया गया कि आवेदकों को धारा 2(जे) का विशेष तौर पर ज्यादा प्रयोग कर आरटीआई आवेदन लगाकर निरीक्षण और सैंपल लेने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। एक्टिविस्ट द्वारा यह भी कहा गया कि निरीक्षण और सैंपल दोनो मामलों में सूचना आयोग की भूमिका ज्यादा अहम हो जाती है। जब पीआईओ द्वारा असहयोग किया जाता है तो इन दोनों ही मामलों में आयोग को एक्टिव होना पड़ेगा क्योंकि आयोग के हस्तक्षेप से मामलों का निपटारा जल्दी होगा अन्यथा की स्थिति में यदि कार्य तत्कालीन है तो सैंपल नही मिलने से कार्य पूर्ण हो जाएगा जिससे सैंपल की जांच कब होगी और कैसे होगी सदैव ही प्रश्न के दायरे में रहेगा। इसी प्रकार 17 पॉइंट्स मैनुअल और नोटिस बोर्ड एवं धारा 4 की जानकारी अयोग की जिम्मेदारी है जिसमे आवेदक मात्र आरटीआई कानून मजबूत बनाने में आयोग की मदद कर सकता है लेकिन यह आयोग की जिमनेदारी होगी को वह आवेदकों की शिकायत पर जल्दी और त्वरित एक्शन ले।

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