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MP//Rewa// सड़क दुर्घटना में मर रहे गोवंश, गोरक्षक पार्टियां बन गईं गौभक्षक

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भारत शायद विश्व का इकलौता ऐसा देश है जहां गाय को माता माना जाता है और युग युगांतर से उसकी पूजा की जाती है लेकिन आज वर्तमान समय में गोवंश की जिस प्रकार से दुर्दशा हो रही है उससे ऐसा प्रतीत नहीं होता कि भारत में कभी गोवंशों को पूजा जाता था हाँ मात्र पूजा का ढोंग जरूर होता है।
ठंड के साथ पशु क्रूरता में हुई वृद्धि
     ठंड बढ़ने के साथ एक बार फिर पूरे देश में गोवंशों के साथ क्रूरता और अत्याचार बढ़ गया है। अमूमन वाहन की गर्मी महसूस कर गोवंश सड़क किनारे आ जाते हैं परंतु उन्हें यह नहीं पता रहता कि बेतरतीब और अनियंत्रित चाल से चल रहे वाहन चालक उन्हें मौत के घाट उतार देंगे। भला बेजुबान मवेशियों को इतने ज्ञान कहां से आए।      1 दिसंबर 2020 को देवास लालगांव हिनौती से होते हुए कलवारी सड़क पर करहिया मोड़ के पास ट्रक की ठोकर से 3 गोवंशों की मौत हो गई। आलम यह है कि उन मृतक गोवंशों को हटाने वाला कोई नहीं है और वही रोड के किनारे पड़े बदबू फैला रहे हैं जिसकी वजह से आने जाने वाले लोगों के लिए महामारी की स्थिति बन चुकी है।
शिवराज की भाजपा सरकार कागजों में गौशाला बनाकर फुर्सत      भारत में गाय के नाम पर राजनीति स्वतंत्रता प्राप्ति के पहले से होती है आ रही है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद तो गाय के नाम पर भरपूर राजनीति की गई यहां तक कि सरकारें भी गाय के नाम पर बनती बिगड़ती रहती है लेकिन दुर्भाग्य है कि गाय की स्थिति दिन प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है। भाजपा इकलौती ऐसी पार्टी है जिसने गाय को राजनीति का अखाड़ा बनाया और वर्तमान में सरकार एक बार फिर आई लेकिन जहां बूचड़ खानों के लिए सबसे ज्यादा सब्सिडी भाजपा सरकार ने जारी किया वहीं मध्यप्रदेश में 15 वर्ष से अधिक की शिवराज सिंह सरकार ने गाय के लिए कुछ भी अच्छा नहीं किया। कमलनाथ की कांग्रेस सरकार ने 3000 गौशाला खोलने की घोषणा तो की लेकिन वह भी समय पर पूरी नहीं हो सकी और कई गौशालाऐं बनने के बाद भी गोवंश बाहर मारे मारे फिर रहे और विभिन्न प्रकार की क्रूरता का शिकार हो रहे हैं। अब एक बार पुनः शिवराज सिंह की भाजपा सरकार मध्यप्रदेश में आ चुकी है और गो कैबिनेट गठन करने की बात की जा रही है लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह गो कैबिनेट कब गठित होगी और गौशालाऐं कब बनेगी क्योंकि जब गाय ही नहीं रहेगी तो कैबिनेट गठन करने से क्या फायदा होगा?

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