लोकतांत्रिक जनता दल रीवा द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर पर देश भर में अनशनरत किसानों की मांगों को लेकर विशाल धरना दिया

रीवा:-लोकतांत्रिक जनता दल रीवा द्वारा 19 जनवरी को कलेक्ट्रेट परिसर पर देश में अनशन रथकिसानो एवं रीवा कृषि उपज मंडी में अनशन कर रहे किसानों की की मांगों को लेकर विशाल धरना दिया गया जिसके मुख्य अतिथि लोकतांत्रिक जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सिंह रहे, कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष रामराज पटेल ने की। धरने के बाद सायं 4ः00 बजे जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि तहसीलदार को अपनी 8 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौपा गया।
धरने में मुख्य रूप से दिलीप सिंह प्रदेश अध्यक्ष लोकतांत्रिक जनता दल संबोधित किया साथ ही लोकतांत्रिक जनता दल के युवा नेता शेखर पटेल छेदीलाल सेन जिला महासचिव, इंद्रजीत सिंह किसान नेता, बीपी दहिया, संतलाल पटेल किसान नेताउपाध्यक्ष यज्ञभान जयसवाल डॉ राज धर पटेल, खुशी लाल पटेलसुरेश पटेल कोषाध्यक्ष दिनेश डायमंड किसान नेता, किसान नेता तेजभान सिंह, संतोष कुशवाहा एडवोकेट हीरालाल पटेलसंतोष नामदेव राम लोटन पटेल अध्यक्ष गुड विधानसभा, राजेश पटेल शुकुल बुनकर, खुशी लाल पटेल आर पटेल पुष्पराज सिंह दिलीप पटेल रामचंद्र पटेल लवकुश पटेल, मो0 कदीर, रामकृष्ण पटेल, कृष्ण कुमार विश्वकर्मा, रघुवीर कोल, संतोष पटेल, हीरालाल पटेल, अनिल पटेल, महेश पटेल, आदि ने मुख्य रूप से धरना कार्यक्रम को संबोधित किया।
लोकतांत्रिक जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सिंह ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है देश की 73 फीसदी आबादी खेती और किसानी से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी है सबसे ज्यादा रोजगार इसी क्षेत्र से नागरिकों को उपलब्ध है आजादी के 73 सालों में देश का किसान शासन-प्रशासन की नीतियों के चलते बदहाली बेबसी और लाचारी का शिकार है किसान को उसकी उपज का वाजिब दाम दिलाने में सरकारे असफल रहीं हैं कोरोना महामारी में आपदा में अवसर तलाशने वाले मोदी सरकार ने चंद कारपोरेट्स, पूंजीपतियों, धन्ना सेठों के इशारे पर देश की खेती किसानी को गिरवी रखने का प्रयास किया है, देश के श्रम कानूनों में भारी बदलाव किया है तथा तीन कृषि कानून लाकर किसानों मध्यमवर्ग और मजदूरों तथा आम उपभोक्ताओं की कमर तोड़ने का काम किया है। इन कानूनों से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी नहीं मिल पाएगी स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को यह कानून पूरी तरह से नकारते हैं यह तीनों बिल किसान विरोधी है पूजी पतियों को लाभ देने वाले हैं लोकतांत्रिक जनता दल तीनों कृषि कानूनों का पुरजोर विरोध करता है। आज देश की राजधानी दिल्ली की शरहदों मे देश का किसान और उसका प्रतिनिधि 55 दिनों से इस ठण्ड में अपनी जायज मांगों को लेकर अनशनरत हैं, 125 किसानों की ठण्ड से मौत हो गई, तब भी केन्द्र में आसीन निरंकुश, असंवेदनशील, निष्ठुर, हठधर्मी भाजपा सरकार बिल को वापस लेने का कार्य नही कर रही है। देश की सरकार देश के सार्वजनिक उपक्रमों को ओने पौने दाम में बेचने का कृत्य कर रही है 2014 15 से आज तक 336231 करोड रुपये कि सार्वजनिक सरकारी उपक्रमों को की हिस्सेदारी को बेचा गया है देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि की गई है रसोई गैस की सब्सिडी समाप्त कर दी गई आम उपभोक्ता को महंगे दामों में लोहा सीमेंट खाद्य पदार्थ लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। राम राज पटेल जिला अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूंजी पर सरकार है यह स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं करना चाहती है इसने वादा किया था कि हम दो करोड़ लोगों को रोजगार देंगे किसानों को लागत मूल्य का दुगना देंगे लेकिन इसकी जगह है काला कानून लेकर आई है जो किसानों की कमर तोड़ देगा यह सरकार पूरी तरह से ग्राम कुछ संवेदनहीन और निश्चित सरकार है।
किसान नेता रामजीत सिंह जी ने किसान तीनों किसान बिलों के संदर्भ में कहा कि कृषि कानूनों में बदलाव कर केन्द्र सरकार कारपोरेट व व्यापारियों को लाभ देना चाहती है एवं उन्हे कृषि कानूनों के माध्यम से जमाखोरी, कालाबाजारी का लाइसेन्स दे रही, एम.एस.पी. की गारन्टी तथा स्वामीनाथन आयोग की शिफारिसों को लागत मूल्य का डेढ़ गुना किसानों की उपज का मूल्य तय करने की बात को भी उक्त कानून में पूरी तरह से नकार दिया गया है। लोकतांत्रिक जनता दल जिला इकाई के अध्यक्ष राम राज पटेल एडवोकेट ने कहा कि लोकतांत्रिक जनता दल रीवा द्वारा 19 जनवरी को दिन 11ः00 बजे से कलेक्ट्रेट परिसर में देश व रीवा कृषि उपज मंडी में आंदोलनरत किसानों की जायज मांगों तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी देने तथा 29 श्रम कानूनों में मजदूरों के हितों के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा किए गए बदलाव के विरोध एवं पेट्रोल डीजल रसोई गैस लोहा सीमेंट अन्य खाद्य पदार्थों सहित दैनिक उपयोग उपयोग में आने वाली वस्तुओं के दामों में की गई अप्रत्याशित वृद्धि के चलते बढ़ती महंगाई आदि मुद्दों के विरोध में एक दिवसीय धरना दिया गया।
ज्ञापन में मुख्य रूप से देश व प्रदेश के आम जनों का जीवन कोरोना महामारी के चलते अस्त-व्यस्त हो गया है, केंद्र व राज्य की सरकार आपदा में अवसर का लाभ लेकर किसान, मजदूर, गरीब विरोधी कार्यो में लिप्त है, वह आम जनों के शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व गरीबी, किसानी, मजदूरी के सवाल पर मूकवधिर बन कर बैठी हुई हैं। केंद्र सरकार जून 2020 में तीन कृषि अध्यादेश (1) किसानों की उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविध प्रदान करना) कानून 2020। (2) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं संबंधी सशक्तिकरण और संरक्षण करार कानून 2020। (3) आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 लेकर आई, जिसे सितंबर 2020 में कोरोना महामारी के समय देश के सदन के अंदर बिना मत विभाजन के पारित किया गया। यह तीनों कृषि अध्यादेश भारत के करोड़ों किसान परिवारों के भविष्य से जुड़े हुए हैं, इन कानूनों के माध्यम से सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद बंद करना चाहती है, सरकारी मंडियां बंद होने से खाद्यान्ह सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी, कांट्रैक्ट फार्मिंग (ठेका खेती) से किसान अपने ही खेत का मालिक होने की जगह वह मजदूर बनकर रह जाएगा, बड़े कारपोरेट्स व पूंजी पतियों का देश की खेती में कब्जा हो जाएगा, किसान को उसकी उपज का वाजिब दाम नहीं मिल सकेगा। देश भर के किसान देश की राजधानी दिल्ली की शरहदों में अपनी जायज मांगों को लेकर उक्त काले कानूनों के विरोध में धरना दिये हुये हैं। अतः किसानों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द से जल्द केन्द्र सरकार कृषि कानूनों को वापस ले। स्वामीनाथन आयोग की अनुशंसा के अनुरूप किसानों को सी-2 लागत मूल्य का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाय, प्रत्येक 5 किलोमीटर के दायरे में सरकारी मंडी स्थापित की जाय। प्रदेश के किसानों की लहलहाती फसलों को आवारा पशुओं से बचाने हेतु ग्राम स्तर पर कांजी हाउस, गौशाला, जिला व संभाग स्तर पर गौ-अभ्यारण बनाया जाय तथा पशुओं के दाना पानी की सुचारू रूप से व्यवस्था की जाय। नीलगाय व जंगली जानवरों से नुकसान हुई फसल को राजस्व पुस्तक परिपत्र में शामिल कर मुआवजा दिलाया जाय। अंर्तराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पाद की लागत कम होने के बावजूद डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि की गई है, उक्त पैट्रोलियम पदार्थों मे से एक्साइज ड्यूटी सहित अन्य जजिया करों को हटाया जाय, जिससे आम नागरिकों को उचित दाम पर डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस मिल सके। पैट्रोलियम पदार्थों के मूल्य वृद्धि व जमाखोरी के चलते दैनिक उपयोग, उपभोग की वस्तुएं जैसे लोहा, सीमेंट, खाद्य पदार्थ आदि में भारी वृद्धि देखने को मिल रही है, जिसके चलते मध्यम वर्गीय लोगों, किसानों व आमजनों का जीवन दुश्वार व कठिन हो गया है। अतः डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस सहित अन्य वस्तुओं के मूल्यों में की गई अप्रत्याशित वृद्धि पर अविलंब रोक लगाई जाय। केन्द्र सरकार द्वारा 29 श्रम कानूनों में व्यापक रूप से बदलाव किए गए हैं जो कि मजदूर विरोधी हैं, उक्त कानून में न्यूनतम मजदूरी व काम के 8 घंटे के अधिकार को समाप्त कर बड़े पूंजीपतियों के पक्ष में बदलाव किए गए हैं, उक्त बदलाव देश के मजदूरों के संगठनों को विश्वास में लिए बगैर तानाशाही तरीके से किए गए हैं, उक्त कानून के माध्यम से श्रम न्यायालयों को समाप्त करने की साजिश की जा रही है। केन्द्र सरकार द्वारा किए गए श्रम कानूनों के बदलाव को तुरन्त वापस लिया जाय। केन्द्र सरकार सार्वजनिक उपक्रमों को निजीकरण कर देश के बड़े पूंजीपतियों को बेचने में आमादा हैं, देश के सार्वजनिक उपक्रमों को कारपोरेट की तर्ज पर राहत पैकेज देकर उनका सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिये तथा संचार व रक्षा के क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों की सहभागिता अवश्य बनाए रखें। इसके अभाव में देश की संप्रभुता को खतरा होगा। अतः सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण के प्रयास पर केंद्र सरकार द्वारा तत्काल रोक लगाई जाय। रीवा में यूनिवर्सिटी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास की जमीन पर मंदिर निर्माण कर किए गये अवैध अतिक्रमण को जिला प्रशासन द्वारा हटाए जाने के बाद पुनः हिंदुत्व व सनातन धर्म के नाम पर महिमामंडित कर शासकीय जमीन को जिला प्रशासन व राज्य सरकार के नुमाइन्दों द्वारा एक वर्ग विशेष के लोगों की शह पर अवैध अतिक्रमण को वैध कराये जाने का कृत्य किया जा रहा है और तर्क दिया जाता है कि रीवा शहर के अन्य अवैध अतिक्रमण हटाये जायें उसके बाद यहां कोई कार्यवाही हो, जबकि हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीनों, सड़को के किनारे, नहर की जमीनों, शासकीय खाली पड़ी जमीनों पर धार्मिक आयोजनों के नाम पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा विधि संगत नहीं है। वैसे भी रीवा शहर में आबादी का दबाव पहले से ज्यादा है, वहीं दूसरी तरफ सड़को के किनारे लगे बरगद, पीपल पेड़ के नीचे मूर्तियां रख कर मन्दिर निर्माण कर धार्मिक भावनाओं के पीछे शासन की बहुमूल्य जमीनों को हड़ने के लिये लगातार प्रयास किया जा रहा है। इस कृत्य को जल्द से जल्द रोका जाय। विगत दिनों मध्य प्रदेश के मंदसौर, नीमच, उज्जैन जिलों की घटनायें देश मे शांतिपूर्ण चल रहें किसानों के धरने से ध्यान भटका कर भाजपा व उसके सहयोगी साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की साजिशे रच रहे हैं। हाल ही में जो घटनायें घटीं हैं वह सांप्रदायिक हिंसा नहीं है बल्कि सरकार के संरक्षण में संघ परिवार की ओर से अल्पसंख्यक समुदाय पर किये जा रहें एक तरफा हमला है। दुर्भाग्य की बात है प्रशासन न केवल हाथ धरे बैठा है


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