कमिश्नर नरेश पाल के स्थगन आदेश पर बलपुरवा स्थिति श्री जी प्लाजा में भवन निर्माण और बिक्री कार्य पर लगी रोक,

शहडोल| ग्राम बलपुरवा स्थित सर्वे नं0 33 का स्पूर्ण रकवा 3.81 एकड़ नाकाबिल कास्त जंगल मद में दर्ज रही भूमि, ग्राम बलपुरवा में अधिकार अभिलेख की कार्यवाही वर्ष 1972-73 में हुई, जिसका नया ख.नं.79 रकबा 2.29 एकड़ पुराना ख.नं.33 एवं 35 को मिलाकर बनाया गया था, तथा नया ख. नंं. 58 पुराना ख.न. 35/2 रकवा 0.35 एकड से बनाया गया है, जिसमें जंगल मद की भूमि को पट्टेदार भूमिस्वामी गुलाब बाई पति आनंद शंकर मिश्रा के नाम दर्ज करा लिया गया। उल्लेखित भूमि जंगल मद दर्ज का पट्टा देने का अधिकार किसी राजस्व अधिकारी तथा अमले को नहीं था। प्रकरण में श्री जी प्लाजा मकान बनाकर विक्रय किया जा रहा है। इसी भूमि का पट्टा किसके द्वारा दिया गया, यह जॉच का विषय होने से कलेक्टर व्दारा अनुविभागीय अधिकारी सोहागपुर को निर्देश दिया गया था। इसी मध्य दिनांक 16.11.2020 को अपीलार्थी अरूण चपरा निवासी शहडोल तहसील सोहागपुर, जिला शहडोल को जानकारी होने पर पारित आदेश की नकल हेतु आवेदन पत्र दिनांक 16.11.2020 को प्रस्तुत किया गया था तथा दिनांक 16.12.2020 को नकल की प्रति प्राप्त की गई। इस प्रकार यह अपील समय-सीमा के अंतर्गत है। प्रकरण में दर्शाये गये तथ्यों का अवलोकन किया गया। न्यायालय कलेक्टर जिला शहडोल के द्वारा पारित आदेश में प्रथम दृष्टया विसंगति स्पष्ट प्रतीत होती है। चूंकि एक ओर प्रश्नाधीन भूमि जंगल मद की होने से पट्टे की जॉच के निर्देश दिये गये हैं। वहीं दूसरी ओर प्रश्नाधीन भूमि पर निर्मित मकानों के विक्रय की अनुमति दी गई है। चूंकि पूर्व में प्रश्नाधीन भूमि शासकीय/जंगल मद में दर्ज रही है। इस कारण इस पर कॉलोनी मकान निर्माण व्यापक एवं गभीर अनियमितता प्रतीत होती है। उल्लेखित स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए एवं अपीलार्थी द्वारा समय-सीमा के संबंध में दर्शाये गये तथ्यों के संतोषप्रद होने एवं मामला जनहित का होने के मद्देनजर निर्देश दिये जाते हैं कि प्रकरण के अंतिम निराकरण तक उत्तरवादीगण द्वारा प्रश्नाधीन भूमि पर किसी मकान अथवा भू-खण्ड का विक्रय न किया जाये और न ही किसी प्रकार का निर्माण कार्य किया जाये। इस आदेश की प्रति कलेक्टर जिला शहडोल पुलिस अधीक्षक शहडोल, जिला पंजीयक शहडोल एवं तहसीलदार सोहागपुर जिला शहडोल तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगरपालिका परिषद शहडोल को इस निर्देश के साथ प्रेषित की जाती है कि वे न्यायालय के स्थगन आदेश का सख्ती से पालन किया जाये।

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