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केवल अहंकार ही है जो मैंने मैंने तूझे नहीं दिया. बल्कि तूने खुद इसे अपने भीतर तैयार किया -ठाकुरजी

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अखिलेश कुमार शर्मा की रिपोर्ट …..


शहडोल|बुढार के अंतर्गत धनपुरी में सरकारी टोला वार्ड नं 21 में श्री नर्मदा सिंह बघेल श्री मती किशोरी सिंह श्री महेंद्र सिंह बघेल जी श्री मती रेखा सिंह के परिवार में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के आज चतुर्थ दिवस की मंगल बेला में श्री धाम वृंदावन से पधारे कथा प्रवक्ता परम पूज्य श्री कान्हा जी महाराज ने गजेंद्र मोक्ष समुद्र मंथन वामन अवतार की कथा श्रवण कराते हुए महाराज श्री ने कहा कि भगवान अपने भक्तों के साथ सदा हर पल खड़े रहते हैं.वे भक्तों के हाथों से दी प्रेम और भाव के साथ दी गई वास्तु उसी तरह ग्रहण करते हैं, जिस तरह से उन्होंने द्रौपदी का पत्र और गजेंद्र का पुष्प ग्रहण किया.भगवान ने काल रुपी मकर से भक्त गजराज की रक्षा की तो द्रौपदी के पुकार पर उसका संकट मिटाने स्वयं दौड़े चले आये.यह सारी कथाएं ये प्रमाणित करती हैं कि भक्तों के भाव से सदा बंधे रहनेवाले भगवान भक्तों के साथ अपना स्नेह निभाने खुद आते हैं ठाकुरजी सिर्फ यह कभी नहीं चाहते कि उसके भक्त के पास अहंकार रहे. ठाकुरजी अपने भक्त से ये भी कहते हैं कि मुझे, वो वस्तु अर्पित कर, जो मैंने तुझे कभी नहीं दी. ठाकुरजी कहते हैं- ऐसी कोई वस्तु जो मैंने तूझे नहीं दी, केवल अहंकार ही है जो मैंने मैंने तूझे नहीं दिया. बल्कि तूने खुद इसे अपने भीतर तैयार किया है.
महाराज श्री ने नंद महोत्सव की दिव्य कथा का वर्णन किया नंद महोत्सव में नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की इस भजन से पूरा पांडाल गूंज उठा एवं सभी भक्तगण भावविभोर होकर के सभी भक्त नृत्य कर उठे ।। कथा संयोजक हेमा अभिषेक सिंह (राज)भैया एवम् पूजा अभिनंदन सिंह बिट्टू भैया ने संपूर्ण क्षेत्रवासी जनता जनार्दन को कथा में आने की अपील की है।।

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