एससी-एसटी अधिनियम में दर्ज एफ.आई.आर उच्च न्यायालय ने की रद्द
अनूपपुर |उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण का निराकरण करते हुए माननीय न्यायमूर्ति विष्णुप्रताप सिंह चौहान ने दादूराम राठौर बनाम मध्यप्रदेश शासन की याचिका को आंशिक स्वीकार करते हुए एससी-एसटी मैं दर्ज प्रकरण को निरस्त करते हुए अन्य अपराधों की जांच जारी रहने पर आदेश किया है| अनूपपुर जिले जैतहरी पुलिस स्टेशन पुलिस में अपराध संख्या 99/2020 के रूप में एफआईआर के पंजीकरण से दुखी दादूराम राठौर व श्याम बाईकोल वगैरा के मध्य में दीवार निर्माण के संबंध में विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी जिस पर आवेदक पक्ष की ओर से किए गए शिकायत के आधार पर आपराधिक प्रकरणों के सहित एससी-एसटी के प्रकरण भी राठौर पर दर्ज किए गए थे|
माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत याचिका में सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर की मामले की परिस्थिति को देखते हुए दादूराम राठौर की याचिका पर अधिवक्ता अजय कुमार द्विवेदी द्वारा पेश किए गए आवेदन की सुनवाई करते हुए माननीय न्यायमूर्ति ने फैसला देते हुए कहायाचिकाकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 294, 323 और 506 की पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। तदनुसार, IPC के अपराध के कुछ तत्व उपलब्ध हैं, लेकिन याचिकाकर्ता के खिलाफ SC / ST (PO) अधिनियम के किसी भी भाग का अपराध नहीं बनता है। ऐसी परिस्थितियों में, याचिकाकर्ता के खिलाफ धारा 3 (1) (आर), 3 (1) (एस) और 3 (2) (वी) के तहत एससी / एसटी (पीओ) अधिनियम के तहत अपराध के लिए मामला दर्ज किया जाना चाहिए। नतीजतन, उस हद तक एफआईआर को रद्द कर दिया जाता है, अन्य अपराध के संबंध में जांच जारी रहेगी। उपर्युक्त के साथ, याचिका को ऊपर उल्लिखित सीमा तक आंशिक रूप से अनुमति दी गई है।

Subscribe to my channel
Comments are closed.