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MP//Rewa – सूचना आयोग सहित सभी अर्ध-न्यायिक आर्डर हों स्पष्ट – सूचना आयुक्त राहुल सिंह // वेबिनार में सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने पार्टिसिपेंट्स के प्रश्नों के दिए जबाब // आयोजित हुआ 43 वां वेबिनार// कोरोना टाइम पीरियड में ऑनलाइन वेबिनार सम्प्रेषण का है सशक्त माध्यम// कर्नाटक से आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेल्लूर ने भी शिक्षा और RTI विषय पर साझा किए अपने विचार।।

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सूचना आयोग सहित सभी अर्ध-न्यायिक आर्डर हों स्पष्ट – सूचना आयुक्त राहुल सिंह // 

⚫वेबिनार में सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने पार्टिसिपेंट्स के प्रश्नों के दिए जबाब // 

🔴 आयोजित हुआ 43 वां वेबिनार, दर्जनों विषयों पर एक्सपर्ट्स ने डाला प्रकाश// 

⚫कोरोना टाइम पीरियड में ऑनलाइन वेबिनार सम्प्रेषण का है सशक्त माध्यम// 

🔴 कर्नाटक से आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेल्लूर ने भी शिक्षा और RTI विषय पर साझा किए अपने विचार।।

दिनांक 20 अप्रैल 2021,  रीवा मप्र।।

   सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 आम जन का सबसे शक्तिशाली हथियार है. यदि कहा जाय की आरटीआई एक ब्रह्मास्त्र है तो यह बात बिलकुल सटीक होगी. लेकिन इस शक्ति का सही तरीके से प्रयोग कैसे किया जाय और कैसे आरटीआई कानून के प्रति जन जागरुकता फैलायी जाय यह सबसे बड़ा प्रश्न है. आज यद्यपि विभिन्न माध्यमो से कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है उसी में वर्तमान कोरोना के पीरियड में वेबिनार भी सम्मिलित है.

43 वें वेबिनार में कई बिदुओं पर राहुल सिंह ने पार्टिसिपेंट्स को दिए जबाब

    आरटीआई एक्टिविस्ट और सामाजिक संगठनो द्वारा आयोजित 43 वें वेबिनार में विशिष्ट अतिथि के तौर पर देश के विभिन्न कोनो से एक्सपर्ट जुड़े जिसमे अपने अपने विचार और समस्याएं साझा की गयीं. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राहुल सिंह ने जिज्ञासुओं के जबाब भी दिए.

   राजस्थान से ताराचंद जंगीर ने पूंछा की राजस्थान सूचना आयुक्त पीआईओ का पक्ष लेते हैं और सुनवाई के पहले लोक सूचना अधिकारी को अपनी केबिन में बुलाकर उनसे सहमति बनाते हैं और फिर बाद में सुनवाई करते हैं. इस पर राहुल सिंह ने कहा की इसके लिए मात्र हाईकोर्ट ही सहारा है क्योंकि निर्णय के बाद हाईकोर्ट जाया जा सकता है. साथ में श्री सिंह ने कहा की बार-बार आयोग सुनवाई नहीं कर सकता क्योंकि इलाहबाद हाईकोर्ट का एक निर्णय है जिसमे कोर्ट ने यह भी कमेंट किया था की सूचना आयोग कोई कोर्ट नहीं है की बार-बार पेशी लगाए. ताराचंद को यह भी सुझाव दिया गया की वह अपने राजस्थान सूचना आयोग में आरटीआई लगाकर अपने केस से सम्बंधित नस्ती की भी माग करें. राहुल सिंह ने कहा की यदि लोक सूचना अधिकारी बार-बार नोटिस के बाद भी नहीं आता तो उसके विरुद्ध जमानती वारंट भी जारी किया जा सकता है. राजस्थान से ही सुरेन्द्र जैन ने बताया की उनके सूचना आयोग की स्थिति और कार्यप्रणाली ठीक नहीं है. राहुल सिंह ने कहा की मप्र में सूचना आयोग में पीआईओ के द्वारा आवेदक को भी एक कॉपी पहुंचाना पड़ता है. सुरेन्द्र जैन ने कहा की प्रोसीजर में भी लिखा है की आवेदक को पीआईओ के जबाब की एक कॉपी देना पडेगा लेकिन यह नहीं दिया जा रहा है तो इसका समाधान मात्र कोर्ट ही है.

   आरटीआई एक्टिविस्टों को संगठनात्मक तौर पर कार्य करना जरुरी

  जैमेश ने बताया की भारत के कई सूचना आयोग द्वारा अच्छा कार्य नहीं किया जा रहा है. यह चिंता का विषय है. जैमेश ने बताया की कोई चेन्नई तो, कोई बैंगलोर, तो कोई दिल्ली में परेशान है लेकिन सभी अकेले अकेले लड़ रहे हैं. इसके लिए संगठित रहने की जरुरत है. जब तक आरटीआई क्षेत्र में क्रांति नहीं आएगी तब तक कुछ नहीं होगा. इसी बीच पुरषोत्तम ने चेन्नई से बताया की सरकार पर निर्भरता कम करना पडेगा और सहकारी संस्थाओं को बढ़ावा देना पडेगा. लेकिन इस सबके लिए पब्लिक अवेरेनेस बढ़ना पडेगा. यदि अस्पताल भी कोआपरेटिव होंगे तो वहाँ व्यवस्था बेहतर होंगी. सब कुछ सरकार पर छोड़ देना ठीक नहीं रहेगा. सुरेन्द्र जैन ने स्कूल और कॉलेज के काशन मनी के विषय में कहा की यह भी स्टूडेंट को वापस नहीं की जाती है. यह महत्वपूर्ण विषय है जिस पर चर्चा होनी चाहिए. सुरेन्द्र जैन ने सूचना आयुक्त से जानना चाहा की जो जबाब हम सूचना आयुक्त को देते हैं क्या वही जबाब हमे लोक सूचना अधिकारी को देना चाहिए अथवा नहीं. इस पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा की यह पारदर्शिता के सिद्धांत के अंतर्गत ही आता है की जब जानकारी हम पीआईओ से एक्स्पेक्ट करते हैं वही हमे भी करने की आवश्यकता है. सुरेन्द्र जैन ने कहा की यदि हम पीआईओ को पहले से बता देंगे तो उसी ग्राउंड पर पीआईओ अपना जबाब भी बना लेगा. तब हम पीआईओ को फाइन नहीं लगवा पाएंगे. आवेदक द्वारा यह भी कहा गया की क्या आवेदक को सुनवाई में पहुंचना आवश्यक है? क्या मात्र लिखित पत्र के आधार पर केस निर्धारित नहीं किया जा सकता? इस पर राहुल सिंह ने कहा की यदि आवेदक मौके पर सुनवाई में पहुंचता है तो वह भी अपनी बात स्पष्ट तौर पर रख पायेगा. अगर आवेदक सुनवाई में नहीं पहुंचता तो लोक सूचना अधिकारी कुछ घुमा फिराकर भी जबाब दे सकता है. इसलिए यह आवश्यक है की सुनवाई में अपना पक्ष रखा जाय.

     कोर्ट का भी निर्देश की सभी आयोग दें अपने स्पष्ट और स्पीकिंग आर्डर – राहुल सिंह

   मप्र से महेंद्र गुप्ता ने बताया की आयोग जिन बिन्दुओं के आधार पर कोई मामला निर्धारित करता है और अपना आदेश देता है तो क्या आयोग उन आधारों को भी अपने आर्डर में लिखता है? इस बात का जबाब देते हुए राहुल सिंह ने कहा की सूचना आयोग के आदेश स्पीकिंग आर्डर होने चाहिए जिसका मतलब है की आदेश में जो भी लिखा है वह स्पष्ट हो की किन आधारों पर आदेश दिया गया है. वह सभी धाराओं और बिन्दुओं के साथ आवश्यक हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी स्पष्ट उल्लेख सूचना आयोग के आदेशों में होना अनिवार्य है. महेंद्र गुप्ता ने बताया की उनके कुछ् मामलों में ऐसे आदेश आये हैं जिनमे कुछ लिखा ही नहीं है और सम्बंधित सूचना आयुक्त ने दो लाइन में आर्डर करते हुए कह दिया है की आपको जानकारी नहीं दी जा सकती. इस पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा की उन्हें हाई कोर्ट में चैलेंज करना चाहिए.

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