MP//Rewa// वर्चुअल सुनवाई समय की महिती आवश्यकता – पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी// 44 वें राष्ट्रीय वेबीनार का किया गया आयोजन// देश के विभिन्न कोनों से वरिष्ठ आरटीआई एक्टिविस्ट एवं सामाजिक क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति हुए सम्मिलित// कर्नाटक सूचना आयोग में इंटरनेट की समस्या और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट एक इशू- वीरेश बेल्लूर

आरटीआई कानून को जन जन तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक रविवार सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया जाता है जिसमें देश के विभिन्न कोनों से आरटीआई एक्टिविस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित होकर अपनी सहभागिता निभाते हैं। इस बीच वर्तमान समय के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा आयोजित की जाती है जिसमें न केवल उपस्थित पार्टिसिपेंट्स बल्कि फेसबुक और सोशल मीडिया में जुड़े होगी लोग भी लाइव टेलीकास्ट से लाभान्वित होते हैं। इस बीच दिनांक 25 अप्रैल 2021 को वर्चुअल कोर्ट और फर्स्ट अपील हियरिंग विषय पर जो मीटिंग का आयोजन किया गया उसमे प्रमुख रूप से विशिष्ट अतिथि के तौर पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी एवं कर्नाटक से आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेलूर शामिल हुए। कार्यक्रम का संयोजन, प्रबंधन एवं समन्वयन का कार्य अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता नित्यानंद मिश्रा, शिवानन्द द्विवेदी, शिवेंद्र मिश्रा, अंबुज पांडे, पत्रिका से वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह एवं छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल ने किया।
44 वें राष्ट्रीय वेबीनार में प्रमुख रूप से सहभागिता निभाने वाले विशिष्ट अतिथियों में पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी कर्नाटक से वरिष्ठ आरटीआई एक्टिविस्ट और आरटीआई स्टडी सेंटर के ट्रस्टी वीरेश बेल्लूर एवं अन्य कई आरटीआई एक्टिविस्ट सम्मिलित हुए।
वर्चुअल सुनवाई समय की महिती आवश्यकता – पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर पधारे पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने बताया की आज से कई वर्ष पहले केंद्रीय सूचना आयुक्त रहते हुए उन्होंने स्वयं किस प्रकार अपने कार्यालय में 100 प्रतिशत पेपरलेस वर्किंग सिस्टम को ईजाद किया था। उन्होंने बताया कि आज कोरोना लॉक डाउन और महामारी के दौर में जब फिजिकल कॉन्टैक्ट और व्यक्ति की कार्यालयों में उपस्थिति पर रोक लगा दी गई है ऐसे में यह अति आवश्यक है कि ज्यादातर सुनवाईयां वर्चुअल माध्यम से की जाए जिसमें या कि स्वयं सरकार ऐसी व्यवस्था बनाए जिसके माध्यम से यह सुनवाइयां की जाएं अथवा पहले से उपस्थित सिस्टम जैसे ज़ूम, फेसबुक लाइव, यूट्यूब लाइव आदि माध्यमों से वर्चुअल हियरिंग प्रारंभ की जाए।
उन्होंने बताया कि पर्यावरण की सुरक्षा की दृष्टि से भी यदि देखा जाए तो प्रतिवर्ष 3 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई मात्र कागजों की फोटोकॉपी के लिए खर्च की जाती है। जबकि यही सिस्टम ई-फाइलिंग के माध्यम से जोड़ दिया जाए तो अनावश्यक फोटोकॉपी की जरूरत नहीं पड़ेगी। गांव में बैठा हुआ कोई व्यक्ति हाईकोर्ट अथवा सुप्रीमकोर्ट में चल रही सुनवाई को स्वयं भी देखना चाहता है तो वह गांव में बैठे-बैठे अपने केस के विषय में ऑनलाइन लाइव देख सकता है। पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त ने बताया कि कोई भी सरकारी कर्मचारी जब हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट की सुनवाई के लिए जाता है तो उसके लिए टीए डीए का खर्च बढ़ जाता है और साथ में दिन भर का नुकसान भी अलग से होता है जिसके बाद भी कई बार सुनवाई हो यह आवश्यक नहीं और डेट भी आगे बढ़ जाती है। यदि व्यवस्था वर्चुअल हियरिंग के माध्यम से सुनिश्चित कर दी जाएगी तो सरकारी कर्मचारियों का अनावश्यक आना जाना रुक जाएगा और समय भी जाया नहीं होगा। जो कार्य मात्र 10 मिनट की सुनवाई के लिए अपने ही कार्यालय में बैठे हुए किया जा सकता है उसके लिए दिन दिन भर का समय जाया नहीं किया जाएगा। यद्यपि कई ऐसे मामले होते हैं जहां पर वर्चुअल माध्यम के साथ में भैतिक तौर पर उपस्थित भी अनिवार्य हो सकती है जिसके लिए कोर्ट और अर्ध न्यायिक व्यवस्था में ऑप्शन भी होना चाहिए जिस पर संबंधित पीड़ित पक्ष वर्चुअल के स्थान पर हाइब्रिड अर्थात भौतिक सुनवाई के तौर पर उपस्थित होने के विषय में मांग कर सकता है।
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