भारत में सबसे तेजी से उभरता हुआ वेब न्यूज़ चैनल

MP//Rewa// राजनेता ब्यूरोक्रेट्स और ट्रेडर्स माफिया का एक वर्ग चला रहा मेडिकल सिस्टम – आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेल्लूर // 45 वें राष्ट्रीय वेबीनार में कर्नाटक के वरिष्ठ आरटीआइ एक्टिविस्ट ने बताया कैसे मेडिकल क्षेत्र में पारदर्शिता की कमी से बढ़ा है भ्रष्टाचार//

269
Above News

कोविड-19 महामारी के दौर में मेडिकल इमरजेंसी घोषित हो गई है। कोविड-19 मरीज तो परेशान है ही और उनका इलाज करने में भी दिक्कत हो रही है क्योंकि इस बीमारी का इलाज अब तक नही खोजा गया है दूसरी तरफ आम बीमारी जैसे हार्ट किडनी लीवर डायबिटीज सामान्य फ्लू एक्सीडेंटल केस आदि समस्याओं का भी इलाज इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि हर जगह कोविड-19 पर ध्यान केंद्रित कर दिया गया है। छोटे बड़े सभी अस्पतालों में अलग से व्यवस्थाएं की गई हैं और एक तरह से देखा जाए तो मेडिकल इमरजेंसी घोषित कर गई है। मेडिकल इमरजेंसी के इस दौर में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हुए व्यक्तियों का चारित्रिक चेहरा भी उजागर हुआ है। इस दौरान दवाइयों की कालाबाजारी, मेडिकल इक्विपमेंट की कालाबाजारी, आवश्यक जीवन रक्षक इंजेक्शन की कालाबाजारी और साथ में अस्पताल बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर सभी के रेट हाई चल रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे हर कोई इसी मेडिकल इमरजेंसी और मानवीय त्रासदी के दौर में करोड़पति बनना चाहता है। कई अस्पतालों में रेड मारने के बाद तो सैकड़ों ऑक्सीजन सिलेंडर और जीवन रक्षक दवाइयां ब्लैक मार्केट की तरह स्टोर पाई गई हैं। यदि किसी दवा की आवश्यकता है अथवा हॉस्पिटल में बेड अथवा ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत है या फिर कहीं की आईसीयू बेड की जरूरत है तो पारदर्शिता का इतना बड़ा अभाव है यह पता नहीं चल पाता है कि किस हॉस्पिटल में क्या व्यवस्थाएं हैं जबकि आज आरटीआई कानून के 15 वर्ष के उपरांत यदि देखा जाए तो यह सब जानकारी पब्लिक पोर्टल पर साझा की जानी चाहिए थी और सिर्फ एक क्लिक पर देश में बैठा हुआ कोई भी व्यक्ति यह जानकारी प्राप्त कर लेता। 

    इन्हीं सब विषय वस्तु को लेकर दिनांक 2 मई 2021 को कोरोना सिस्टम और पारदर्शिता विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया जिसमें महामारी से उपजी त्रासद परिस्थितियों पर चर्चा हुई और विशेषज्ञों ने पारदर्शिता और आरटीआई के तारतम्य में अपने विचार रखे और इसका विश्लेषण किया। कार्यक्रम का संयोजन प्रबंधन एक्टिविस्ट शिवनांद द्विवेदी अन्य साथियों ने किया जबकि अध्यक्षता सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने किया।

  मेडिकल में राजनेता ब्यूरोक्रेट्स और व्यापारी का एक माफिया चला रहा सिस्टम – आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेल्लूर

   कर्नाटक से आरटीआई एक्टिविस्ट एवं आरटीआई स्टडी सेंटर के ट्रस्टी वीरेश बेल्लूर ने बताया कि कर्नाटक में अब तक पब्लिक हेल्थ सिस्टम एवं हेल्थ एवं फैमिली वेलफेयर विभाग से संबंधित अस्पतालों और संस्थानों में आरटीआई कानून की धारा 4 के तहत कोई  जानकारी साझा नहीं की गई है। कर्नाटक के हेल्थ सिस्टम में पारदर्शिता का बड़ा अभाव है। वीरेश बेल्लूर ने बताया कि कुल 11 हज़ार 908 करोड़ रुपए का बजट मेडिकल अस्पतालों के लिए जारी किया गया था। इसी प्रकार अन्य 600 करोड़ रुपए का बजट मात्र 20 मेडिकल कॉलेज के मेंटेनेंस के लिए स्वीकृत हुआ था। यह कर्नाटक के कुल बजट का 4 प्रतिशत था। इस प्रकार देखा जाए तो पिछले वर्ष कुल 12 हज़ार 500 करोड़ रुपए का बजट कर्नाटक के हेल्थ केयर सिस्टम के लिए जारी किया गया था जिसमे  400 करोड़ रुपए मात्र दवा खरीदी और अन्य उपकरण व्यवस्था के लिए आवंटित किया गया था।  एक संस्था जिसे कर्नाटक ड्रग लॉजिस्टिक सोसाइटी के नाम से जाना जाता है उसे विशेष तौर पर सरकारी अस्पतालों में दवा और उपकरण खरीदी के लिए रखा गया था। पिछले वर्ष ऐसे ही एक आरटीआई लगाई गई तो उसमें 2 हज़ार करोड़ की दवा खरीदी का घोटाला पकड़ा गया। यह अब तक का कर्नाटक का सबसे बड़ा दवा खरीदी का घोटाला था। जिसे इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया दोनों में वरीयता के साथ रिपोर्टिंग की गई थी। यह मामला लोकायुक्त में भी भेजा गया और साथ में आपराधिक मामले भी दर्ज हुए लेकिन हुआ कुछ नहीं क्योंकि इस दवा खरीदी में माफिया किस्म के राजनेता ब्यूरोक्रेट्स और ट्रेडर्स सम्मिलित थे।

  हाउसकीपिंग और सैनिटेशन में भी हुआ भ्रष्टाचार

  वीरेश बेल्लूर ने बताया कि उन्होंने हाउसकीपिंग के विषय में एक आरटीआई लगाई और जानना चाहा कि हॉस्पिटल में साफ-सफाई और सेनिटेशन के कार्य में क्या चल रहा है। पता चला कि यह कार्य भी आउटसोर्सिंग और कॉन्ट्रैक्ट पर चल रहा है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी से पता चला की मेंडिया अस्पताल के एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी द्वारा चार अस्पतालों में मेंटेनेंस और हाउसकीपिंग का कार्य करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। कुल मिलाकर देखा जाए तो पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में संलिप्त था और कहीं दूर दूर तक डिजिटलाइजेशन और पारदर्शिता नहीं है। कोई डॉक्टर अस्पताल में आरटीआई तक लेने को तैयार नहीं और जानकारी नहीं देता है। कोई भी जानकारी अस्पताल से बाहर नहीं निकल पा रही है। निशा राम नाम के एक रिटायर सेशन जज को हेल्थ केयर विभागों से संबंधित सभी अस्पताल में लोक सूचना अधिकारियों के समन्वय के लिए रखा गया है। इसमें आवेदक जो जानकारी प्राप्त कर रहे हैं उसकी मॉनिटरिंग की जाती है। हेल्थ केयर सेक्टर में देखा गया कि बहुत कम आरटीआई एक्टिविस्ट काम कर रहे हैं और लोगों को रुचि नहीं है। सरकार इसमें क्यों रुचि नहीं ले रही है इसका एक सबसे बड़ा कारण यह भी है कि सरकारी अस्पतालों में जो लोग इलाज करवाने के लिए आते हैं बेहद गरीब किस्म के लोग होते हैं। इसके पहले सरकारी कर्मचारी सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाते थे तभी उनको रीइंबर्समेंट मिलता था लेकिन व्यवस्था बदल दी गई है और बिना सरकारी अस्पताल के ही रीइंबर्समेंट मिल जाता है इसलिए सरकारी अस्पताल की स्थिति बदतर होती जा रही है क्योंकि कोई भी सक्षम और सरकारी व्यक्ति अस्पतालों में नहीं जाता और मात्र गरीब ही जाते हैं। इस बीच वीरेश वेल्लूर ने बताया की एक और ध्यानाकर्षण करना चाहते हैं जिसमें पिछले 30 अप्रैल 2021 को एक आरटीआई एक्टिविस्ट के द्वारा एक और व्यापक स्तर का भ्रष्टाचार उजागर किया गया है।

  32 सौ वेंटिलेटर में मात्र उपयोग किये 14 सौ वेंटिलेटर बांकी डाल दिये कबाड़ में

  केंद्रीय सरकार ने कर्नाटक सरकार को 3 हज़ार 200 आईसीयू वेंटीलेटर के लिए राशि जारी की। इसमें से 1400 लेटर सरकारी अस्पताल में इंस्टॉल किए गए जबकि शेष 18 सौ वेंटिलेटर को गोडाउन में कूड़ेदान में फेंक दिया गया। अभी जब वेंटीलेटर्स की जरूरत पड़ी तब हमने आरटीआई लगाई तो जो जानकारी सामने आई उसमें व्यापक स्तर पर समस्या दिखी जिसके बाद सरकार की खिंचाई हुई और मीडिया में भी मामला प्रकाश में आया तो सरकार ने उन शेष 1800 वेंटिलेटर को प्राइवेट अस्पतालों में फ्री ऑफ कॉस्ट वितरित कर दिया। इस प्रकार देखा जा सकता है कि हेल्थ केयर सिस्टम में कर्नाटका में किस प्रकार कार्य हो रहा है। यहां कर्नाटक की ही यह स्थिति नहीं है बल्कि पूरे देश की स्थिति बनी हुई है जिसमें आरटीआई कानून को सही तरीके से लागू नहीं किए जाने के कारण व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार बढ़ा है और आज 15 वर्ष के बाद आरटीआई कानून लागू होने से भी स्थितियों में कोई सुधार नहीं हुआ है। जानकारियां नहीं दी जा रही है, पारदर्शिता नहीं आई है, वेब पोर्टल पर जानकारी साझा नहीं की जा रही है और साथ में डिस्टलाइजेशन भी नहीं हुआ है।

     कर्नाटक में अभी भी बहुत कार्य मैनुअली किया जा रहा है जैसे बिस्तरों की स्थितियां, दवा सप्लाई, मेडिकल सामग्री की सप्लाई सभी कुछ मैनुअली किया जा रहा है और कहीं कोई पारदर्शिता नहीं है।

खबरों के अपडेट पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें| आप हमारा एंड्राइड ऐप भी डाउनलोड कर सकते है|

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy
E-Paper