MP//Rewa// जिले के खरीदी केंद्रों में भीगा करोड़ों का गेहूं// प्रशासन और समिति प्रबंधकों की मिलीभगत से बर्बाद हुई अन्नदाता के मेहनत की कमाई// व्यवस्था के लिए दी जाने वाली लाखों की प्रासंगिक व्यय की राशि का हो रहा बंदरबांट// सड़ा और भीगा गेहूं बताकर समिति प्रबंधक समितियों को फिर लगाएंगे चूना// घाटे में जाएगी समितियां, बर्बाद होगा जनता के टैक्स का पैसा, समितियों के घाटे को जनता के टैक्स के पैसे से फिर भरेगी सरकार, फिर चलेगा लंबा खेल//

रीवा जिले के गेहूं खरीदी केंद्रों में खरीदी का समय 5 मई से बढ़ाकर 25 मई कर दिया गया है। इसके बावजूद भी किसानों को देर से संदेश प्राप्त हो रहे हैं जिसकी वजह से उनकी गेहूं खरीदी प्रभावित हो रही है। अभी हाल ही में पिछले दो-तीन दिनों से काफी बारिश होने की वजह से रीवा जिले के खरीदी केंद्रों में खुले में पड़े हुए गेहूं को काफी नुकसान हुआ है। यदि त्योंथर ब्लॉक एवं गंगेव ब्लाक की बात की जाए तो खेतों में खुले आसमान के नीचे खरीदी चल रही है ऐसे में समिति प्रबंधकों के द्वारा गेहूं की सुरक्षा के लिए समुचित व्यवस्था न करने के कारण खरीदी पर असर पड़ा है।
*एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी ने कुछ खरीदी केंद्रों का लिया जायजा, दिखी अनियमितता*
दिनांक 18 मई 2021 को सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने गंगेव जनपद की हिनौती, बांस, देवास, लौरी-गढ़ एवं साथ में त्योंथर जनपद की कटरा खरीदी केंद्र का निरीक्षण किया जिसमें बारिश के बाद कई टन गेहूं भीगा हुआ मिला। मौके पर उपस्थित समिति प्रबंधक, खरीदी केंद्र प्रबंधक और किसानों से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि बारिश की वजह से यह स्थिति निर्मित हुई है। जब यह पूछा गया कि प्रासंगिक व्यय के नाम पर लाखों रुपए सरकार के द्वारा हर वर्ष समिति प्रबंधकों को दिए जाते हैं जिसमें लेबर कॉस्ट, किसानों के लिए पेयजल, खाने पीने की व्यवस्था उठने बैठने की व्यवस्था और साथ में तिरपाल आदि की व्यवस्था सम्मिलित रहती है तो आखिर उस राशि का क्या हुआ? इस बात का जवाब किसी भी खरीदी केंद्र प्रबंधक के पास नहीं था क्योंकि ज्यादातर इन राशियों का बंदरबांट कर लिया जाता है और उक्त कार्यों के लिए इन राशि का प्रयोग नहीं किया जाता एवं फर्जी बिल बाउचर लगाकर व्यवस्था का होना बता दिया जाता है। वहीं उपस्थित किसानों से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि उन्हें देर से संदेश प्राप्त हो रहे जिसकी वजह से गेहूं बेचने में समस्या पैदा हुई है कई किसानों ने बताया कि वह कई दिनों से खरीदी केंद्रों में डेरा डाले हुए हैं लेकिन गेहूं की खरीदी नहीं की गई। कई किसानों ने बताया उनसे प्रति बोरी के हिसाब से 50 किलो 600 ग्राम से ज्यादा खरीदी की जा रही है। वहीं किसानों ने पैसे के लेनदेन की भी शिकायत की। ज्यादातर खरीदी केंद्रों में दलाल सक्रिय रहते हैं जो पैसे ले देकर खराब किस्म के गेहूं की भी गेहूं की भराई करवा देते हैं। इस प्रकार की समस्याएं ज्यादातर त्योंथर, सिरमौर, हनुमना एवं जवा जनपद के खरीदी केंद्रों में देखने को मिलते हैं। परिवहन की समस्या को लेकर कुछ किसानों बताया की परिवहनकर्ता सही समय पर परिवहन नहीं करता जिसकी वजह से गेहूं का उठाव नही हो पाया जिसकी वजह से बारिश में यह खराब हो गया। *क्या कहना है रीवा फ़ूड कंट्रोलर एमएन एच खान का*
जब इस विषय में एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के द्वारा जिला रीवा के नागरिक एवं खाद्य आपूर्ति नियंत्रक एमएनएच खान से बात की गई और उन्हें वस्तु स्थिति के बारे में अवगत कराया गया तो उन्होंने प्रभावित समस्त खरीदी केंद्र के जांच के लिए कहा। खान ने बताया कि उन्होंने संबंधित जेएसओ फ़ूड इंस्पेक्टर को निर्देशित किया है कि बारिश के उपरांत समस्त खरीदी केंद्रों का दौरा कर बारिश से भीगे हुए गेहूं की स्थिति और परिवहन की स्थिति से अवगत कराएं और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। हालांकि शिवानंद द्विवेदी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फूड कंट्रोलर एमएनएच खान को तत्काल कार्यवाही कर दोषियों के ऊपर दंडात्मक कार्यवाही की अपील की है। एक्टिविस्ट द्विवेदी ने अपने फेसबुक पेज में जिला कलेक्टर रीवा डॉक्टर इलैयाराजा टी एवं साथ में चीफ मिनिस्टर ऑफ मध्य प्रदेश श्री शिवराज सिंह चौहान को टैग करते हुए मामले पर संज्ञान लेकर तत्काल कार्यवाही करने की माग की है।
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