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MP//Rewa// आरटीआई सड़क निर्माण से जुड़ी शिकायतों और जानकारी विषय पर आयोजित हुआ 53 वां राष्ट्रीय वेबीनार//

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   कार्यक्रम का संयोजन और मैनेजमेंट का कार्य एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी, अधिवक्त नित्यानंद मिश्रा, और छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल ने किया। 

  *जागरूक नागरिक सड़क निर्माण से संबंधित जानकारी पर रखें निगरानी और गड़बड़ी पर करें शिकायत*

   इस बीच कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर पधारे लोक निर्माण विभाग मध्यप्रदेश शासन से सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता के एम जैन ने बताया की सड़क देश की विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। सड़क निर्माण में हर वर्ष अरबों खरबों रुपए पूरे देश में खर्च किए जाते हैं। सड़क निर्माण से संबंधित गुणवत्ता की निगरानी करना और उसकी जानकारियां निकालकर सही फोरम में शिकायत करना जागरूक नागरिक का कर्तव्य है। कभी-कभी वरिष्ठ अधिकारियों की नजर में कई काम नहीं आ पाते हैं जिसमें जागरूक नागरिक महत्वपूर्ण रोल अदा कर ध्यानाकर्षण करवाते हैं। के एम जैन ने बताया की सड़क निर्माण में कई प्रकार के मापदंड बनाए जाते हैं और पंचायत, मुख्यमंत्री सड़क, प्रधानमंत्री सड़क,  सड़क विकास प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण आदि सड़क विभागों के द्वारा अलग-अलग किस्म और गुणवत्ता की सड़कें बनाई जाती है जिनकी डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड भी अलग-अलग होती है। ऐसी सड़कों के विषय में गारंटी पीरियड 1 से लेकर 10 से 15 वर्ष तक होती है। जहां सड़कें डामर और बिटुमिन से बनती है वही पीसीसी और आरसीसी सड़कें भी बनाई जाती है। इन सड़कों के बनाने के अपने अलग-अलग मापदंड होते हैं जो सूचना के अधिकार के माध्यम से सड़क का डीपीआर और एस्टीमेट प्राप्त कर हासिल किया जा सकता है। कभी यदि सड़क के विषय में शिकायतें करनी है तो ज्यादा उच्चस्तरीय शिकायत न कर मात्र एक या दो वरिष्ठ अधिकारी ऊपर शिकायत करने पर कई बार मामले का समाधान हो जाता है। सड़क निर्माण संबंधी शिकायतों पर त्वरित कार्यवाही होती है और लगभग 50 प्रतिशत के आसपास निराकरण किया जाता है।

  *जनता को अपने टैक्स के पैसे से हो रहे निर्माण कार्यों को जानने का अधिकार है – सूचना आयुक्त राहुल सिंह*

   इस बीच कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बताया कि सड़क निर्माण से संबंधी जानकारी आरटीआई के द्वारा प्राप्त की जानी चाहिए। जानकारी के आधार पर जहां गड़बड़ी मिले वहां शिकायत करनी चाहिए। आज भारत के विभिन्न ग्रामों में सड़कों की हालत खराब है जबकि चाहे वह पंचायत हो या प्रधानमंत्री सड़क विभाग अथवा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सभी के द्वारा सड़क निर्माण के लिए एस्टीमेट बनाकर राशियों की निकासी की जाती है लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। इसके लिए देश के जागरूक नागरिक मिलकर काम करें और सूचना के अधिकार का सदुपयोग करते हुए कार्यवाही करवाएं। राहुल सिंह ने बताया कि जब भी सड़क से संबंधित आरटीआई की अपील अथवा शिकायतें उनके पास आती हैं तो वह उस पर त्वरित कार्यवाही करते हुए जुर्माने से परहेज नहीं करते। उन्होंने बताया रीवा संभाग में सड़क विभाग से संबंधित कई आरटीआई उनके पास आती रहती है। 

   *आरटीआई के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सोशल ऑडिट से दूर करें समस्याएं – भास्कर प्रभु*

   पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने बताया की देश कि न्यायिक प्रणाली पूरी तरह से चरमरा चुकी है। चाहे वह अर्ध न्यायिक व्यवस्था जैसे सूचना आयोग हो अथवा देश की न्यायिक व्यवस्थाएं हर स्थान पर पेंडेंसी बढ़ती जा रही है और लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। सड़क निर्माण के विषय में अपना अनुभव साझा करते हुए शैलेश गांधी ने बताया कि उनके कार्यकाल में भी कुछ मामले सड़क से संबंधित आते थे जिस पर उन्होंने निर्णय दिए हैं। सड़कों की गारंटी एवं डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड को लेकर प्रश्न खड़ा करते हुए शैलेश गांधी ने बताया कि किसी भी सड़क की गारंटी 1 या 2 साल रखना गलत बात है क्योंकि इतने कम समय के लिए सड़के बनाया जाना जनता के टैक्स के पैसे के साथ नाइंसाफी है। 

        इस बीच भास्कर प्रभु ने भी महाराष्ट्र और मुंबई में उनके द्वारा किए जा रहे सड़क निर्माण और कंस्ट्रक्शन संबंधी कार्यों की जानकारी देते हुए स्लाइड शो के माध्यम से अपनी जानकारी साझा की और बताया कि कैसे सूचना के अधिकार के माध्यम से डीपीआर और एस्टीमेट की जानकारी प्राप्त करने के बाद सोशल ऑडिट से मामले को बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है और कार्यवाही करवाई जा सकती है। इस बीच कर्नाटक से पधारे आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेलूर ने कर्नाटक में कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट और सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े हुए मामलों पर प्रकाश डालते हुए अपने अनुभव साझा किए और बताया कि हर जगह स्थित दयनीय है और सिविल कंस्ट्रक्शन के कार्यों में काफी अनियमितता पाई जाती है लेकिन लोगों की जागरूकता की कमी की वजह से जानकारी बाहर नहीं आ पाती और कार्यवाही अभी नहीं हो पाती। इस सब के लिए जनता को ज्यादा से ज्यादा जानकारी एकत्रित कर सही फोरम पर शिकायत कर कार्यवाही करवानी चाहिए।

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