MP Breaking – केके स्पन ने बर्बाद किया रीवा, खन-खोदकर छोड़ा अधूरा, रीवावासियों का जीना मुस्किल, 3 वर्ष के प्रोजेक्ट में लगे 5 वर्ष से अधिक, अभी भी मात्र 11 प्रतिशत ही काम हुआ पूरा// मामला रीवा शहर में सीवर लाइन प्रोजेक्ट का जिसमे 214 करोड़ में होना था काम
रीवा मप्र – आज रीवा को बर्बाद करने वाले प्रोजेक्ट सीवर लाइन प्रोजेक्ट का हाल-चाल जानने की इच्छा सभी को है. कहने को तो यह सीवर लाइन प्रोजेक्ट अमृत योजना के तहत रीवा शहर का उद्धार करने के लिए लाया गया था लेकिन हालत अब उलटे नजर आ रहे हैं. यह कोई आरोप नहीं है बल्कि एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा सूचना के अधिकार कानून के माध्यम से प्राप्त दस्तावेज हैं जो चौंकाने वाले खुलासे कर रहे हैं. रीवा में आखिर वर्ष 2016 से जो सीवर लाइन का प्रोजेक्ट कार्य प्रारंभ किया गया क्यों अब तक पूर्ण नहीं हो पाया? सवाल यह भी है की इस पूरे मामले में केके स्पन कम्पनी का कौन वरदहस्त है? कौन नेता, मंत्री अथवा विधायक, सांसद इस कम्पनी को बचाने में लगा है और पूरे रीवा जिले को बर्बाद करने में तुला हुआ है.
रीवा की सडकों और पर्यावरण की बर्बादी का नजारा, चश्मदीद गवाह बने लोग
जिस दिन से नवम्बर 2016 में के के स्पन कम्पनी द्वारा रीवा शहर में सीवर लाइन का प्रोजेक्ट कार्य प्रारंभ किया गया उस दिन से रीवा की दुर्दशा प्रारंभ हुई. जहां भी देखें जिस सड़क को देखें तमाम खोदकर रख दिया गया. व्यक्ति का आवागमन बाधित हुआ. सड़क पर मलबा और कचरा बिखर गया था. प्रदूषण के हाल तो पूंछिये ही नहीं. किसी भी प्रकार के सिविल निर्माण सम्बन्धी मापदंडों का कम्पनी ने पालन नहीं किया. यहाँ वहां कचरा, धूल, गंदगी, मशीन का शोर सराबा शहर में रहने वाले और शहर की तरफ रोजमर्रा के कामों के लिए जाने वाले लोगों का जीवन दूभर कर दिया. चूँकि हजारों शिकायतों के बाद भी जिला और निगम प्रशासन मूक बना रहा और कम्पनी के काले कारनामों और नियम विरोधी कार्यों पर पर्दा डालता रहा इसलिए लोग मात्र अब भगवान से ही प्रार्थना कर रहे थे की काश किसी तरह से यह कम्पनी काम बंद कर के चली जाती तो बेहतर होता. बेसहारा बन चुकी जनता के लिए शासन-प्रशासन से उम्मीद करना तो बेमानी ही होती है. क्योंकि चाहे कितनी भी शिकायतें करें कोई सुनवाई नहीं. आये दिन न्यूज़पेपर और लोकल टीवी और यूट्यूब चैनल में न्यूज़ प्रसारित होती रहीं और रीवा की सडकों की बर्बादी और बेतरतीब खोदाई का आलम बयां करती रहीं.
शिवानन्द द्विवेदी की आरटीआई और एक बड़ा खुलासा
अब आज जब कि 5 वर्ष पूरे हो चुके हैं देखा जाय तो जो दस्तावेज सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को आरटीआई से प्राप्त हुए हैं उससे साफ़ जाहिर है की नगर निगम रीवा द्वारा के के स्पन कम्पनी को जो अमाउंट पे किया गया है उसके मुकाबले अब तक मात्र अधिकतम 11 प्रतिशत ही कार्य पूरा किया गया है. इससे कोई भी अंदाजा लगा सकता है आखिर इतना घटिया कार्य करने वाली के के स्पन कम्पनी रीवा को बर्बाद करने का ठेका किन नेताओं और मंत्रियों के संरक्षण में ले रखी है? आखिर कौन हैं वह लोग जो अपने आप को तो जनता के सेवक और जन प्रतिनिधि कहते हैं और सीधी-साधी जनता को पहाड़ा पढ़ाकर वोट तो ले लेते हैं लेकिन काम रीवा को बर्बाद करने का करते हैं?
केके स्पन कम्पनी के रीवा सीवर लाइन प्रोजेक्ट से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदु –
· रीवा में सीवर लाइन परियोजना का कार्यादेश – वर्क आर्डर नगर पालिक निगम रीवा के पत्र क्रमांक 45/न.पा.नि./निर्माण/2016 रीवा दिनांक 18-11-2016 को जारी हुआ.
· इस कार्यादेश में सर्वे, डिजाईन, निर्माण और उसको प्रारंभ करके देने सम्बन्धी सीवर और सेप्टेज मैनेजमेंट का काम सम्मिलित था.
· सीवर पाइप लाइन के कार्य में पाइप लाइन डालना, पक्के गड्ढे बनाना और जंक्शन और पाइप जोड़ने आदि सम्बन्धी कार्य सम्मिलित था.
· सीवर ट्रीटमेंट प्लांट और आरसीसी सम्प वेल बनाना और उन सम्प वेल में मोटर पंप डालना इस कार्यादेश का एक हिस्सा था.
· उपभोक्ताओं के घरों में सीवर कचरा निकासी के लिए मुख्य सीवर पाइप लाइन से कनेक्शन उपलब्ध करवाना भी इस कार्यादेश का एक हिस्सा था.
· बड़े सीवर प्लांट को चलाने के लिए हाई टेंशन बिजली लाइन के कनेक्शन भी प्लांट तक उपलब्ध कराये जाने के लिए भी व्यवस्था का प्रावधान कार्यादेश में था.
किस बड़ी योजना के तहत यह रीवा सीवर लाइन प्रोजेक्ट रखा गया था उसका एक परिचय –
· यह सीवर लाइन परियोजना AMRUT-अमृत योजना – अटल मिशन फॉर रिजुबिनेसन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन योजना के अंतर्गत रखा गया है जिसे सीवरेज एंड सेप्टेज मैनेजमेंट के नाम से जाना जाता है.
· अमृत योजना शहरों के लिए केंद्र सरकार की एक बड़ी और महत्वकांक्षी योजना है.
· इस अनुबंध को पूर्ण किये जाने के पूर्व सरकार द्वारा कम्पनी से परफॉरमेंस सिक्यूरिटी अथवा अथवा परफॉरमेंस गारंटी के तौर पर 9 करोड़ 96 लाख और 88 हज़ार रूपये की सिक्यूरिटी राशि जमा कराई गयी है.
रीवा में के के स्पन कम्पनी का कार्यादेश और इसकी शर्तें
· रीवा जिले में के के स्पन कम्पनी के कार्यादेश में सीवर लाइन प्रोजेक्ट को कार्यादेश दिनांक से 36 माह अर्थात 3 वर्ष की अवधि में पूरा किया जाना था.
· इस कार्य की डिफेक्ट लायबिलिटी 5 वर्ष निर्धारित की गयी थी. अर्थात गडबडी होने पर गारंटी 5 वर्ष तक रहेगी. इस दौरान यदि कार्य में खराबी होती है तो कांट्रेक्टर को काम पूरा करना होगा और यदि नहीं पूरा करता है तो नगर निगम जमा सिक्यूरिटी राशि से काम करवाएगी और जुर्माना लगाएगी.
· कार्य को सफलता पूर्वक पूर्ण करने के पश्चात 10 वर्ष तक की अवधि तक अनुवंध में वर्णित प्रावधानों के अनुरूप संचालन और मेंटेनेंस-रखरखाव का काम कम्पनी को करना होगा. जैसे ही कार्य पूर्ण होता है वैसे ही परफॉरमेंस सिक्यूरिटी के तौर पर बैंक गारंटी के तौर पर 1 करोड़ 80 लाख रूपये की राशि जमा करनी होगी. परफॉरमेंस गारंटी न जमा करने पर काटी गयी सुरक्षा निधि एवं अंतिम देयक का भुगतान नहीं किया जाएगा.
· समस्त कार्य हेतु अनुबंध के प्रावधानों के अनुरूप कार्यवाही दोनों पक्षों को मान्य होगी. अनुबंध के तहत कार्य न होने पर समस्त जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी.
· निविदा विज्ञप्ति एवं अनुबंध में प्रावधानित शर्तों के अनुसार उक्त कार्य को सम्पादित करना होगा एवं शर्तों का पालन करना बाध्यकारी होगा.
· कार्य की अनुमानित लागत थी – रु 1993744318.29 (रूपये एक सौ निन्नानवे करोड़ सैंतीस लाख चौवालीस हज़ार तीन सौ अठारह एवं उनतीस पैसे)
· कार्य की निविदा पश्चात अनुमानित लागत 2141067500.00 (रूपये दो सौ चौदह करोड़ दश लाख सतसठ हज़ार पांच सौ मात्र)
· कार्य पूर्णता की समयावधि 36 माह अर्थात 3 वर्ष थी.
· डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि 60 माह अर्थात 5 वर्ष है.
· ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस अर्थात संचालन और रखरखाव अवधि – सफलतापूर्वक कार्य पूर्ण होने के बाद अगले 10 वर्षों तक रहेगी.
निविदा में कौन कौन कम्पनी सम्मिलित हुईं?
· नगरीय प्रशासन और विकास विभाग भोपाल मप्र द्वारा निविदा क्रमांक – यूएडीडी / टेंडर नं.13013 अनुमानित राशि 172 करोड़ 25 लाख 33 हज़ार रूपये का टेंडर दिनांक 13-04-2016 को वित्तीय निविदा के लिए सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर खोला गया.
· इस निविदा में तीन कम्पनियों ने भाग लिया- लक्ष्मी सिविल इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, के के स्पन पाइप प्राइवेट लिमिटेड, लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन जिसमे लक्ष्मी सिविल इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फॉर्म न भरे जाने के चलते निविदा से बाहर हो गयी जबकि अन्य दो कम्पनी निविदा की दौड़ में बनी रहीं.
के के स्पन द्वारा कार्य करवाए जाने के स्थिति और एक्सटेंशन
· के के स्पन कम्पनी द्वारा कार्य निविदा की समयावधि 17-11-2019 में पूर्ण नहीं किया जाना था.
· कम्पनी के कार्यों का पहला एक्सटेंशन 31-03-2020 को मिला लेकिन इस समयावधि में भी कार्य पूर्ण नहीं हुआ.
· फिर कम्पनी ने एक्सटेंशन के लिए अप्लाई किया, यह दिनांक 31-03-2021 तक एक्सटेंड किया गया.
· इस प्रकार कम्पनी को 36 माह, 40 माह और 52 माह का क्रमशः 3 एक्सटेंशन प्राप्त हुआ. लेकिन अब तक कार्य पूर्ण नहीं हुआ है.
· कम्पनी द्वारा अगला और अंतिम एक्सटेंशन वर्तमान में 31-12-2021 तक के लिए अप्लाई किया गया है.
के के स्पन कम्पनी द्वारा अब तक कुल कितने राशि भुगतान के लिए बिल जमा किया गया और उन बिलों की क्या स्थिति है?
· के के स्पन कम्पनी द्वारा पहला एडवांस बिल राशि 19 करोड़ 93 लाख 74 हजार 431 रूपये दिनांक 08-03-2017 को लगाया गया. यह राशि टैक्स के कटौती के बाद नगर निगम रीवा द्वारा कम्पनी को 17 करोड़ 88 लाख 38 हजार 865 रूपये दिनांक 17-03-2017 को जारी की गयी.
· के के स्पन कम्पनी द्वारा कुल 20 बिल अब तक लगाये गए जिनकी राशि रूपये 82 करोड़ 28 लाख 732 रूपये बनती है. जबकि इसके मुकाबले नगर निगम रीवा द्वारा कुल अब तक कम्पनी को राशि रूपये 23 करोड़ 43 लाख 29 हजार 377 रूपये जारी किये गए.
· इस प्रकार इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की के के स्पन कम्पनी द्वारा अब तक 52 माह पूर्ण होने बाद भी मुस्किल से 39 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के दावे किये गए. जबकि नगर निगम रीवा/नगरीय प्रशासन मप्र शासन द्वारा जो राशि का भुगतान कम्पनी को अब तक किया गया उससे पता चलता है की निगम की नज़रों में लगभग 11 प्रतिशत का कार्य ही पूर्ण हो पाया है. ज्ञातव्य हो की कुल निविदा राशि 214 करोड़ के आसपास है. अतः इस राशि के मुकाबले यदि बिल भुगतान की स्थिति देखी जाय तो आश्चर्य में डालने वाले आकंडे सामने आ रहे हैं.
3 एक्सटेंशन पर मात्र 11 प्रतिशत राशि भुगतान पर ठेका निरस्त क्यों नहीं हुआ?
· सबसे बड़ा सवाल यह है 36 माह में के के स्पन कम्पनी कार्य पूर्ण करने में अक्षम रही है. इसके बाद कम्पनी के ठेके में 3 बार एक्सटेंशन किया गया है. इस प्रकार 36 के स्थान पर 52 माह से अधिक समय व्यतीत होने उपरांत स्वयं यदि कम्पनी ही बमुश्किल 39 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के दावे कर रही है तो यह माना जाना चाहिए की अभी इस कार्य को पूर्ण होने में अगले कम से कम 6 अतिरिक्त वर्ष लग सकते हैं.
अब तक के के स्पन कम्पनी को जारी कारण बताओ नोटिस और कार्यवाही
· नगरीय प्रशासन और विकास विभाग भोपाल द्वारा समयावधि में काम पूर्ण न होने पर मात्र औपचारिक पत्राचार के अतिरिक्त कुछ भी नहीं हुआ है.
· अब तक कार्यवाही के तौर पर नगरीय प्रशासन भोपाल द्वारा पहला नोटिस कम्पनी को पत्र क्रमांक/यां.प्र./07/2019/13015 भोपाल दिनांक 28-11-2019 को आयुक्त नगर निगम रीवा के नाम भेजा गया था. जिसमे कम्पनी को भी पृष्ठांकित करते हुए 31-03-2020 तक समयावधि में वृद्धि की गयी और कार्यवाही को नगर निगम आयुक्त रीवा को अपने स्तर से करने के लिए उल्लेख किया गया. सवाल यह था की जब संविदा शर्तों का पालन नहीं हुआ तो अर्थदंड और अन्य कार्यवाही क्यों नहीं हुई?
· प्रथम एक्सटेंशन अवधि 31-03-2020 में कार्य पूर्ण न होने पर पुनः नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल द्वारा औपचारिक कार्यवाही के तौर अगला पत्र क्रमांक/यां.प्र./अमृत/07/2020/7704 भोपाल दिनांक 21-08-2020 नगर निगम आयुक्त रीवा के साथ कम्पनी को पृष्ठांकित करते हुए भेजा गया जिसमे आश्चर्यपूर्वक लिक्वीडेटेड डैमेज के अधिकार को सुरक्षित रखते हुए पेनल्टी न लगाते हुए 12-07-2020 तक कार्यावधि बढ़ा दी गयी और कार्यवाही को अपने स्तर से नगर निगम आयुक्त रीवा को करने के लिए उल्लेख किया गया. क्या कार्यवाही हुई इसका कोई रता पता नहीं.
· तीसरे एक्सटेंशन के तौर पर एक बार पुनः नगरीय प्रशासन के मुप्रख्य अभियंता इंजिनियर भोपाल द्वारा के के स्पन कम्पनी को पृष्ठांकित करते हुए नगर निगम आयुक्त रीवा को पत्र क्रमांक क्रमांक/यां.प्र./अमृत/07/2021/5509 भोपाल दिनांक 28-05-2021 को भेजकर एक बार पुनः कोई भी जुर्माने और दंड की कार्यवाही नहीं की गयी और अंदर ही अंदर मामले पर लीपापोती करते हुए एक्सटेंशन अवधि बढ़ा दी गयी. अब यह तीसरी एक्सटेंशन अवधि 31-12-2021 तक बढ़ाई गयी है.
अब सबसे बड़ा सवालिया निशान नगरीय प्रशासन मप्र शासन और नगर निगम रीवा की कार्यप्रणाली पर
· जाहिर है जो स्थिति उपरोक्त विश्लेषण से सामने आई है इससे स्पष्ट है की जब निविदा की शर्तों के अनुरूप 36 माह में के के स्पन कम्पनी द्वारा कार्य पूर्ण नहीं किया गया तब नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल और रीवा नगर निगम ने टेंडर निरस्त करने की कार्यवाही अथवा पेनाल्टी की कार्यवाही क्यों नहीं की?
· यदि एक नजर डालें तो जो भी नोटिस प्रमुख अभियंता नगरीय प्रशासन एवं विकाश विभाग भोपाल मप्र शासन से रीवा नगर निगम को के के स्पन कम्पनी के लिए कार्यवाही के लिए जारी की गयी हैं उसमें मात्र कम्पनी का बचाव ही किया गया है. इस मामले से पूरे तंत्र की कार्य प्रणाली संदेह के दायरे में आ गयी है.
पर्यावरण की दृष्टि से रीवा शहर को नष्ट करेने वाली परियोजना
· के के स्पन कम्पनी ने रीवा शहर में भारी प्रदूषण फैलाया है.
· सीवर लाइन की खुदाई के दौरान अत्यधिक ध्वनि और वायु प्रदूषण हुआ है.
· सड़कों की बेतहाशा खुदाई और सुरक्षा की कमी के चलते लोगों का एक्सीडेंट भी हुआ है.
· न तो पर्यावरण के मापदंडों का पालन हुआ न ही निविदा शर्तों का.
· पर्यावरण की दृष्टि से सैकड़ों शिकायतें सीवर लाइन परियोजना से सम्बंधित कम्पनी के विरुद्ध दर्ज हुई हैं. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने क्या कार्यवाही की है इस पर भी प्रश्न है.
श्रमिकों को लेकर भी कई प्रकार की शिकायतें
· प्रवासी श्रमिकों को काम दिया गया इसकी जानकारी अनुपलब्ध.
· कई बार श्रमिकों ने पेमेंट न दिए जाने की शिकायतें कीं.
· घरेलू और प्रवाशी श्रमिकों का डेटा सार्वजनिक होना अनिवार्य.
· श्रमिकों को किस रेट पर पेमेंट हुआ क्या उनके लेबर राइट्स की सुरक्षा हुई? क्या श्रमिकों के कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन हुआ? क्या श्रमिकों को उनके स्वास्थ्य पर कार्यस्थल पर ध्यान दिया गया? प्रश्न अनुतरित हैं.
इन स्थानों पर बनाये जाने हैं एसटीपी (सीवेरेज ट्रीटमेंट प्लांट)
– विवेकानंद नगर रीवा – क्षमता 6.50 एमएलडी (मिलियंस लीटर पर डे/ मिनिमल लिक्विड डिस्चार्ज)
– विछिया पुल के पास रीवा – 6.50 एमएलडी
– पद्मधर कालोनी के पास रीवा – 06 एमएलडी
– अजगरहा रोड रीवा – 03 एमएलडी
– उद्योग विहार रीवा – 01 एमएलडी
– बनकुइयां रोड रीवा – 01 एमएलडी
– शाईकन होटल के पास रीवा – 01 एमएलडी
फैक्ट फाइल (तथ्यात्मक रिपोर्ट)
– सीवरेज प्रोजेक्ट की कुल लागत – 214.10 करोड़ रूपये.
– सीवर लाइन की कुल लम्बाई – 728 किमी
– प्रोजेक्ट में चिह्नित मकान – 42933
– कुल एसटीपी की संख्या – 08
– एसटीपी की क्षमता – 25 (एमएलडी और झिरिया में बने 12 एमएलडी को मिलाकर 37 एमएलडी)
क्या न्यायालय ही होगा इस समस्या का समाधान?
उक्त मामले से तो स्पष्ट है की जिस प्रकार से मामला फंसा हुआ है इसका तोड़ मात्र न्यायालय से ही मिलेगा. सरकार और सरकारी मुलाजिम तो पूरी तरह से कॉर्पोरेट वर्ल्ड के आगे बिक चुके हैं. जनता और जनता के हित सरकार के लिए लगता है गौंड हो चुके हैं. हालाँकि सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी का कहना है की यदि निगम प्रशासन, प्रशासक, संभागीय आयुक्त मामले में संज्ञान नहीं लेते और कार्यवाही नहीं करते और ठेका निरस्त न करवाकर किसी सक्षम कांट्रेक्टर को ठेका नहीं दिया जाता तो आगे मामले में बड़ी कार्यवाही के लिए न्यायालय जाया जा सकता है.




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