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कॉलोनाइजर बिना पंजीयन नहीं करा सकेंतें है रजिस्ट्री,आम आदमी नहीं आता है रेरा के दायरे में

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शहडोल:-ऐसे बिल्डर व कॉलोनाइजर्स जो नगरनिगम, नगरपालिका, नगर पंचायत व जनपद पंचायत क्षेत्र में कोई कॉलोनी व बिल्डिंग का निर्माण करना चाहते हैं उन्हें रेरा एक्ट तहत रेरा नंबर लेना होता है। कृषि भूमि खरीदकर प्लॉटिंग करने वाले भी इसके दायरे में आते है। रेरा में न सिर्फ प्राइवेट बिल्डर्स व कॉलोनाइजर को पंजीयन कराने होते है बल्कि इस प्रक्रिया से स्वयं नगर निगम, लोकनिर्माण विभाग, पीआईयू, गृह निर्माण मंडल जैसी संस्थाएं को भी गुजरना पड़ेता है। आम आदमी रेरा के दायरे में इसलिए नहीं आता है क्योंकि रेरा सिर्फ उन पर लागू होगा जो 8 यूनिट यानि आठ प्लॉट या से अधिक पर निर्माण करते हैं या उनकी बिक्री करते हैं। आठ प्लॉट से कम पर निर्माण व बिक्री करने वाले किसी भी व्यक्ति को रेरा नंबर नहीं लेना होता है ।. ऐसे होता है रेरा-एक्ट का पालन:-
रेरा लागू होने से जनता को यह होता है फायदा
अभी तक कॉलोनाइजर व बिल्डर द्वारा जमीन लेकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाता था। बाद में प्लॉट व फ्लैट बिक्री हो जाते थे। खरीदने वाले लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं। लेकिन अब रेरा नंबर लेने के लिए आवेदन करने पर कॉलोनाइजर व बिल्डर्स को पूरी प्लानिंग सामने रखनी होती है जिसमें निर्माण कार्य करने की समय सीमा भी बताई जाती है और यह भी दर्शाया जाता है की वहां क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। नियमानुसार सभी सुविधाएं नजर आने पर ही रेरा नंबर दिया जाता है । इससे उन सभी लोगों को लाभ होता है जो प्लॉट या फ्लैट खरीदते हैं।. रजिस्ट्री में जिस ‘रेरा’ कानून को शासन द्वारा अनिवार्य किया जाता है वह केवल कॉलोनाइजर व बिल्डर्स को नियम का पाठ पढ़ाने के लिए है। आम जनमानस रेरा से किसी तरह प्रभावित नहीं होगा। सामान्य प्लॉट व खेतों की रजिस्ट्रियां पहले की ही तरह रजिस्ट्रार कार्यालय में हो सकेंती है ।. रियल स्टेट रेग्यूलेशन एंड डवलपमेंट एक्ट (रेरा) केन्द्र सरकार का कानून है। जिसका क्रियान्वयन प्रदेश सरकार द्वारा से कराया गया है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव एंटोनी डिसा इसके अथॉरिटी चेयरमेन हैं। कानून का पालन कराने के लिए उन्होंने नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत, जनपद पंचायत व रजिस्ट्रार कार्यालयों को निर्देश जारी कर दिए गये थे जिसकी जानकारी संबंधित विभागों में हैं।. इस तरह मिलेता है रेरा नंबर:-
पंजीयन के लिए कॉलोनाइजर व बिल्डर को अपना पूरा प्रोजेक्ट तैयार करके नगरीय निकाय या पंचायत निकाय के समक्ष पेश करना होता है उसका परीक्षण किया जाता है। जहां से उस पर सहमति और एनओसी जारी होती है । इसके बाद राज्य स्तर की अथॉरिटी उसे अनुमोदित करती है । इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद नगरीय निकाय या पंचायत निकाय रेरा के पंजीयन का नंबर जारी करता है।

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