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सफेद,पीला,गुलाबी लीफाफे का दौर,मलाई खा रहा वंशिका का जादौऩ

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शहडोल। जी हां यह कोई कहावत या मुहावरा नहीं है, बल्कि एक ऐसा काला सच है, जिसके चलते आने वाले दिनों में शहडोल जिला, इतिहास के पन्नों में दर्ज हो सकता है? बता दें कि, वंशिका कंस्ट्रक्शन कंपनी जिस तरीके से इस जिले में अपने अवैध कारोबार को भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से अंजाम दे रहा है, उसे देखते हुए ऐसा कहना अतिशयोक्ति न होगा।

कुल मिलाकर अंधेर नगरी, चौपट राजा की तर्ज पर, यहां पर सारा खेल चल रहा है। कारण यह है कि, संबंधित खनिज विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि, सत्ताधारी से लेकर विपक्ष की भूमिका निभाने वाले सभी जिम्मेदार, अपनी जिम्मेदारियों से परे नजर आ रहे हैं। जो शुरुआती दौर से दिखलाई पड़ रहा है। ऐसे में शिवराज सरकार पर भी सवालिया निशान उठना लाजमी है!

ऐसा इसलिए संभव हो रहा है क्योंकि, वंशिका ग्रुप सभी को, खिलाफ न बोलने या कार्यवाही न करने की एवज में बकायदा हर माह मनपसन्द नजराना पेश कर रहा है। पीपीपी मोड में यह काम पूर्व से ही जारी है, जो कि वर्तमान में जादौन की कमांड में संचालित हो रहा है।

सूत्रों की माने तो जादौन की माया में सभी लीन हैं, फिर चाहे वह कोई भी हो? बताया जाता है कि, पीपीपी मोड के तहत जादौन ने तीन प्रकार का नजराना लागू कर रखा है। यही कारण है कि, सिस्टम में सभी अपने-अपने औकात अनुसार फिट हैं। जिसमें सफेद, पीला व गुलाबी लीफाफा लेने वाले पीछे नहीं दिखलाई पड़ते हैं।

सूत्र बतलाते हैं कि, जैसे-जैसे लीफाफे का कलर बदलता है, रकम भी उसी अनुसार परिवर्तित होती है। हर एक को उसकी औकात के मुताबिक लीफाफा देकर गांधी के तीन बंदर की भांति, मंशानुरूप न जाने का काम वंशिका ग्रुप बखूबी कर रहा है।

नजराने का ही कमाल है कि वंशिका ग्रुप हर एक विभाग के नियम कायदों की धज्जियां उड़ाता हुआ, अपने अवैध कार्यप्रणाली को सतत रूप से अंजाम देता आ रहा है और जिम्मेदार सभी मौन साधना में लीन। जन चर्चा की अगर बात की जाए, तो सत्ताधारी कमल को अपनी एक अलग जिम्मेदारी, सौंपी गई है? वहीं कलेक्टर का बेटा भी जिले के अंतिम छोर पर बराबर हाथ बंटाते हुए डटा है? विपक्ष, भाईचारे की भूमिका में धर्म संकट के बीच फंसा हुआ है, तो जनप्रतिनिधियों की आवाज लिफाफे में कैद नजर आती है? खैर, यह अलग बात ही है कि लिफाफे का रंग कौन सा है?

कमल के मंडल-कमंडलों की कारोबार में हिस्सेदारी और अवैध भंडारण,,, अगले अंक में

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