अब तक आरोपियों तक नहीं पहुंची पुलिस, देवांता अस्पताल के डॉ विष्णुकांत और डॉ बृजेश लगातार चल रहे फरार
देवांता अस्पताल मे मरीज की मौत के बाद भी जिंदा बताकर रुपए वसूलने का मामला
अखिलेश कुमार शर्मा (7999140850 )
शहडोल। देवांता अस्पताल में महिला मरीज की मौत के बाद भी रुपए वसूलने के मामले में न्यायालय ने सख्ती दिखाते हुए प्रबंधक और डॉक्टर की जमानत याचिका खारिज की है। आरोपियों द्वारा न्यायालय अपर सत्र विशेष न्यायाधीश के यहां जमानत याचिका लगाई थी। जहां पर सुनवाई करते हुए
अपर सत्र विशेष न्यायाधीश बीएल प्रजापति ने डॉ विष्णुकांत त्रिपाठी और डॉ बृजेश पांडेय को जमानत नहीं दी है। मामले में अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस नहीं कर सकी है। मामला दर्ज होने के साथ ही आरोपी फरार हैं। जांच टीम के समक्ष भी प्रस्तुत न होकर बयान दर्ज नहीं कराया है। मामले में शासन की ओर से पैरवी लोक अभियोजक संदीप तिवारी ने की। गौरतलब है कि संतोष कुमार राठौर निवासी चोरभटठी अनूपपुर ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि देवांता अस्पताल के प्रबंधक डॉ बीके त्रिपाठी और डॉ बृजेश पांडेय द्वारा पत्नी का सही उपचार नहीं किया गया है। पीडि़त के अनुसार, भय दिखाकर पैसे ले लिए और पत्नी की मौत के बाद भी मुझे जानकारी नहीं देकर कई कोरे कागजों में दस्तखत कराए जा रहे थे। इस दौरान कई बार धोखाधड़ी कर कई बार पैसे भी लिए गए। जब महिला की मौत हो गई, तब भी जानकारी नहीं दी गई थी और रुपए वसूलते रहे।
कोर्ट ने कहा-
एडमिशन स्लिप से स्पष्ट, नहीं मान सकते फरियादी छिपाया मामले में कोर्ट ने कहा है कि आरोपियों की ओर से तर्क किया गया है कि पाइजन केस था। इस तथ्य को फरियादी द्वारा छुपाया गया है और बाद में बताया गया। जबकि आरोपियों की ओर से प्रस्तुत एडमिशन स्लिप में स्पष्ट लेख किया है कि पाइजन केस था।जिससे ये नहीं माना जा सकता है कि फरियादी ने तथ्य को छुपाया है। शासन की ओर से पैरवी कर रहे संदीप तिवारी ने विरोध करते हुए बताया कि आरोपियों द्वारा जिंदा बताकर अस्पताल में रखा गया था और बाद में जिला अस्पताल भेजा। इस दौरान जिला अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा जांच में बताया गया कि दो घंटे से ज्यादा समय पहले ही मौत हो चुकी है। जिससे साफ है कि प्रबंधन द्वारा धोखाधड़ी की गई।



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