रेहवा घाटी में रेस्क्यू ऑपरेशन का पाँचवाँ फेज, नही निकाले जा सके एक भी गोवंश // पशु चिकित्सक द्वारा 2 गंभीर बीमार गायों का किया गया इलाज // 2 बोरी भूषा देकर छोड़ दिया गया रेस्क्यू कार्य, अब अगले दिनों रेस्क्यू किये जाने का किया जाएगा प्रयास//
जिला रीवा अंतर्गत सिरमौर वन परिक्षेत्र और सरई बीट के रेहवा घाटी में पिछले महीने 27 सितम्बर को 150 गोवंशों को धकेले जाने की वारदात सामने आने के बाद गोवंशों को बाहर सुरक्षित और जीवित निकालने का प्रयास सामाजिक कार्यकर्ता और एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी और उनकी टीम द्वारा निरंतर जारी है. अब इस मामले में स्थानीय पंचायत, वन अमले और पशु चिकित्सकों का सहयोग प्राप्त हो रहा है.
पांचवीं बार का रेस्क्यू ऑपरेशन- हुआ घायल गायों का इलाज
दिनांक 13 अक्टूबर को रेस्क्यू ऑपरेशन के पांचवें चरण में एक बार पुनः घायल और कमजोर गोवंशों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया गया. लेकिन कमजोर और घायल गायें घाटी के ऊपर चढ़ पाने में असमर्थ रहीं. इस बीच देर से लगभग 01 बजे के बाद पहुंचे पशु चिकित्सक रत्नेश सिंह और गोसेवक रंजीत साकेत घाटी के ऊपर उपस्थित हुए. मात्र गोसेवक रंजीत साकेत ही घाटी के नीचे सामाजिक कार्यकर्ता के साथ उतर पाए और इलाज किया. इस बीच दो सफ़ेद गायों का इलाज हुआ जिसमें एक गाय की सींग और योनि-गुदा में घाव की वजह से कीड़े पड़ने के कारण हाल बेहाल था. वहीं अन्य दूसरी गाय की खुर में चोट की वजह से कीड़े पड़ने गहरा घाव होने की वजह से चल पाने में असमर्थ थी. इन दोनों गायों के इलाज में डीएस 40 लाख यूनिट, जोबिट एम 10 एमएल, एंटी एलर्जिक 5 एमएल, कार्बोलिक पाउडर, ए3 स्प्रे लगाकर इलाज किया गया.
5 गायें ऊपर चढ़ पाने में असमर्थ
इस दिन चले रेस्क्यू अभियान में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने बताया की 5 गायों को एक जत्थे में एकत्रित पाया गया और उनको 2 बोरी भूषा उपलब्ध कराया गया. भूषा खाने के बाद उनके शरीर में कुछ ताकत महसूस हुई जिसके बाद उनका इलाज कर उपस्थित कार्यकर्ता रंजीत साकेत, गोसेवक सतानंद केवट, मानसेवी कर्मचारी वन विभाग बाबूलाल यादव के द्वारा ऊपर चढ़ाने का प्रयास किया गया लेकिन गोवंस ऊपर चढ़ पाने में असमर्थ रहे.
इस स्थिति में आगे प्लान किया गया की कुछ विशेष व्यवस्था के साथ गोवंशों को चढ़ाने का प्रयास किया जाय जिसमें रस्सी और लेबर और पर्याप्त लिफ्टिंग सामग्री के साथ उन्हें ऊपर खींचने की व्यवस्था की जाय.
लेबर और तकनीकी सामग्री की कमी के चलते पांचवें फेज का रेस्क्यू अभियान हुआ धीमा
दिनांक 13 अक्टूबर को रेस्क्यू अभियान की शुरुआत में सरपंच रामलखन यादव और सचिव राम उजागर पाण्डेय द्वारा बताया गया की लेबर उपलब्ध नहीं हैं. परन्तु इस विषय में एक दिन पूर्व ही पंचायत कर्मचारियों और प्रधान को अवगत करा दिया गया था लेकिन लापरवाही के चलते आवश्यक लेबर उपलब्ध नहीं कराये जा सके. हालाँकि मानसेवी बाबूलाल यादव के घर से 2 बोरी भूषा की व्यवस्था की गयी जो घाट के नीचे पहुंचाया गया.
प्रभारी रेंजर आशीष रावत भी पहुचे मौके वारदात पर
उपवनमंडलाधिकारी ऋषि कुमार मिश्रा और साथ में वन परिक्षेत्र अधिकारी आशीष रावत को मामले की जानकारी पहले ही एक्टिविस्ट द्विवेदी द्वारा दे दी गयी थी जिस पर रेंजर सिरमौर आशीष रावत द्वारा बताया गया की वह 3 बजे के बाद पहुंचेंगे. इस प्रकार सिरमौर के अतिरिक्त प्रभार में चल रहे सेमरिया परिक्षेत्र अधिकारी आशीष रावत देरी से पहुंचे और घाट के ऊपर से ही पूरे वाकये का अवलोकन किया. उनके साथ अन्य वन अमला बीट गार्ड पुष्पराज सिंह, डिप्टी रेंजर द्विवेदी एवं अन्य बीट गार्ड भी साथ थे.
मीडिया कर्मी भी पहुचे घटना स्थल पर
दिनांक 13 अक्टूबर को रेहवा घाटी में विन्ध्या टाइम्स के पत्रकार और संवाददाता प्रियेश पाण्डेय भी अपनी टीम के साथ पहुंचे और पूरे मामले का संज्ञान लिया. उन्होंने उपस्थित रेस्क्यू टीम और अन्य सदस्यों का इंटरव्यू भी लिया और घटना के बारे में पूरी जानकारी एकत्रित की.
घाटी में फंसे गोवंशों का जीवन संकट बरकरार
हालाँकि अभी तक चले 5 फेज के रेस्क्यू अभियान में एक्टिविस्ट द्विवेदी द्वारा बताया गया की लगभग एक सैकड़ा गोवंशों को रेस्क्यू किया जाकर बाहर निकाल लिया गया है लेकिन फिर भी दर्जन भर गोवंश अभी फंसे हैं जिन्हें निकाला जाना अत्यंत आवश्यक है. जंगली क्षेत्र में खाने पीने और आश्रय की कोई समुचित व्यवस्था न होने के चलते और साथ में जंगली जानवरों का भय बना रहने के चलते उनका जीवन संकट बना हुआ है. एक्टिविस्ट द्विवेदी ने रेस्क्यू किये जाने के लिए बेहतर और सुसज्जित टीम की मांग की है. इस विषय में उन्होंने जिला कलेक्टर रीवा डॉक्टर इलैयाराजा टी को भी अवगत करा दिया है


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