तो क्या “रामराज्य झूठा है”…?धर्म का पीपल आखिर राम-राज्य में क्यों सूख रहा है….

“वृक्षों में मैं पीपल हूं ..”ऐसा गीता उपदेश में भगवान कृष्ण ने स्थापित किया। लेकिन जब शहडोल की मोहन राम मंदिर स्थित करीब 100 वर्ष पुराना विशाल पीपल का वृक्ष अनायास सूखने लगता है तो लगता है कि धर्म मंदिर की में खत्म हो गया है.. धर्म का नकाब पहनकर अधर्मी मंदिर की संपत्ति को सरकारी आदमियों के संरक्षण में, नेताओं के संरक्षण में खुलकर नष्ट-भ्रष्ट कर रहे हैं। . सत्येंद्र-अंसारी की जोड़ी ने निकाले 8:15 करोड़…? कथा सहायक आयुक्त कार्यालय के भ्रष्टाचार की. यह इसी वर्ष हो रहा है जब पीपल सूख रहा है और हो भी क्यों ना आदिवासी क्षेत्र शहडोल में पारदर्शी भ्रष्टाचार की विरासत लिए तीसरे कलेक्टर के रूप में आदिवासी संभाग मुख्यालय मे आदिवासी विभाग के अंतर्गत सत्येंद्र अंसारी की जोड़ी ने भ्रष्टाचार की कीर्तिमान खड़े किया। बिना कोई लोक-लिहाज के, बिना कोई नैतिक मर्यादा के एक तृतीय वर्ग कर्मचारी मंडल संयोजक अंसारी को गैर कानूनी तरीके से सहायक आयुक्त का प्रभार दिया जाता है, कहते हैं तब आदिवासी मंत्रालय से जुड़ी शहडोल की प्रभारी मंत्री मीना सिंह ने आपत्ति भी प्रकट किया था किंतु तत्कालीन कलेक्टर सत्येंद्र सिंह ने गंभीरता से इसकी जिम्मेदारी ली थी की वह उनका दायित्व है, आप निश्चिंत रहें। उनके कहने की मंसा शायद रही होगी कि सभी कार्य भाजपा के राम-राज्य के अनुसार होंगे।और फिर जिस कर्मचारी को कानूनी तौर पर वित्त व्यवस्था में जिला कोषालय से आहरण का अधिकार भी ना हो वह दो दशक से लंबित प्रकरण का निराकरण करते हुए करीब 8:15 करोड़ रुपए का आहरण करके निजी पांडे शिक्षा समिति जैसीनगर के कर्मचारियों का पांचवें वेतनमान का एरियर न सिर्फ आहरण करता है बल्कि पूरी “रामराज्य की कर्तव्यनिष्ठा” के अनुसार उक्त शिक्षा समिति के उन कर्मचारियों को अकाउंट में पैसा जमा नहीं कराता बल्कि शिक्षा समिति के खाते में 8:15 करोड़ों पर जमा कर देता है। सिर्फ जुम्मा जुम्मा 6 महीने महीने के लिए गैरकानूनी तरीके से सहायक आयुक्त में प्रभार लेकर, सत्येंद्र और अंसारी की जोड़ी लोकतंत्र का नया कमल खिलाती है।. कथा मोहन राम मंदिर भ्रष्टाचार की:-. यह शहडोल में ही हो सकता है क्योंकि करोड़ों रुपए खुलेआम गैरकानूनी तरीके से बर्बाद करने के बाद मध्य प्रदेश की 20 वर्षीय सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी का रामराज्य मोहन राम तालाब में मोहन राम मंदिर को इस तरह से नष्ट भ्रष्ट किया कि मारे शर्म के धर्म का पीपल सूखने लगा । जैसा कि तत्कालीन कमिश्नर प्रजापति ने ढाई करोड़ पर क्या भ्रष्टाचार मैं दो अधिकारियों को निलंबित किया था फिर मामला धर्म का नकाब पहनकर गंदगी को ढकने लगा। चाहे मंदिर हो या प्रशासनिक मंदिर अधर्म ने नैतिकता,मर्यादा, धर्म और अनुशासन का पारदर्शी तरीके से पतन करते हुए भ्रष्टाचार का नंगा नाच किया।. तब कलेक्ट्रेट में हिजड़ों ने किया नंगा नाच…. और शायद यही कारण था कि जैसे ही अधर्म के विरासतदार क्रमशः क्रमशः तीसरे कलेक्टर का स्थानांतरण हुआ शहडोल कलेक्ट्रेट में नए कलेक्टर श्रीमती बंदना वैद्द के आने के पूर्व अपने इलाके को लेकर पूर्व विधायक शबनम मौसी से नाखुश होकर हिजड़ों ने निर्वस्त्र होकर नंगा नाच किया ।. क्या यह सब एक संयोग था…, क्या इन सब से कुछ सीखा जा सकता था…? इसे एक्सीडेंटल ट्रांसफर-पोस्टिंग कहना चाहिए या फिर सुनियोजित प्रशासनिक कार्य प्रणाली कि जैसे ही नवागत महिला कलेक्टर श्रीमती बंदना वैद्य प्रभार में आई गत 2 वर्षों से चलने वाला रेत का अवैध कारोबार प्रतिबंधित मानसून सत्र में संभाग में संचालित सैकड़ों रेत खदानों मे सिर्फ एक खदान में न सिर्फ करता पाया गया बल्कि प्रशासन की क्रोध का शिकार होते हुए रेत स्मगलर माफिया के रूप में स्थापित हो चुका वंशिका ग्रुप के नाम पर उनके प्रबंधकों के संरक्षण में कुछ गाड़ियां कुछ पोकलेन पनडुब्बी आदि जप्त की गई … क्या उन्हें नियमानुसार राजसात किया जाता है जैसे स्थानीय छोटे ट्रैक्टर, डग्गी वालों के वाहन राज्सात किए जाते रहे अथवा नहीं …? जिम्मेदार व्यक्ति को कानूनी दंड मिलता है अथवा नहीं…? यह तो भविष्य के धुंध में छिपा है, किंतु शहडोल की ही नहीं बल्कि संभाग के सैकड़ों रेत खदानों में सिर्फ एक रेत खदान पर की गई कार्रवाई का यह पारदर्शी परिणाम था। इसके पीछे सियासत की राजनीति का शतरंज काम कर रहा था अथवा कानून एक्सीडेंटल-प्रोग्रेस कर गया… यह भी तब प्रमाणित होगा अगर न्यायपालिका की पवित्र मंसा इस पर काम करती दिखाई देगी। बहरहाल चाहे मुद्दा भाजपा के रामराज्य में शहडोल के मोहन राम मंदिर का वर्षों से लूटखसोट का हो अथवा सत्येंद्र-अंसारी की जोड़ी से किसी शिक्षा समिति के पांचवें वेतनमान एरिया का सवा आठ करोड़ रुपए के बंदरबांट का हो…, या फिर रेत माफिया के पारदर्शी भ्रष्टाचार का हो , इस पर इस पर अभी तक सिर्फ धर्म का पीपल लगातार सूखता नजर आ रहा है…।कोरोना बनी चुनौती तो भ्रष्टाचारियों ने तलाशा अवसर:- कोरोना के कार्यकाल में चुनौती एक अवसर है इस अवसर का लाभ उठाने वाला शासन और प्रशासन कि यह जवाबदेही भी है किंतु सवाल यह है कि शहडोल में दिखने वाला इमानदार प्रशासन तंत्र क्या वास्तव में सच्चाई की जमीन पर जाकर बीते अधर्मीओ के भ्रष्टाचार पर कोई श्वेत पत्र जारीकर्ता दिखेगा….? अगर रेत माफिया का बंपर कारोबार गैरकानूनी होकर पकड़ा गया तो उसने कोरोना कार्यकाल में कितने अरब रुपए का गैरकानूनी खनिज परिवहन कर राजस्व की क्षति पहुंचाई इसका आकलन करने की फिलहाल तो कोई समिति बनती नहीं दिखाई देती है…? ऐसे में विधायक और सांसद की चुप्पी क्या सत्येंद्र-अंसारी के जोड़ी से हुए भ्रष्टाचारी कृत्य की चुप्पी की तरह प्रमाणित नहीं होती है….? यह भी देखने योग्य होगा।फिलहाल धर्म का पीपल जो मोहन राम मंदिर में सूख रहा है उसको बचाने के लिए धर्म का नकाब पहने हुए शासन और प्रशासन अपने विषय विशेषज्ञों के द्वारा क्या इस पीपल को फिर से हरा कर पाएगा यह संपूर्ण प्रशासनिक अधिकारियों के शिक्षा संस्कार और गुणवत्ता की योग्यता के लिए एक चुनौती भी है और नैतिकता का तकाजा भी… यह भी देखना होगा ।

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