भारत की गोमाता पूंछे कहाँ है हमारे अधिकार? कहाँ हैं हमारी 4 हज़ार गोशालाएं? कहाँ गए वह भारत के लोग जो उसकी पूंछ पकड़कर बैतरनी पार करने का ढोंग फैला रहे? // जिले में नहीं रुक रही पशु क्रूरता// सरई में ही मुह में जीआई तार से बांधकर बैल को मरने के लिए छोड़ा// गंभीर हालत में एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने कराया मुक्त, चल रहा इलाज // रेहवा घाटी पशु क्रूरता की घटना के 25 दिन पूरे,
जिले में पशु क्रूरता रुकने का नाम नहीं ले रही है. एक तरफ रेहवा घाटी में 2 हज़ार फीट गहरी घाटी के नीचे धकेले गए गोवंशों का रेस्क्यू और इलाज पूर्ण नहीं हो पाया है वहीं दूसरी तरफ सरई ग्राम के जमुनिहा टोला में तलब के पास एक मुह में तार बंधे बैल को देखा गया. ग्रामवासी मनोज बहेलिया द्वारा जब नजदीक जाकर देखा गया तो पता चला की बैल का मुह सड़ चुका है और कीड़े पड़ चुके हैं. इस बीच मनोज बहेलिया ने मामले की जानकारी सरपंच सरई रामलखन यादव और अन्य ग्रामवाशियों को दी और जानना चाहा की इसका इलाज कैसे हो तो जहाँ सरपंच ने फ़ोन नहीं उठाया वहीं गांववालों ने असमर्थता जाहिर की. जब अन्य कोई रास्ता नहीं दिखा तो मनोज ने सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को कॉल किया. एक्टिविस्ट द्विवेदी ने मनोज को फोटो विडियो और अन्य लोकेशन की जानकारी व्हाट्सएप में भेजने के लिए कहा. जानकारी भेजने पर वह जानकारी एक्टिविस्ट द्वारा लालगांव चौकी प्रभारी यू बी सिंह, गंगेव पशु चिकित्सा अधिकारी एसके पाण्डेय, एसडीएम् सिरमौर नीलमणि अग्निहोत्री और जिला कलेक्टर रीवा डॉक्टर इलैयाराजा टी को फॉरवर्ड कर दी गयी. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और पशु चिकित्सा अधिकारी एसके पाण्डेय द्वारा लालगांव और हिनौती से पशु चिकित्सा विभाग के अपने स्टाफ भेजकर इलाज करवाया गया. मौके पर शिवानंद द्विवेदी के साथ सरई ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव के साथ चौकी प्रभारी लालगांव और पशु चिकित्सा विभाग के एवीएफओ संतराम साहू, रामानुज कोल, और उमेश शुक्ला उपस्थित रहे.
महीने भर से भूंखा था बैल, खाने पीने में पूरी तरह था असमर्थ
जब बैल के बंधे हुए मुह को खोंलने का प्रयास किया गया तो बैल द्वारा काफी उछल कूद किया गया. बैल आसानी से पकड़ में नहीं आ रहा था लेकिन उपस्थित ग्रामवासियों की मदद से बड़े मुस्किल से बैल पकड़ में आया. इसके बाद उपस्थित हुए डॉक्टर द्वारा बैल के मुह के ऊपर पड़े हुए कीड़े और कह्राब खून को पानी के साथ साफ़ किया गया और मलहम इलाज किया गया. एवीएफओ रामानुज कोल ने सफ़ेद मलहम लगाया और स्प्रे से घाव में दवा डाली. इसके बाद मल्टीविटामिन और दर्द निवारक इंजेक्शन लगाया जिसके बाद बैल को कुछ रहत मिली. घाव सूखने का भी इंजेक्शन डॉक्टर द्वारा लगाया गया. जिस प्रकार बैल की स्थिति हो चुकी थी तो लोगों ने बताया की यह बैल काफी म्ज्बोत था लेकिन मुह में तार बंधे होने के चलते काफी अंजोर हो चुका था. देखने से स्पष्ट था की बैल कुछ भी खाने पीने में असमर्थ था और बेहद पीड़ा और कष्ट में था.
परदेशी यादव निवासी सरई पंचायत का नाम आया सामने
हालाँकि गाँव वालों ने खुलकर जानकारी नहीं दी लेकिन सूत्रों से जानकारी मिली की यह बैल वहीँ गाँव में ही किसी का था और ऐसा नहीं है कि आज ही कहीं दूर बाहर से आया था. कई दिनों से लोग उसे देख रहे थे. लेकिन चूँकि बैल किसी को आसानी से नजदीक जाने नहीं दे रहा था इसलिए उसके मुह से तार निकालना संभव न था. गाँव वालों से जानकारी लि गयी तो बताया की पुलिस ज्यादा पूछताछ करेगी इसलिए खुलकर नहीं बताएँगे लेकिन बैल के मुह में तार बाँधने का जघन्य अपराध वहीँ गाँव के किसी परदेशी यादव द्वारा किया गया था.
रेहवा घाटी में नहीं पहुंचे कोई पशु चिकित्सक, नहीं हो पाया इलाज और ड्रेसिंग
दूसरी तरफ जिन 150 गोवंशों को 27 और 28 सितम्बर के दरम्यान 2 हज़ार फीट गहरी रेहवा नामक घाटी के नीचे धकेले जाने की वारदात के बाद जो रेस्क्यू अभियान और इलाज का कार्य कुछ दिन किया गया वह पशु चिकित्सकों की कमी के चलते नहीं हो पाया. दिनांक 21 अक्टूबर को हालाँकि कई पशु चिकित्सक बैल के मुह का तार निकालकर इलाज करने पहुचे लेकिन जब उन्हें रेहवा घाटी के नीचे उतरकर घायल बीमार पड़ी गायों के इलाज करने के लिए कहा गया तो उनकी सांसे फूल आयीं. उन्होंने सीधे मना कर दिया. ज्ञातव्य है की रेहवा घाटी में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी की मदद से अब तक 104 गोवंशों का रेस्क्यू किया जा चुका है और लगभग 25 से 30 तक मर भी चुके हैं. वहीँ आये दिन पोषण और इलाज के अभाव में एक एक करके मर रहे हैं. अभी भी घाटी के नीचे लगभग 10 से 15 गोवंश फंसे हुए हैं जिनका रेस्क्यू और इलाज किया जाना आवश्यक है. लेकिन चूँकि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी और स्वेच्छा से कुछ भी नहीं कर रहा है तो सवाल यह है कब तक कोई व्यक्ति डंडा करके प्रशासन से काम कराएगा?
भाजपा सरकार की 4 हज़ार गोशालाएं हवा हवाई, खतरे में गोवंश
गोवंशों के अधिकारों के लिए न केवल सतत आवाज उठाने वाले बल्कि ग्राउंड जीरो में स्वयं जाकर इनके रेस्क्यू और इलाज के हर संभव प्रयास करने वाले एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने कहा है की आज देश में गोवंशों की स्थिति काफी चिंतनीय है और इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए बनाई जा रही मप्र की 4 हज़ार से अधिक गोशालाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं और पंचायत माफिया और प्रशासन के बैठे भ्रष्ट अधिकारी गोमाता के अधिकार को भी नहीं बख्स रहे हैं. जो पंचायती गोशालाएं बन गयी हैं वहां पर गोवंशों का समुचित पोषण और रखरखाव नहीं हो पा रहा है और आने वाली राशि को हजम किया जा रहा है और जो अभी निर्माणाधीन हैं वहाँ पंचायत अधिकारियों और सरपंच सचिव की सांठगांठ से गुणवत्ता विहीन कार्य किया जा रहा है. जहाँ गौशालाओं के निर्माण को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं वहीं दूसरी तरफ जिले और प्रदेश में पशु क्रूरता अपने चरम पर है. जहाँ तक राजनीतिक दलों की बात है तो चाहे वह भाजपा हो अथवा कांग्रेस सभी अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में लगी हैं और कोई मौक़ा नहीं छोड़ रही हैं. इन राजनीतिक दलों की संवेदनशीलता मात्र ट्वीट और फेसबुक पोस्ट तक ही सीमित रहती है. ज्ञात होगा की अभी सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा जब रेहवा घाटी का मामला उठाया गया तो इस पर पूर्व मप्र मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी ट्वीट कर भाजपा को घेरा था लेकिन बस एक ट्वीट के बाद सब कुछ शांत हो गया और गोवंशों की स्थिति यथावत बनी हुई है.


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