चिकित्सा महाविद्यालय में प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति पर डॉक्टरों ने जताया विरोध
शहडोल ।प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश भर में स्थित शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया गया है ।जिसका विरोध शुरू हो गया है ।इसी के तहत शहडोल स्थित शासकीय बिरसा मुंडा चिकित्सा महाविद्यालय के चिकित्सक सुनील नरहरी तिड़के प्राध्यापक व विभाग अध्यक्ष शरीर रचना विभाग व डाक्टर पवन आनंदराव वानखेड़े सहप्राध्यापक फारेंसिक मेडिसिन विभाग चिकित्सा महाविद्यालय शहडोल द्वारा संयुक्त रूप से एक विज्ञप्ति जारी की गई ।जिसके माध्यम से बताया कि कॉलेज के सभी डाक्टर सरकार के इस आदेश का कड़ा विरोध करते है । और इसी विरोध स्वरूप आज से काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया। हालांकि वह विरोध के साथ साथ अपना कार्य भी सुचारू रूप से करते रहेंगे । चिकित्सको का कहना है कि चिकित्सा महाविद्यालय में डीन के पद पर 10 वर्ष की चिकित्सा शिक्षा के साथ 20 वर्ष तक चिकित्सीय सेवा के बाद स्थापित हो सकते है । क्योंकि ऐसे ही चिकित्सीय सेवा के ज्ञान वाले व्यक्ति ही इस पर के अनुरूप हो सकते है ।लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा बिना चिकित्सीय शिक्षा वाले अधिकारियों को प्रदेश के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में नियुक्ति की जा रही है। जो कतई उचित नही है। अगर गैर चिकित्सा के क्षेत्र के अधिकारी की यह नियुक्ति हुई तो इससे चिकित्सको एवम उक्त अधिकारियों के बीच टकराव पैदा हो सकता है ।अगर प्रदेश सरकार इस आदेश को वापस नही लेती है तो सभी चिकित्सा महाविद्यालय के चिकित्सकों द्वारा आंदोलन किया जाएगा।


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