मानवता हुयी शर्मशार,सीईओ मुद्रिका सिंह की कार्यप्रणाली पर उठे रहे सवाल…?
मृतक का पुत्र इस्लाम खान ने नही चडाई चढौत्री,साल भर से जनपद के लगा रहा चक्कर
जमुना मिश्रा की खास रिपोर्ट……
शहडोल । जिले मे जहां कोरोना काल मे बुढार नगर के लोगो ने मानवता की मिशाल पेश करते हुये गरीब लोगो की मदत की वही जनपद पंचायत बुढार मे जब से जनपद सीईओ मुद्रिका सिंह ने पदभार सम्भाला ऐसा लगता है जनपद पंचायत बुढार मे भ्रष्टाचार की गंगा बह गयी है बीन चढौत्री नही होता कोई काम अगर चढौत्री नही चडाई तो सरकारी नियमो मे आवेदक केवल चक्कर लगाता रहेगा पर उसका कार्य नही होगा और चढौत्री चडा दी तो फिर क्या साहब खुश सारे काम पुरो होजाते है एक ऐसा मामला आज हम बताने जा रहे जिसमे सीईओ मुद्रिका सिंह ने मानवता को शर्मशार कर दिया शायद सरकार द्वारा दी जारही वेतन से साहब का पेट नही भरता है क्या……?
ये है संबल योजना के लाभ
सरकार द्वारा चलायी गयी योजना मे श्रमिक की असामयिक मृत्यु पर अनुग्रह सहायता, अंत्येष्टि सहायता और अपंगता पर आर्थिक सहायता का प्रावधान है। संबल योजना में 5 हजार रुपये की राशि अंत्येष्टि के लिए सहायता के रूप में दी जाती थी। सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रुपये की राशि और दुर्घटना से मृत्यु होने पर चार लाख रुपये की राशि परिजन को देने का प्रावधान किया गया था। स्थाई अपंगता पर 2 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता और आंशिक स्थाई अपंगता पर एक लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने का प्रावधान किया गया।उन्नत व्यवसाय के लिए उपकरण क्रय करने बैंक से प्राप्त ऋण का 10 फीसदी अथवा 5 हजार रुपये, जो भी कम हो, वह भी इस योजना में देने का प्रावधान किया गया था।इसके अलावा शिक्षा प्रोत्साहन योजना, बकाया बिजली बिल माफी योजना, सरल बिजली बिल योजना, निशुल्क चिकित्सा प्रसूति सहायता योजना, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण योजना भी जन कल्याण संबल योजना के तहत चलती हैं।
संबल योजना मे चढौत्री नही चढी तो साहब ने खोला सरकारी नियमो का पिटारा
जनपद पंचायत बुढ़ार में सरकार के मनसे पर फिर रहा पानी बिना चढ़ोत्री के नहीं हो रहा कोई भी काम केसवाही के रहने वाले इस्लाम खान ने बताया की मेरे पिता जी की मृत्यु हुई 24/10/2020 में हुई थी उसके बाद से मै काट रहा हूँ जनपद पंचायत बूढ़ार के चक्कर एक साल से ऊपर हो गया लेकिन अभी तक सरकार की योजना का लाभ नहीं मिला l जब भी जनपद पंचायत बुढार जाकर पता करता हूं तो सीईओ मुद्रिका सिंह कहते है अभी जांच चल रही है सालो से चक्कर लगा रहा इस्लाम खान कुल मिला कर यह कहा जा सकता है की चढौत्री नही चढाई तो साहब ने सरकारी नियमो का पिटारा खोल दिया जिसमे केसवाही का गरीब ग्रामीण उलझ कर ढेड साल से ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत बुढार के चक्कर लगा रहा है पर किसी अधिकारी की मानवता मृतक के पुत्र इस्लाम के लिये नही जागी ।
क्या है पूरी कहानी
इस्लाम ने बताया की संबल योजना का लाभ दिलाने के लिए केसवाही सरपंच ने 2000 रूपए लिए फिर 4-5माह बाद जब पूछा तो बताया तुम्हारा संबल का आवेदन गलत है तुम्हारे पिता जी की मौत नार्मल तरीक़े से हुई है और आवेदन में एक्सीडेंट लिखा हुआ है उसको सुधारवाना पड़ेगा फिर 3-4 माह मे केसवाही पंचायत कर्मीयो ने सुधारवय फिर इस्लाम खान कागज़ पता करने जनपद के अजय शुक्ला बाबू के पास गए उन्होंने बताया तुम्हारा कागज़ गलत है सुधरवाना पड़ेगा। 2 माह लगे सुधरवाने मे फिर इस्लाम जनपद के मुखिया सीईओ मुद्रिका सिंहसे मिले फिर उनको पूरी बात बताये एवं शिकायत आवेदन भी दिए। जनपद के मुखिया सीईओ मुद्रिका सिंह ने ये कहाँ तुम्हारा काम हो जायगा और शिकायत आवेदन की पावती नहीं दीं । जनपद सीईओ अपना मोबाईल नम्बर दे दिए और बोले एक हप्ते में बात कर लेना और फिर दोबारा फोन लगाने पर सीईओ मुद्रिका सिंह ने कहा की ऐसे योजना का लाभ नही मिलता कई प्रकार की जांच होती है तब लाभ मिलाता है अभी जांच चल रही है लेकिन अब ढ़ेड साल हो गए लेकिन अभी भी इस्लाम को मुख्यमंत्री संबल योजना का लाभ नहीं मिल पाया है और दुसरे लोगा को योजना का लाभ मिल चुका है पर ढेेेड साल सेे सीईओ मुद्रिका सिंह जांच करा रहे जो आज दिनांक तक पुरी नही होपाई जो कई सवालो को खडे करता है ।
जनपद के अधिकारी या ग्राम पंचायत के रोजगार सचिव कौन खेल रहा खेल
इसमें बड़ा सवाल तो ये है की अगर मृत्यु नार्मल हुई तो एक्सीडेंट कौन लिखा या पंचायत कर्मियों की चाल है क्या पंचायत कर्मी मोटी रकम के फिराक में थे या फिर जनपद के सीईओ मुद्रिका सिंह का कमाल है l वही मृतक का पुत्र इस्लाम ग्राम पंचायत सचिव,सरपंच और जनपद के चक्कर काट-काट के परेशान हो गया है अब कलेक्टर महोदय से गुहार लगाया है इस मामले में जांच की जाए और मुझ ग़रीब को संबल योजना का लाभ दिलाया जाए।
इनका कहना है –
समस्या के संबंध मे जानकारी के लिऐ मोबाईल पर फोन लगाया गया पर फोन की घंटी बजती रही पर मोबाईल फोन नही उठा । मुद्रिका सिंह सीईओ जनपद पंचायत बुढार


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