सीनियर अधिवक्ता ने न्यायालय मे की युवती के साथ की बदसलूकी व मारपीट

शहडोल जिले के ब्योहारी सिविल न्यायालय परिषर मे वरिष्ठ दबंग अधिवक्ताओ की तानाशाही
घटना: दिनांक-05/05/2022, 4:00 PM
स्थान: ब्योहारी व्यवहार न्यायालय (विकास नामदेव की कलम से):-वरिष्ठ अधिवक्ता भगवान सिंह ठाकुर न्यायालय के अपने बैठक मडईया के सामने अपनी ही मुवकिल असहाय बेसहारा गरीब युवती भारती पटेल उम्र 21 वर्ष ग्राम ढोंढा की निवासी को बच्चे के साथ मदद मागने व खिलाफ बयान दर्ज कराने को लेकर कहा सुनी हो गई जानकारी के अनुसार युवती ने अधिवक्ता या उनके मुवक्किल के खिलाफ बयान दर्ज करवाया व बात चीत के दौरान गर्मी गर्मा बढने लगी जिससे अधिवक्ता अपना आपा खो बैठे और अभद्रता पूर्वक किसी मवाली की भाति उस असहाय व गरीब युवती को न्यायालय मे दौडाओ दौडा कर बहुत ही बुरी तरह से हाथ व लात से मारा। ध्यान देने वाली बात यह है कि युवती नवजात शिशु के साथ आई थी और वह शिशु वही नीचे पडा था जिसे वरिष्ठ अधिवक्ता ने नही देखा और अपने निर्दयता का सम्पूर्ण परिचय दिया, मारपीट के दौरान इस नवजात शिशु के साथ कोई भी अनहोनी हो सकती थी या शिशु की जान भी जा सकती थी
जिसका जिम्मेदार कौन होता?
सभी अधिवक्ता सरेआम युवती को निर्लज्जता पूर्वक पीटते हुये सिर्फ देखते रहे किसी ने गरीब व असहाय को बचाने हेतु 200 अधिवक्ताओ के मध्य कोई नही आया आता भी तो कैसे वरिष्ठ अधिवक्ता दबंग जो ठहरे किसी की मजाल हो कि कोई हाथ लगा दे वह अबला युवती चीखती रही चिल्लाती रही मदद के लिए आस पास खडे अंधे कानून को बेबस बनते देखती रही, वही बगल मे न्यायालय की सुरक्षा पुलिस बल भी तैनात था लेकिन सभी मूक दर्शक बन इस शर्मनाक अमानवीय दृश्य को होते देख रहे थे सबसे प्रमुख यह सब न्याय के मंदिर मे हो रहा था और अंदर बैठे 5-6 माननीय न्याय मूर्ति को भनक भी नही लगी जिसमे एक महिला न्याय मूर्ति किरन वर्मा जी भी पदस्थ है लेकिन युवती पर हुये अत्याचार पर सब मौन है माननीय ADJ महोदय की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नही की गई है आज वह महाभारत की घटना याद आ रही है जब दुश्सासन भरे दरबार मे द्रौपदी को कुछ ऐसे ही मारते पीटते व घसीटते हुये लाया था और कुरू वंश की इज्जत को तार तार किया था और सारा दरबार मूक दर्शक बन सिर्फ पथराई आखो से देखते रहे उसी प्रकार ब्योहरी के न्यायमूर्ति व कानून के जानकरो के मध्य यह क्यू हो गया और महानुभावो के होते हुये युवती के साथ अन्याय कैसे हो गया इसकी गहन जाच होनी चाहिए व 60 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता के खिलाफ कठोर से कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो जिससे कोई भी ऐसा कुकृत्य न कर सके व खास तौर पर महिला पर तो कतई नही।



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