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National Breaking- 100 वें राष्ट्रीय आरटीआई वेबीनार का हुआ आयोजन// देश के जाने-माने सूचना आयुक्त और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियों ने किया संबोधित// 100 कार्यक्रमों के बाद रेजोल्यूशन तैयार कर सरकार को भेजेंगे प्रस्ताव// देश में पारदर्शिता और जवाबदेही के विस्तार के लिए सरकार दे ध्यान।।

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पारदर्शिता और जवाबदेही के कानून सूचना के अधिकार कानून आमजन तक किस प्रकार पहुंचे और कैसे इसे मजबूती प्रदान की जाए इस विषय को लेकर आयोजित किए जाने वाला राष्ट्रीय स्तर के वेबीनार अपने 100 वें पड़ाव पर पहुंचा। 

    ज्ञातव्य है  की यह कार्यक्रम 28 जुलाई 2020 से कोविड-19 लॉक डाउन के दौरान प्रारंभ किया गया था जो इस 22 मई 2022 को अपने 100 वें पड़ाव पर पहुंचा है। इस बीच कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर आयोजित किया गया। आयोजक मंडल से सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया की वेबीनार 22 मई को सुबह 9:00 से दोपहर 12:35 तक एवं 01:00 से 2:00 तक लंच के बाद पुनः 2:00 बजे से शुरू होकर शाम 6:00 बजे तक चला। 

     कार्यक्रम में देश के जाने-माने सूचना आयुक्त व मजदूर किसान शक्ति संगठन के सह संस्थापक एवं अन्य सामाजिक क्षेत्र की जानी-मानी हस्तियों ने संबोधित किया। 

    कार्यक्रम दो भागों और कुल 10 सेशन में रखा गया। कार्यक्रम का संचालन एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा एवं वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह एवं उनकी टीम के द्वारा किया गया। 

  इन इन वक्ताओं ने कार्यक्रम को किया संबोधित

  कार्यक्रम का शुभारंभ मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने किया जिसमें उन्होंने कार्यक्रम के बैकग्राउंड और अब तक के 100 तक के प्रवाह के विषय में प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों में इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस राजीव लोचन मेहरोत्रा, पूर्व रिटायर्ड जज डीसी वर्मा, मजदूर किसान शक्ति संगठन के सह संस्थापक निखिल डे, अरुणा रॉय, शंकर सिंह और पारस बंजारा, पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, पूर्व केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्रा, सतर्क नागरिक संगठन की प्रमुख एवं आरटीआई एक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज, आरटीआई हेल्पलाइन गुजरात से आरटीआई एक्टिविस्ट पंक्ति जोग, फोरम फॉर फास्ट जस्टिस के होनोरेरी ट्रस्टी प्रवीण पटेल, उड़ीसा से ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जयंत कुमार दास, जाने-माने आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल, उत्तराखंड के आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर, युवा आरटीआई एक्टिविस्ट एवं पत्रकार सौरभ दास, माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक भास्कर प्रभु, राजस्थान के वर्तमान सूचना आयुक्त नारायण बारेठ, हरियाणा के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्मानी, छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त मोहन पवार, पत्रकारिता क्षेत्र से सागर सतना पत्रिका समूह के जोनल हेड राजेंद्र सिंह गहरवार, सोशल ऑडिट क्षेत्र से झारखंड से डायरेक्टर गुरजीत सिंह, कर्नाटक से आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेलूर, आरटीआई वर्कर ताराचंद्र जांगिड़, राव धनवीर सिंह, देवेंद्र अग्रवाल, कानपुर से केएम भाई, जोधपुर से सुरेंद्र जैन, मध्य प्रदेश से गोविंद पाटीदार, राज तिवारी, जयपाल सिंह खींची, रिटायर्ड डीएसपी तालेकर, नरेंद्र सिंह राजपुरोहित क्रांति समय मीडिया से सुरेश मौर्य आदि प्रतिभागियों ने कुल 10 अलग-अलग सेशन में विस्तार से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

इन इन विशिष्ट मुद्दों पर हुई चर्चा

  कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन उद्बोधन से हुआ जिसमें मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने आरटीआई कानून के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इसके बाद कार्यक्रम में मानवाधिकार और आरटीआई जिसमें आरटीआई कार्यकर्ताओं के ऊपर हो रहे हमले पर चर्चा हुई। तदोपरांत सेशन 2 से लेकर 10 तक जिन मुद्दों पर चर्चा हुई उनमें से प्रमुख रूप से सुशासन और आरटीआई, न्यायपालिका और आरटीआई सहित आरटीआई की धारा 8, 9 और 11 के दुरुपयोग जिसमें लोक सूचना अधिकारियों द्वारा जानकारी छुपाई जाती है विषयक चर्चा, आरटीआई कानून की धारा 4 जिसमें स्वयमेव ही आरटीआई कानून के वर्ष 2005 में क्रियान्वयन के 120 दिन के भीतर जानकारी पब्लिक फोरम में साझा करनी थी और जो आज तक नहीं हुई, आरटीआई क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका, सूचना आयोगों में बढ़ रही पेंडेंसी एवं आयोग के आदेशों की अवहेलना, जवाबदेही कानून की आवश्यकता और देश के विभिन्न राज्यों में जवाबदेही कानून की स्थिति, आरटीआई कानून का उपयोग कर पत्रकारिता के क्षेत्र में क्या और कैसे बदलाव लाए जाएं, आरटीआई के बाद सोशल ऑडिट अर्थात सामाजिक अंकेक्षण कैसे किया जाता है उसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा और आरटीआई कानून के द्वारा देश में आरटीआई कार्यकर्ताओं ने क्या-क्या बदलाव किए हैं उनकी उपलब्धियों और सक्सेस स्टोरी जैसे कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

      कार्यक्रम के अंत में विदाई समारोह आयोजित हुआ जिसमें पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त एवं इस कार्यक्रम में शुरू से ही प्रमुख रूप से भूमिका निभाने वाले शैलेश गांधी ने पूरे कार्यक्रम की प्रशंसा की और कहा कि आज देश में आरटीआई कानून की जगह-जगह चर्चा हो रही है और वह जीवित है यही बहुत बड़ी उपलब्धि है वरना सरकारें तो आरटीआई कानून को खत्म कर देना चाह रही हैं। और उसमें यदि सबसे बड़ा योगदान खत्म करने के पीछे किसी का है तो वह न्यायपालिका है जो आरटीआई कानून को लगातार संशोधित कर रही है। संशोधन इतना बुरा है कि नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।

    कार्यक्रम के अंत में शैलेश गांधी ने कहा कि हालांकि हिम्मत हारने की जरूरत नहीं है और इसी प्रकार लगे रहने से भविष्य में बड़े बदलाव होंगे। लोकतंत्र में बोलने लिखने और जानकारी की स्वतंत्रता मूलभूत अधिकारों में सम्मिलित है और यही हमारे भारत के लोकतंत्र की ताकत है। सभी को प्रण करके पारदर्शिता और जवाबदेही

लाने की दिशा में इसी प्रकार मिलजुल कर प्रयास करते रहना चाहिए।

  कार्यक्रम के सफल संचालन के बाद उपस्थित विशिष्ट अतिथियों का धन्यवाद दिया गया और कार्यक्रम का समापन किया गया।

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