MP//Rewa: केके स्पन कम्पनी को टर्मिनेट कर ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी// पूर्व टर्मिनेशन को निलंबित कर, दिया गया था 3 माह का समय// प्रोग्रेस रिपोर्ट देने में अक्षम रही केके स्पन के टर्मिनेशन को बढ़ाया आगे// अब 2 साल के लिए ब्लैक लिस्ट करने के लिए कार्यपालन यंत्री सीवरेज नगर निगम रीवा ने शासन को भेजा प्रस्ताव// सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने आरटीआई लगाकर किया था बड़ा खुलाशा// दर्जनों शिकायतों के बाद जागा प्रशासन//

रीवा जिले को गड्ढों और कीचड़ में तब्दील करने वाली केके स्पन कंपनी लिमिटेड को टर्मिनेट कर दिया गया है। अब टर्मिनेशन के बाद कंपनी को 25 अप्रैल 2022 से लेकर 24 अप्रैल 2024 के बीच में ब्लैक लिस्ट अर्थात काली सूची में सम्मिलित करने की भी तैयारी चल रही है और प्रस्ताव कार्यपालन यंत्री सीवरेज नगर निगम रीवा के द्वारा शासन को भेजा जा चुका है।
एक आरटीआई और भ्रष्टाचार की परतों के खुलने का शुरू हुआ शिलशिला
मामले का खुलासा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा लगाई गई एक आरटीआई के माध्यम से हुआ है जिसमें लोक सूचना अधिकारी नगर पालिक निगम रीवा के द्वारा 13 जून 2022 को 22 पृष्ठ की दी गई जानकारी में केके स्पन कंपनी का टर्मिनेशन आदेश साथ में काली सूची में डालने हेतु कार्यपालन यंत्री सीवरेज नगर पालिक निगम रीवा के द्वारा दिनांक 10 मई 2022 को पत्र क्रमांक 99/नगर पालिक निगम/ 2022 के माध्यम से शासन को भेजा गया प्रस्ताव सम्मिलित है। प्राप्त 22 पन्ने के दस्तावेजों में केके स्पन कंपनी को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के जवाब में उनके द्वारा दिए गए लगभग 15 बिंदु के जवाब के एवज में अधीक्षण यंत्री नगरीय प्रशासन और विकास निदेशालय भोपाल के द्वारा बिंदुवार दिए गए जवाब में केके स्पन कंपनी के द्वारा लगाए गए समस्त आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें एग्रीमेंट वर्क आर्डर नंबर 45 दिनांक 18/11/2016 के उल्लंघन का दोषी पाया गया है और दिनांक 31/07/2021 के कारण बताओ नोटिस एवं केके स्पन कंपनी के द्वारा उस कारण बताओ नोटिस का दिनांक 10/08/2021 को प्रस्तुत जवाब का अवलोकन और विश्लेषण करने के बाद केके स्पन कंपनी को रीवा जिले में सीवर लाइन बिछाने के लगभग 214 करोड रुपए के एग्रीमेंट से टर्मिनेट कर दिया गया है।
कम्पनी की 32 करोड़ की बैंक गारंटी राजसात करने के विरुद्ध हाई कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
टर्मिनेट करने के बाद आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के बाद यह पता चला कि केके स्पन कंपनी के द्वारा रिट पिटिशन नंबर 10843/2022 दायर कर केके स्पन कंपनी के द्वारा 32 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी को राजसात किए जाने के विरुद्ध नगर निगम और मध्यप्रदेश शासन को पार्टी बनाकर हाई कोर्ट जबलपुर में उक्त पिटीशन दायर की गई थी। जिसमें शासन के द्वारा 24 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी पहले ही राजसात कर ली गई थी और शेष 7 करोड़ की बैंक गारंटी राशि राजसात करने के विरोध में हाई कोर्ट में पिटीशन दायर करने पर हाई कोर्ट जबलपुर की डबल बेंच जिसमें चीफ जस्टिस रवी मलिमथ एवं पुरुषेन्द्र कुमार गौरव की युगल पीठ ने पिटीशन को खारिज कर दिया और कहा कि चूंकि 24 करोड़ की बैंक गारंटी की राशि पहले ही राजसात कर ली गई है इसलिए उस पर हस्तक्षेप करने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता और शेष 7 करोड़ की राशि राजसात की जा रही है वह अपीलीय अथॉरिटी के अंतर्गत आती है और अपीलीय अधिकारी जो निर्णय लेगा हाई कोर्ट भी उसे मान्य करेगी इसलिए हस्तक्षेप का कोई सवाल नही होता। इस प्रकार केके स्पन कंपनी को हाईकोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिली है।
इस विषय में सूत्रों के द्वारा बताया गया कि नगरीय प्रशासन के द्वारा मामले की कैविएट भी हाई कोर्ट जबलपुर में लगाई गई थी जिसके कारण केके स्पन कंपनी को कोई राहत नहीं मिली है। तात्पर्य हुआ की अंत में नगरीय प्रशासन के द्वारा पूरा प्लान बना कर नियम कायदों को ताक पर रखने वाली केके स्पन कंपनी की बैंक गारंटी राशि राजसात करने और ब्लैक लिस्ट करने का प्लान बनाया गया था। बात सही भी है क्योंकि जो कार्य 18 नवंबर 2016 को कॉन्ट्रैक्ट के तौर पर केके स्पन कंपनी को रीवा में सीवर लाइन बिछाने के लिए दिया गया था वह 3 वर्ष में पूरा किया जाना था लेकिन इसके बावजूद भी समय पर कार्य न पूरा होने पर नगरीय प्रशासन के द्वारा 3 वर्ष का एक्सटेंशन दिया गया लेकिन 2022 तक पूरे 6 वर्ष में भी कार्य पूरा न हो पाना और मात्र 20 प्रतिशत ही बमुश्किल कार्य पूरा होना कंपनी की क्षमता और प्रतिस्पर्धी स्वरूप पर बहुत बड़ा प्रश्न खड़ा करता है जो कि विस्तृत तौर पर केके स्पन कंपनी को टर्मिनेट करने के पूर्व प्रतिवेदन में नगरीय प्रशासन के द्वारा उल्लेखित किया गया है।
नगर निगम द्वारा केके स्पन कंपनी को 2 वर्ष के लिए काली सूची में डालने का भी प्रस्ताव
कार्यालय नगर पालिक निगम रीवा के द्वारा दिनांक 10 मई 2022 को पत्र क्रमांक 99/नगर पालिक निगम/2022 जारी करते हुए 2 वर्ष के लिए दिनांक 25 अप्रैल 2022 से लेकर 24 अप्रैल 2024 तक काली सूची में डालने हेतु कार्यपालन यंत्री सीवरेज नगर पालिक निगम रीवा के द्वारा नगर निगम आयुक्त के अनुमोदन के बाद प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। काली सूची में डाले जाने के कारणों का विस्तृत विवरण देते हुए बताया गया की अपील सुनवाई प्रक्रिया के सशर्त निराकरण अनुसार 3 माह अर्थात 28 फरवरी 2022 की समय अवधि हेतु बर्खास्तगी आदेश निलंबित था किंतु निराकरण शर्त की पूर्ति न किए जाने पर रेजिडेंट इंजीनियर पीडीएमसी द्वारा सशर्त निराकरण प्रावधान अनुसार सक्षम अधिकारी के अनुमति से निलंबित बर्खास्तगी आदेश को पुनः दिनांक 25 अप्रैल 2022 द्वारा प्रभावसील किया गया। केके स्पन को सूचित करते हुए बताया गया कि उनके द्वारा मध्यप्रदेश कार्य विभाग मैन्युअल एवं नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के प्रावधानों के तहत 2 वर्ष हेतु काली सूची में अंकित किया जाता है। काली सूची में सम्मिलित किए जाने की सूचना पत्र में यह भी लिखा गया कि पंजीयन निलंबन की अवधि में संविदाकार निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रतिबंधित रहेगा एवं इस आदेश के पंजीयन निलंबन आदेश जारी होने के पश्चात निविदा प्रपत्र क्रय करने के लिए प्रतिबंधित रहेगा। यदि पूर्व निविदा प्रपत्र क्रय कर लिया गया है तो इस आदेश के पश्चात वह निविदा भरने के लिए अपात्र रहेगा एवं पूर्व में भरी गई निविदा इस आदेश के पश्चात स्वीकृति होती है तो वह विधि शून्य होगी और यदि अनुबंधकर्ता अथवा उसकी फर्म का कोई भी सदस्य किसी अन्य फर्म की भागीदारी में होगा तो वह फर्म भी नई निविदा प्रक्रिया में भाग लेने और प्रपत्र क्रय करने तथा नया अनुबंध करने के लिए पात्र नहीं होगा एवं उक्त व्यक्ति अथवा फर्म अथवा उसका कोई भी भागीदारी नवीन पंजीयन कराने के लिए अपात्र रहेगा। केके स्पन कंपनी का पंजीयन निलंबित करने के लिए यह प्रस्ताव कार्यपालन यंत्री सीवरेज के द्वारा सक्षम प्राधिकारी की ओर नगर निगम आयुक्त रीवा के अनुमोदन के फलस्वरूप भेज दिया गया।
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी की एक वर्ष पूर्व लगाई गई आरटीआई और शिकायतों के बाद हुई थी कार्यवाही
बता दें कि रीवा नगरीय क्षेत्र की सीवर लाइन परियोजना में लगभग 214 करोड रुपए के इस घोटाले और केके स्पन कंपनी के द्वारा निरंतर की जा रही मनमानी को लेकर इसके पूर्व न तो व्यापक स्तर पर शिकायतें की गई थी और न ही कोई आरटीआई लगाकर जानकारी हासिल करने का प्रयास किया गया था। लेकिन वर्ष 2021 में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा नगर पालिक निगम रीवा में आरटीआई लगाकर केके स्पन कंपनी के विषय में इनके वर्क ऑर्डर, कॉन्ट्रैक्ट, निविदा, आय व्यय का ब्यौरा, आमजन और शहरी लोगों के द्वारा की गई शिकायत में लेबर के अधिकारों के उल्लंघन सहित कई मामलों पर जानकारी चाही गई थी। जानकारी मिलने के बाद जो खुलासा हुआ था उसमें लगभग 55 करोड रुपए का पेमेंट नगर निगम के द्वारा किया जा चुका था जिसमें लगभग 1500 से अधिक शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में कंपनी के क्रियाकलापों के विरुद्ध दर्ज होना बताया गया था जिनका कोई समुचित समाधान जनता के हित में नहीं किया गया था। लेबर डिपार्टमेंट से प्राप्त जानकारी में एक छापे में मजदूरों के अधिकार के उल्लंघन की भी बात सामने आई थी जिसमें कई लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था जिसमें बताया गया था कि मजदूरों को ओवरटाइम काम कराया जा रहा था और उसके मुकाबले उन्हें बहुत कम पेमेंट दी जा रही थी। आरटीआई से प्राप्त जानकारी में पता चला था कि 5 वर्ष में केके स्पन कंपनी के द्वारा मात्र सड़कों की खुदाई, नलों की पाइपलाइन तोड़ना, प्रदूषण फैलाना जैसे जनता को परेशान करने वाले और रीवा को बर्बाद करने वाले कार्य किए गए थे। इस के बाद मामला मीडिया में जोर-शोर से उठा और शिवानंद द्विवेदी के द्वारा मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन नगरीय प्रशासन विभाग प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर विश्व बैंक तक शिकायत की गई जिस पर कार्यवाही का सिलसिला प्रारंभ हुआ तो मुख्यमंत्री ने आनन-फानन में कंपनी को टर्मिनेट कर दिया। लेकिन केके स्पन कंपनी को 3 महीने के लिए अतिरिक्त समय देते हुए प्रोग्रेस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। प्रोग्रेस रिपोर्ट भी प्रस्तुत नहीं की जा सकी तो पुनः केके स्पन कंपनी को टर्मिनेट करते हुए अब 2 साल के लिए काली सूची में डाले जाने की प्रक्रिया की गई है।
जिस कार्य का टेंडर 214 करोड रुपए में 2016 में जारी हुआ क्या अब वह 2022 में कई करोड़ बढ़ेगा नहीं?
अब देखना यह होगा की रीवा जिले में सीवर पाइप लाइन बिछाने के इस कार्य को किस दूसरी कंपनी को दिया जाता है? सवाल यह भी है कि क्या 55 करोड से अधिक का पेमेंट जो केके स्पन कंपनी को कर दिया गया है क्या सरकार उसे भी वापस कर पाएगी? क्योंकि जो राशि बर्बाद कर दी गई और उससे कोई सार्थक काम नहीं हुआ वह राशि भी तो इन कंपनियों से वापस ली जानी चाहिए। सवाल यह भी है कि 2016 में जो टेंडर 214 करोड़ में जारी किया गया था क्या अब वह 2022 में 214 करोड़ में ही जारी होगा अथवा महंगाई के कारण इसमें 100 अथवा 200 करोड़ अतिरिक्त जोड़े जाएंगे? यदि जो कार्य 2016 में 214 करोड़ में होना था यदि वही कार्य 2022 में 300 अथवा 400 करोड़ में होता है तो आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? टेंडर में जो राशि बढ़ेगी वह तो जनता के टैक्स के पैसे से ही वसूली जाएगी? आखिर चाहे वह केके स्पन कंपनी हो अथवा कोई भी कंपनी हो यदि समय सीमा पर कार्य नहीं करती तो संपूर्ण राशि की वसूली उस कंपनी से क्यों न की जाए? आखिर 100 अथवा 200 करोड़ का जो अतिरिक्त चूना शासन को लगने वाला है उसका क्या होगा? यह सारे सवाल पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यवाही पर सवालिया निशान लगाते हैं और यह दर्शाते हैं कि किस प्रकार से इंजीनियर और प्रशासनिक अमला मिलकर इन कंपनी वालों को भरपूर मौका देकर प्रोजेक्ट में देरी करवाता है और फिर वही टेंडर अधिक राशि में जारी करवा कर जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी करता है और लूट मचाता है।
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने गंभीर विषयों पर प्रश्न खड़ा किए हैं और शासन स्तर से हस्तक्षेप किए जा कर संपूर्ण राशि की वसूली ऐसी कंपनियों से किए जाने की मांग की है और साथ में इस पूरे मामले में दोषी अधिकारियों की पेमेंट से भी वसूली की जानी चाहिए ऐसी उनकी मांग है।
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