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गीता,भागवत ,रामायण पढ़ो हर समस्या का मिलता है हल-आरूष जी महाराज

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शहडोल।भागवत पुराण हिन्दुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद्भागवतम् या केवल भागवतम् भी कहते हैं। इसका मुख्य वर्ण्य विषय भक्ति योग है, जिसमें कृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त इस पुराण में रस भाव की भक्ति का निरुपण भी किया गया है। परंपरागत तौर पर इस पुराण के रचयिता वेद व्यास को माना जाता है।श्रीमद्भागवत भारतीय वाङ्मय का मुकुटमणि है। भगवान शुकदेव द्वारा महाराज परीक्षित को सुनाया गया भक्तिमार्ग तो मानो सोपान ही है। इसके प्रत्येक श्लोक में श्रीकृष्ण-प्रेम की सुगन्धि है। इसमें साधन-ज्ञान, सिद्धज्ञान, साधन-भक्ति, सिद्धा-भक्ति, मर्यादा-मार्ग, अनुग्रह-मार्ग, द्वैत, अद्वैत समन्वय के साथ प्रेरणादायी विविध उपाख्यानों का अद्भुत संग्रह है।

पांचवें दिन श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग प्रस्तुत किय

ग्राम खैरहा में जिला पंचायत सदस्य एवं निर्माण समिति के सभापति जगन्नाथ शर्मा के निज निवास में चल रहे संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के पुण्य अवसर पर वृंदावन से पधारे परमपूज्य धर्म गुरु डॉ आरूष महाराज जी ने श्रोताओं को प्रेरणादायी कथा का श्रवण कराते हुये कहा कि धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करे वही आज के समय में धनवान व्यक्ति है। परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम के द्वारा ही संभव हो सकती है। पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि पूतना राक्षसी ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पुतना का वध कर उसका कल्याण किया। माता यशोदा जब भगवान श्री कृष्ण को पूतना के वक्षस्थल से उठाकर लाती है उसके बाद पंचगव्य गाय के गोब, गोमूत्र से भगवान को स्नान कराती है। सभी को गौ माता की सेवा, गायत्री का जाप और गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए। गाय की सेवा से 33 करोड़ देवी देवताओं की सेवा हो जाती है। भगवान व्रजरज का सेवन करके यह दिखला रहे हैं कि जिन भक्तों ने मुझे अपनी सारी भावनाएं व कर्म समर्पित कर रखें हैं वे मेरे कितने प्रिय हैं। भगवान स्वयं अपने भक्तों की चरणरज मुख के द्वारा हृदय में धारण करते हैं।

यशोदा माता ने श्रीकृष्ण से कहा “अच्छा खोल मुख”

पृथ्वी ने गाय का रूप धारण करके श्रीकृष्ण को पुकारा तब श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये हैं। इसलिए वह मिट्टी में नहाते, खेलते और खाते हैं ताकि पृथ्वी का उद्धार कर सकें। गोपबालकों ने जाकर यशोदामाता से शिकायत कर दी–’मां तेरे लाला ने माटी खाई है यशोदामाता हाथ में छड़ी लेकर दौड़ी आयीं। ‘अच्छा खोल मुख।’ माता के ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने अपना मुख खोल दिया। श्रीकृष्ण के मुख खोलते ही यशोदाजी ने देखा कि मुख में चर-अचर सम्पूर्ण जगत विद्यमान है। आकाश, दिशाएं, पहाड़, द्वीप, समुद्रों के सहित सारी पृथ्वी, बहने वाली वायु, वैद्युत, अग्नि, चन्द्रमा और तारों के साथ सम्पूर्णज्योतिर्मण्डल, जल, तेज अर्थात प्रकृति, महतत्त्व, अहंकार, देवगण, इन्द्रियां, मन, बुद्धि, त्रिगुण, जीव, काल, कर्म, प्रारब्ध आदि तत्त्व भी मूर्त दीखने लगे। पूरा त्रिभुवन है, उसमें जम्बूद्वीप है, उसमें भारतवर्ष है, और उसमें यहब्रज, ब्रज में नन्दबाबा का घर, घर में भी यशोदा और वह भी श्री कृष्ण का हाथ पकड़े। बड़ा विस्मय हुआ माता को। श्री कृष्ण ने देखा कि मैया ने तो मेरा असली तत्त्व ही पहचान लिया है। श्री कृष्ण ने सोचा यदि मैया को यह ज्ञान बना रहता है तो हो चुकी बाललीला, फिर तो वह मेरी नारायण के रूप में पूजा करेगी। न तो अपनी गोद में बैठायेगी, न दूध पिलायेगी और न मारेगी। जिस उद्देश्य के लिए मैं बालक बना वह तो पूरा होगा ही नहीं। यशोदा माता तुरन्त उस घटना को भूल गयीं।

हरि नाम श्रीराम से ईश्वर जरूर मिल सकते हैं 

धर्मगुरु डॉक्टर आरूष जी महाराज ने कहा कि  महाराज परीक्षित ने सुखदेव महाराज से प्रश्न करते हुए कहा कि मानव कल्याण का मार्ग क्या है। 4 बार 6 बार स्नान करने से भगवान मिलते हैं या ऊंची जाति में जन्म लेने से भगवान मिलते हैं यह बड़ी-बड़ी दाढ़ी रखने से भगवान मिलते हैं या पीला पीतांबरी पहन ले तो भगवान मिल जाते हैं आखिर ईश्वर का साक्षात्कार कैसे होगा तो सुखदेव जी महाराज ने कहा कि हरि नाम से यह संभव है हरि नाम श्रीराम से ईश्वर जरूर मिल सकते हैं बोलो राधे राधे ईश्वर जाति पाती नहीं देखते हैं शबरी के जूठे बेर खाने भगवान श्री राम चले गए निर्धन कहे धनवान सुखी राजा कहे महाराज सुखी महाराज कहे इंद्र सुखी इंद्र कहे महाराज सुखी महाराज कहे चतुरानन सुखी और चतुरानन कहे ब्रह्मा सुखी ब्रह्मा कहे चतुरानन सुखी तुलसीदास विचार करें हरि भजन बिन जिव दुख हरि कोई तन दुखी कोई मन दुखी कोई धन बिना रहे उदास और थोड़ा-थोड़ा सब सुखी बस हरि का नाम ही सुख का कारण है जिनसे राम का नाम आ गया उनका काम से मोहभंग हो जाता है जहां काम है वहां राम नहीं जहां राम है वहां काम नहीं साबरी की भक्ति भाव प्रतीक्षा तो देखो साहब जो गुरु के आदेश पर हजारों वर्ष तक भगवान श्री राम की प्रतीक्षा करती रही शबरी माता को शत-शत प्रणाम बोलिए राधे राधे ।

गीता,भागवत ,रामायण पढ़ो हर समस्या का मिलता है हल

धर्म गुरु डॉ आरूष महाराज जी ने कहा कि आज कल की युवा पीढ़ी अपने धर्म अपने भगवान को नही मानते है, लेकिन तुम अपने धर्म को जानना चाहते हो तो पहले अपने धर्म को जानने के लिए गीता, भागवत ,रामायण , भागवत पढ़ो और सुनो तो, तुम ही नहीं तुम्हारी आने वाली पीढ़ी भी संस्कारी हो जायेगी।गीता, भागवत ,रामायण पढ़ने से हमारी सभी समस्याओ का हल हमें मिलता है हरि ,राम, नारायण के नाम से ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कथा के बीच में प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे

 कथा में राधे कृष्ण ,बांके बिहारी, राधे राधे भजन पर भक्तों ने खूब आनंद उठाया सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।बतादे कि जिला पंचायत सदस्य जगन्नाथ शर्मा एवं सोहागपुर जनपद सदस्य श्रीमती दीपिका शर्मा द्वारा निज निवास में पूर्वजों के पुण्य प्रताप से संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया है संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा आयोजन में जैतपुर विधानसभा क्षेत्र कि लोकप्रिय विधायक श्रीमती मनीषा सिंह,बुठार नपा अध्यक्ष श्रीमती शालिनी सरावगी, भाजपा जिला महामंत्री दीपक शर्मा, भाजपा वरिष्ठ नेता दौलत मनमानी, भाजपा किसान मोर्चा जिला महामंत्री पंकज सिंह ,खैरहा मंडल अध्यक्ष विपुल सिंह,बुठार मंडल महामंत्री श्रीकृष्ण गुप्ता, धमनी जनपद सदस्य श्रीमती शिल्पी पाण्डेय ,खैरहा मंडल उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता तथा आसपास ग्राम के हजारों की संख्या में महिलाएं, पुरुष एवं छोटे छोटे बच्चे तथा दुर दुर से आऐ श्रद्धालु धर्म प्रेमी संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का पुण्य लाभ इनदिनों अर्जित कर अपना जीवन सौभाग्यमय बना रहे हैं । श्रीमती दीपिका  जगन्नाथ शर्मा ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा महापुराण निज निवास खैरहा जिला शहडोल में पूज्य पिता जी स्व श्री रूद्रसहांय शर्मा जी की पुण्यतिथि के अवसर पर चल रहा है।संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा 7 फरवरी तक चलेगा। प्रेम से बोलिए राधे राधे ।

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