तो कौन है मास्टर माइंड डिप्टी रेंजर,रेंजर,या फिर नायव तहसीलदार…..?

आखिर किसकी शह पर करोड़ों की लकड़ी कटकर पहुंच गई उत्तर प्रदेश….?
तो क्या उत्तर प्रदेश के तस्कर के आगे नतमस्तक हैं वन एवं राजस्व के अधिकारी…?वन एवं राजस्व के अधिकारियों के कॉल डिटेल की हो जांच होगा बड़ा खुलासा…?
अखिलेश कुमार शर्मा मो.नं-7999140850
शहडोल।जयसिंहनगर वन परिक्षेत्र में साल की लकड़ी के तस्करों का जम कर बोल बाला है सूत्रों के मुताबिक विगत 06 माह से वन एवं राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के लकड़ी तस्करों से मिली भगत कर करोड़ों रुपए के इमारती साल की लकड़ी को शासन के आंखो में धूल झोंकते हुए तस्करों के हवाले कर दिया। ग्रामीणों ने मीडिया में नाम प्रकाशित न करने की अपील की और बताया कि संपूर्ण साल की लकड़ी की तस्करी में वन परिक्षेत्र सहायक चितराव एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में तस्करों ने आरी मसीन से राजस्व सीमा के खसरा क्रमांक 232 राजस्व ग्राम रामपुर बिनैका,बड़काडोल बचहा लपरी छपरा एव छत्तीसगढ़ के सीमा से लगे हुए वन एवम् राजस्व भूमि के

सम्पूर्ण बहुमूल्य उपयोगी साल की लकड़ी को बेहद चालाकी से ट्रक के माध्यम से उत्तर प्रदेश के
तस्करों के हवाले कर दिया हालांकि तमाम तस्करी में सहायक परिक्षेत्र अधिकारी के गृह ग्राम समेत क्षेत्र के लगभग 10 से अधिक तस्कर सक्रिय है उक्त तस्करी में वन परिक्षेत्र से सटे हुए ग्राम दरौंडी का जेसीबी संचालक भी संलिप्त बताया जा रहा है ।अब देखना होगा की जांच के दायरे में कौन कौन से अधिकारी आते हैं एव उन पर क्या कार्यवाही होती है
प्रारंभ साल की लकड़ी की अवैध कटाई
ऊँचेहरा से लगभग 6 माह पूर्व हुई जिसमें वहां की तत्कानीन पटवारी एवं चितरांव सर्किल के परिक्षेत्र सहायक कृष्णकान्त गौतम जो लगभग चार वर्षों से सर्वाधिक समय से वहीं पद्स्त है जो हमेशा रेत उत्खनन तथा वन कटाई में विवादित रहे उनके इन्ही कारनामों के चलते इनाम स्वरूप उन्हें अतिरिक्त प्रभार सर्किल अमझोर का लगभग चार माह पहले तथा पुनः बांसा सर्किल का प्रभार नवंबर में दिया गया।

मुख्य बात यह है, कि
अमझौर रेंज के अन्तर्गत इन तीनों सर्विलो में ही सबसे अधिक साल वृक्षों को कटाई उक्त परिक्षेत्र सहायक के संरक्षण में इन्हीं के सर्किल में वन से क्षेत्रों तथा वन से सटे राजस्व भूमि एवंआदिवासियों के पट्टों की जमीन से अवैध रूप से हुई है, वन अधिकारी के चहते होने के कारण आज तक इन्हें हटाया गया, नतो इनपर कोई कार्यवाही की गयी, बल्कि अवैध कटाई पर पर्दा डालते हुए वन अधिकारी राजस्व विभाग को दोषी बना रहे, जबकि बिना मार्किंग , बिना अनुमति, बिना परिवहन पास के वन विभाग के डीपो जाने के बजाय उत्तर प्रदेश लकड़ी भेजी गई।
सुत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार अगर अधिकारी एवं कर्मचारीयों के सरकारी एवं प्राइवेट मोबाइल नंबरों की जांच कि जाय तो इनका भ्रष्टाचार दुध का दुध पानी का पानी हो जाएगा और मोबाइल डिटेल से सब सामने आ सकता है वहीं सुत्रो से मिली जानकारी की माने तो वन विभाग के गोहपारू वैरियर के स्थाई कर्मचारी के रूप में पदस्य कर्मचारी भागवत सोनी जो शासकीय भूमि पर मकान बना कर पेट्रोल पंप के सामने निवास रत है एवं उनके बीटगार्ड सीधी मे पदस्त भाई के सहयोग से चाक घाट तक ट्रक पहुंचाए जाते थे, अबतक लगभग 50 ट्रक से ऊपर लकड़ी उत्तरप्रदेश जा चुकी। नगरपंचायत के चुना के समय जब सभी वनरक्षको की ड्यूटी चुनाव में लगी तो उसी रात ऊँचेहरा, रामपुर से जेसीबी से ट्रको में अब साल की लकड़ी स्वयं कृष्णकांत गौतम परिक्षेत्र सहायक द्वारा खड़े होकर ट्रकों में लोड करवाया गया था, उसके बाद तो साल वृक्षों की अवैध कटाई की बाढ सी आ गयी रामपुर वीट, राजस्व, नौढिया, डोंगर सरवर ,बड़काडोल ,मे राजस्व एवं पट्ट की भूमि तथा बचहा में कक्ष क्रमांक 463 में वन क्षेत्र में वन में व्यापक पैमाने पर कटाई कराई गई वहीं पुरे मामले की जानकारी डीएफओ को थी वहीं पुरे मामले को दबाने का प्रयास किया जारहा है ।


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