कोतवाली पुलिस के अथक प्रयासों के फलस्वरूप 01 साल से गुम नाबालिग बालिका को किया गया दस्तयाब

• मानसिक रूप से कमजोर थी 14 वर्षीय बालिका
• संबलपुर, उड़ीसा से किया गया दस्तयाब
अखिलेश कुमार शर्मा मोबाइल नंबर 7999140850
शहडोल।विगत दिवस कोतवाली थाना क्षेत्रांतर्गत 14 वर्षीय गुम नाबालिग बालिका के प्रकरण में कोतवाली पुलिस टीम को 01 वर्ष के लंबे अवधि के सतत् प्रयासों के बाद बालिका को दस्तयाब करने में सफलता प्राप्त हुई है। यह लक्ष्य कोतवाली पुलिस टीम के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि प्रकरण की नाबालिग बालिका मानसिक रूप से कमजोर थी जिससे परिजन भी बालिका को पुनः प्राप्त करने की उम्मीद भी लगभग खो चुके थे। परंतु पुलिस अधीक्षक शहडोल श्री कुमार प्रतीक की संवेदनशीलता के चलते उनके कुशल मागदर्शन में कोतवाली पुलिस ने बालिका को ढूंढ़कर कर पुनः परिजनों से मिलवाया है।
घटनाक्रम इस प्रकार है कि दिनांक 26.04.2022 को एक महिला द्वारा थाना कोतवाली में उपस्थित आकर रिपोर्ट लेख कराई कि उसकी उम्र 14 वर्षीय नातिन दिनांक 22.04.2022 को बिना किसी को बताये कहीं चली गई है जिसकी आस-पास रिश्तेदारी मे पता तलाश किये किन्तु पता नहीं चला है। फरियादिया की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली मे अप.क्र. 325 / 22 धारा 363 ताहि पंजीबध्द कर विवेचना में लिया गया ।
पुलिस द्वारा अपहरण का प्रकरण पंजीबद्ध कर पता- तलाश प्रारंभ की गई। सभी थाना / चौकी प्रभारियों के लिए बालिका के हूलिया के संबंध में जानकारी देने हेतु वितन्तु संदेश प्रसारित किया गया। विवेचना के दौरान प्रकरण की फरियादिया व साक्षीगण से पूछताछ की गई। फरियादिया के निशादेही पर घटना स्थल का नक्शा तैयार किया गया व आस-पास के दुकानों में लगे सीसीटीव्ही कैमरे का अवलोकन किया गया किन्तु अपहृता बालिका के संबंध में कोई सुराग नहीं मिला। सूचनाकर्ता द्वारा व्यक्त किये गए संदेह के आधार पर संदेहियों से गहरी पूछताछ की गई। पुलिस अधीक्षक शहडोल श्री कुमार प्रतीक ने केस डायरी का अवलोकन किया गया। प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए अति. पुलिस अधीक्षक, शहडोल के पर्यवेक्षण में उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय ) श्री राघवेन्द्र द्विवेदी के नेतृत्व में 07 सदस्यीय विशेष अनुसंधान दल का गठन किया गया एवं बालिका की त्वरित दस्तयाबी हेतु विस्तृत निर्देश जारी किये गए। नाबालिग बालिका की दस्तयाबी एवं आरोपी की पता- तलाश हेतु पुलिस अधीक्षक शहडोल श्री कुमार प्रतीक द्वारा 10,000/- रूपये की ईनाम उद्घोषणा जारी की गई । तदोपरांत पुलिस अधीक्षक की अनुशंसा पर अति. पुलिस महानिदेशक शहडोल जोन श्री डी. सी. सागर द्वारा ईनाम की राशि बढ़ाकर 30,000 रूपये कर दी गई ।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में विशेष अनुसंधान दल द्वारा संभावित सीमावर्ती जिलों के सार्वजनिक स्थानों सभी स्थानों जैसे रेल्वे स्टेशन, बस स्टैंड, होटल लॉज, घूमने-फिरने के स्थानों, रिश्तेदारों के घर में अपहृता की पता-तलाश की गई। सायबर सेल की सहायता से अपहृता के गुमशुदगी दिनांक से लेकर अब तक विभिन्न मोबाईल नंबरों की जानकारी प्राप्त कर पता तलाश का प्रयास किया गया। अपहृत बालिका के परिजनों से लगातार संपर्क कर तथा बालिका के पढ़ने-लिखने की पुस्तकों-कॉपी में लिखे नंबरों की जानकारी प्राप्त कर उसके संबंध में पता किया गया। पुलिस द्वारा बालिका के पिता एवं नानिहाल पक्ष का संपूर्ण कुटुम्ब के सभी सदस्यों की जानकारी प्राप्त की गई। घटना दिनांक के पूर्व बालिका जिस-जिस जगह पर आती-जाती, बैठती उठती थी, उन सभी जगहों पर जाकर पुलिस ने पूछताछ की। बालिका की पता- तलाश के संबंध में पड़ोसी जिलों के वन स्टॉप सेंटर व बाल कल्याण समिति को बालिका की फोटो सहित पत्र प्रेषित किया गया। गौरतलब है कि इस दौरान पुलिस द्वारा विभिन्न स्थानों के लगभग 200 से अधिक सीसीटीव्ही कैमरों के फूटेज खंगाले गए। अपहृत बालिका की सूचना देने हेतु इश्तहार एवं गजट का प्रकाशन समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में कराया गया। साथ ही शहडोंल एवं निकटवर्ती जिलों के सार्वजनिक स्थानों जैसे बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन, धर्मशाला, अनाथालय, मुख्य चौराहों, दुकानों, स्कूल-कॉलेजों में लगभग 1000 से अधिक रंगीन पम्पलेट चस्पा किये गए।

ऐसी स्थिति में जबकि 10 माह से ऊपर का लंबा समय व्यतीत हो जाने के बाद बालिका के परिजन बालिका को पुनः प्राप्त करने की उम्मीद लगभग समाप्त मान रहे थे। लेकिन संवेदनशील पुलिस अधीक्षक शहडोल श्री कुमार प्रतीक द्वारा लगातार बालिका को तलाश करने के संबंध में निर्देश दिये जा रहे थे और उसका फॉलोअप लिया जा रहा था। पुलिस अधीक्षक शहडोल द्वारा महिला संबंधी अपराधों की समीक्षा के दौरान मध्यप्रदेश शासन की मंशानुसार अनुसंधानकर्ता एवं थाना प्रभारी कोतवाली को लगातार अनुसंधान दल द्वारा की जारी विवेचना की प्रगति से नियमित अंतराल में “ अधिकार पत्र” के माध्यम से अपहृता के परिजनों को अवगत कराने हेतु निर्देशित किया गया था जो कोतवाली पुलिस द्वारा लगातार परिजनों को अधिकार पत्र प्रदाय किया गया ।
पुलिस द्वारा बालिका की पता- तलाश हेतु किये जा रहे लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप जानकारी प्राप्त हुई कि बालिका घटना दिनांक को शहडोल रेल्वे स्टेशन से ट्रेन के माध्यम से संबलपुर, उड़ीसा चली गई थी जिसे रेल्वे स्टेशन से स्थानीय पुलिस द्वारा बाल कल्याण समिति संबलपुर, उड़ीसा के सुपुर्द किया गया था। बालिका अपना नाम-पता सही से नहीं बता पा रही थी जिससे बाल कल्याण समिति, संबलपुर द्वारा बालिका के परिजनों को सूचित नहीं किया जा सका। शहडोल पुलिस द्वारा बालिका की पतासाजी के लिए रेल्वे स्टेशन व बस स्टैण्ड, ट्रेनों-बसों में पम्पलेट इश्तहार लगाये थे। ऐसी ही एक ट्रेन में जिसमें शहडोल पुलिस द्वारा पम्पलेट / इश्तहार लगाया गया था उसको देखकर बाल कल्याण समिति, संबलपुर को जानकारी प्राप्त हुई तो उनके द्वारा पुलिस थाना कोतवाली व बाल कल्याण समिति, शहडोल में संपर्क किया गया जिस पर थाना कोतवाली द्वारा बालिका की पहचान वीडियो कॉलिंग के माध्यम से उनके परिवारजनों से कराई गई । अंततः पुलिस अधीक्षक शहडोल के निर्देशन में कोतवाली पुलिस की एक टीम संबलपुर, उड़ीसा रवाना की गई जहाँ से बालिका को दस्तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया गया ।
उक्त संपूर्ण कार्यवाही में विवेचनाकर्ता उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) श्री राघवेन्द्र द्विवेदी, थाना प्रभारी कोतवाली श्री योगेन्द्र सिंह परिहार, उनि उपेन्द्र त्रिपाठी, सउनि रजनीश तिवारी, राकेश बागरी, कामता पयासी, प्र.आर. दिनेश केवट, प्रदीप द्विवेदी, मृगेन्द्र सिंह, सोनी नामदेव व थाना कोतवाली पुलिस स्टाफ की भूमिका सराहनीय रही।

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