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चंबल रेत अवैध उत्खनन पर पुलिस व खनिज विभाग सहित वन विभाग की मौन सहमति। बदल रहा नदी का स्वरूप, खतरें में घड़ियालों की जिंदगी।

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मुरैना से आशीष सिंह तोमर की खबर

मुरैना।अंबाह ,चंबल नदी से रेत उत्खनन रूकने का नाम ही नहीं ले रहा है
अंबाह नगर के नजदीक के नदी के किनारे से जुड़े गांव से रेत माफिया रेत का खनन कर रेत शहर तक पहुंचा रहे है शहर में अवैध रेत की ट्रॉली सुबह से देर रात तक शहर के विभिन्न मार्गो से रेत का परिवहन कर रहे है स्थानीय पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारियों के साठगांठ के कारण अंबाह शहर और नजदीक के गांव में रेत माफिया को पुलिस का भय न होने से रेत माफिया के हौसले बुलंद है।
रेत माफिया रेत के साथ शहर और गांव में नियमों को ठेंगा दिखाते हुए ट्रेक्टर पर लगे म्यूजिक सिस्टम से तेज आवाज में गाना बजा कर निकलते है जिसके चलते ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ रहा है सांथ ही स्कूलों की परिक्षाएं भी नजदीक है इस वातावरण से छात्र छात्राओं के अध्ययन में भी बाधा उत्पन्न हो रही है आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वन विभाग टीम कार्रवाई नहीं करती अपने ऑफिस से बाहर ही नहीं निकलते हैं करवाई क्या करेंगे ? जब उनकी ऑफिस के सामने से ही अवैध कटे हुए हरे-भरे लकड़ी से लदे ट्रेक्टर निकलते उन पर कार्रवाई नहीं कर पा रहे वन भूमि से हो रहें अवैध रेत परिवहन पर कार्यवाही करनें नदी पर क्या जाएंगे.? सम्बंधित विभागों की मिलीभगत से चंबल नदी के स्वरूप व पर्यावरण को बर्बाद किया जा रहा है चंबल नदी में रहने वाले जीव जंतु उनको जान को कितना खतरा है। हमें ज्ञात होना चाहिए की पारिस्थितिक तंत्र को बचाए रखनें इस विषय में सरकार द्वारा बार-बार घड़ियाल छोड़े जा रहे हैं और जो घड़ियाल मर रहे हैं उसका कारण अवैध रेत माफिया, वन विभाग ,पुलिस विभाग, खनिज विभाग, पर्यावरण विभाग के कर्मचारी ही हो सकते हैं.? मिलीभगत का आलम एसा है की पुलिस की एक गाड़ी अवैध उत्खनन स्थल पर जाकर पहले से ही खड़ी हो जाती है जब अवैध रेत ट्रैक्टर व डग्गियों में लोड हो जाती है तब वहां से बिना कार्यवाही किए रवाना हो जाती है । अगर पुलिस विभाग के आला अधिकारी गहनता से पुलिस प्वाइंट की जांच करें तो अवैध उत्खनन में सहयोग करनें वाले कर्मचारियों के नाम सामने आ सकतें हैं ओर अवैध उत्खनन सहित पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है। देखना यह है की खबर प्रकाशन के बाद स्थानीय प्रशासन क्या करता है..? अवैध कार्यों में लिप्त कर्मचारीयों पर क्या कार्यवाही करता है.? या अपना सिस्टम फिट कर लेता है.?

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