सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सुखपुरा एक लाख की आबादी के लिए होगा संजीवनी, लेकिन अब तक अस्पताल में पानी बिजली और सीवेज की कोई सुविधा नहीं

प्रदीप बच्चन (ब्यूरो चीफ बलिया यूपी)
बलिया(यूपी) के सुखपुरा कस्बे में 3.36 करोड़ की लागत से सीएचसी की निर्माण इसलिए किया गया था कि आसपास की लगभग एक लाख की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। सीएचसी को 2017-18 में कार्यदायी संस्था ने स्वास्थ्य विभाग के सुपुर्द कर दिया था। पिछले दिनों प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने शिकंजा कसा तो विभाग ने बताया कि यहां बिजली-पानी की सुविधा नहीं है। सीवेज की भी समस्या है। खिड़की-दरवाजे क्षतिग्रस्त होने के साथ ही कई अन्य समस्याएं हो गई है। लिहाजा 56 लाख की इस्टीमेट बनाकर शासन को भेज दिया गया। सीएमओ के अनुसार अब धनराशि मिलने के बाद ही सीएचसी का संचालन शुरू होगा।तहसील पत्रकार डॉ० सैयद सेराज अहमद ने जानकारी देते हुए हमारे वरिष्ठ संवाददाता -प्रदीप बच्चन को बताया कि
3.36 करोड़ की लागत से सुखपुरा कस्बे में बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चालू होने से पहले ही खुद बीमार पड़ गया है। बनने के बाद पहले अस्पताल को कोरोना काल में अस्थायी जेल बना दिया गया। कोरोना खत्म होने के बाद काफी हो हल्ला हुआ तो यहां से अस्थाई जेल हटाई गई। बाद में इसके पीपीपी माडल पर संचालन की बात कही जाने लगी, वो भी मामला ठप हुआ था तो शासन से उपकरणों की खरीद के लिए धनराशि जारी हो गई। एक बार फिर लगा की सीएचसी चालू होगी। कस्बा और आसपास की एक लाख की आबादी को आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। इससे आसपास के सभी गांवों के लोग खुश थे, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
मंत्री के आदेशों का भी असर नहीं
सुखपुरा। मंत्री, विधायक के प्रयास पर भी यहां के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ठेंगा दिखा रहे हैं। एक सप्ताह पूर्व मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी के साथ अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। कड़ी फटकार भी लगाई थी। सीएमओ ने मंत्री को आश्वासन दिया था कि अस्पताल चालू कर दिया जाएगा। इसके बाद अस्पताल की इमारत की जांच कराई गई तो पता चला कि बिजली, पानी, सीवेज की असुविधा है। खिड़की-दरवाजे भी टूट चुके हैं, अन्य कई समस्याएं हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के जेई की ओर से 56 लाख का प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है। अब सीएमओ धनराशि स्वीकृत होने और काम होने के बाद ही सीएचसी के संचालन की बात कह रहे हैं।
शिकायत हुई तो पहुंचे एक चिकित्सक
अस्पताल नहीं आते चिकित्सक मंत्री के निरीक्षण में पता चला था कि यहां दो चिकित्सक डाॅ. शैलेश व एसीएमओ डाॅ. योगेन्द्र प्रसाद की भी तैनाती है, लेकिन वह अस्पताल में नहीं आते हैं। सीएमओ ने दोनों चिकित्सकों को नोटिस जारी करने की बात कही थी। इसके बाद दो दिनों से डाॅ. शैलेश आ रहे हैं, लेकिन लेकिन सीएचसी नी जगह न्यू पीएचसी पर ही बैठ रहे हैं।
पीएचसी बेरुआरबारी पर दिखाया जाता है संचालन
सुखपुरा सीएचसी की इमारत और अस्पताल परिसर नशेड़ी व जुआरियों का अड्डा बन चुका है। यहां दोपहर दो बजे के बाद कोई नहीं मिलता। सिर्फ अराजक तत्व नजर आते हैं। कागजों में सीएमओ की ओर से कोई आदेश जारी किया जाता है तो लिखा जाता कि सुखपुरा सीएचसी एट बेरुआरबारी। बेरुआरबारी की आबादी भी इसके आधी है। इसके बाद भी बेरुआरबारी पीएचसी पर यहां से ज्यादा चिकित्सकों और स्टाफ की तैनाती है। यहां करोड़ों से बनी इमारत को जहां खंडहर किया जा रहा है, वहीं एक लाख की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा से वंचित रखा जा रहा है। मजबूर होकर यहां के लोगों को नीम-हकीमों या फिर जिला अस्पताल की शरण लेनी होती है। इसके साथ बनी बसन्तपुर के सीएचसी का संचालन कभी का शुरू हो गया है।
सुखपुरा सीएचसी का संचालन शुरू करने में कई परेशानियां हैं। उसे दूर करने के लिए 56 लाख का प्रस्ताव बनाया गया है। धनराशि मिलने और काम कराने के बाद ही सीएचसी का संचालन शुरू हो सकता है।
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