10 भ्रष्ट अफसरों की संपत्ति राजसात करने की प्रक्रिया अटकी

(विचार एक प्रयास)
इंदौर/भोपाल। काली कमाई से करोड़ों की चल-अचल संपत्ति बनाने वाले 10 भ्रष्ट अफसरों की संपत्ति राजसात करने की प्रक्रिया सिर्फ इसलिए शुरू नहीं हो पा रही है, क्योंकि जिस विशेष अभियोजक का नियुक्ति पत्र जारी हुआ उसमें एक लाइन की गलती है। नियुक्ति पत्र में सुधार नहीं हो पाने से जिला एवं सत्र न्यायालय में संपत्ति राजसात करने के 4 मामले लंबित हैं। लोकायुक्त पुलिस ने छह अन्य प्रकरण तैयार कर रखे हैं।
दरअसल विधि एवं विधायी विभाग ने संपत्ति राजसात करने के मामलों का ट्रायल चलाने के लिए एक वकील की नियुक्ति कर दी है, लेकिन विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त संगठन) एक्ट 2011 के तहत संपत्ति राजसात करने की धारा का उल्लेख नहीं किया। संबंधित वकील की रैंक पर भी सवाल है। लोकायुक्त डीजी ने विधि विभाग को पत्र भी लिखा, लेकिन सुधार नहीं हो पा रहा है।
*इन अफसरों के मामले अटके*
आबकारी अफसर पराक्रम सिंह चंद्रावत, पूर्व जेल अधीक्षक पुरुषोत्तम सोमकुंवर की संपत्ति राजसात करने का प्रकरण पेश हो चुका है। उनके अलावा फूड इंस्पेक्टर अश्विन नायक, बीएस जामोद, लोक निर्माण विभाग का करोड़ पति टाइम कीपर गुरुपालसिंह शामिल हैं, जिनकी संपत्ति राजसात करने के प्रकरण पेश किए जाना बाकी है। इनके यहां छापे में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ था।
*रिश्तेदारों के आयकर रिटर्न से और उलझे*
छापे के बाद भ्रष्ट अफसरों ने लोकायुक्त के समक्ष लिखित सफाई में किसी ने संपत्ति साले, साली, सास, ससुर की बताई तो किसी ने पत्नी को बिजनेस वुमन बताते हुए संपत्ति उसकी होना बताया। लोकायुक्त ने रिश्तेदारों के आयकर रिटर्न चेक किए तो पता चला आय का कोई ठोस साधन ही नहीं है। बैंक में भी फर्म के नाम से खाता या जमा किए गए रुपयों का हिसाब नहीं मिला। सूत्रों की जानकारी अनुसार एक जिले के आबकारी मुखिया के मामले में भी रिश्तेदारों के नाम पर काली कमाई को प्रॉपर्टी में लगाने की जानकारी लोकायुक्त तक पहुंच रही है ज्ञात हो कि उक्त अफसर महत्वपूर्ण डिस्टलरी वाले जिले में पदस्थ नहीं है।

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