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तो क्या फर्जी बिल लगाकर निकाल रहे सरपंच सचिव रुपया ना मसिक बैठक ना पंच, उपसरपंच को कोई जानकारी

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अजब गजब का भ्रष्टाचार हर बिल में मुरुम का रेट अलग, पंचायत खाते से आहरण कराया सरपंच-सचिव ने रुपए

 अखिलेश कुमार शर्मा मोबाइल नंबर 7999140850

शहडोल। अगर देखा जाए तो आदिवासी बहुल आंचल शहडोल जिले के ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार तो चल ही रहा है पर जिले का एक ऐसा ग्राम पंचायत जहां भ्रष्टाचार का तांडव मचा है जिले के जनपद पंचायतों में भ्रष्टाचार में अव्वल रहने वाला जनपद पंचायत गोहपारू हमेशा सुर्खियों में रहने के बावजूद भी जिले में बैठे अधिकारी जनपद पंचायत गोहपारू अंतर्गत ग्राम पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार की ओर आखिर क्यों नहीं देखते सबसे बड़ा सवाल बना पंचायत में लाखों का भ्रष्टाचार हो रहा है ग्रामीण शिकायत भी करते हैं पर कार्यवाही शून्य आखिर क्यों क्या जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा ग्रामीण एवं उप सरपंच की शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही आखिर क्यों नहीं हो रही आखिर क्या राज है साहब। वहीं जब भी अधिकारियों से कार्यवाही के संबंध में चर्चा की जाए तो अधिकारियों का एक ही जवाब होता है हम कार्यवाही करेंगे अभी जांच चल रही है।

पंचायती राज अधिनियम की उड़ रही धज्जियां

संविधान में ग्रामीण अंचलों के विकास एवं बिगड़ी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पंचायत राज अधिनियम का गठन किया गया जिसमें साल में 3 से 4 बार ग्राम सभा का आयोजन एवं महीने में मासिक बैठक का प्रावधान बनाया गया बता दे की ग्राम पंचायत की ग्राम सभा में जनप्रतिनिधि पंच सरपंच उप सरपंच एवं सचिव मुख्य रूप से उपस्थित होते हैं साथ ही ग्राम पंचायत के ग्रामीण भी ग्राम सभा का एक में हिस्सा होते हैं और सभी लोग मिलकर ग्राम पंचायत के विकास की योजनाएं बनाते हैं और अपनी सहमति देते हैं वहीं बता दें कि ग्राम पंचायत में जो विकास कार्य हो रहे हैं जो निर्माण कार्य हो रहे हैं उनमें लगने वाले बिलों की पारदर्शिता के लिए मासिक बैठक का आयोजन भी किया जाता है ताकि ग्राम पंचायत की राशि में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार ना हो सके जिसमें मुख्य रूप से ग्राम पंचायत सरपंच पंच उपसरपंच एवं ग्राम पंचायत के सचिव उपस्थित रहते हैं और निर्माण कार्यों में जो हुआ है उनके लिए जो बिल लगाया गया है उन बिलों की जांच पड़ताल की जाती है कि बिल सही है या फर्जी है और जब जनप्रतिनिधियों की सभी की सामूहिक सहमति होती है तब सरपंच और सचिव के द्वारा निर्माण कार्य के उन बिलों का भुगतान पंचायत राशि से कराया जाता है जो त्रिस्तरी पंचायत राज अधिनियम में स्पष्ट रूप से लिखा है पर पंचायत राज अधिनियम की धज्जियां उड़ाने में इन दोनों ग्राम पंचायत खन्नौधी के सरपंच पति एवं सचिव के द्वारा अवैध रूप से फर्जी बिल लगाकर बिल का आहरण किया जा रहा है अगर बारीकी से जांच की जाए तो बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि बहती गंगा में तो सब हाथ धोते हैं और भ्रष्टाचार की गंगा में डुबकी लगाकर अपने पाप अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक धोते हैं और अपने आपको साफ सुथरा बताते हैं।

एक ट्राली मुरुम के तीन रेट तीनों के बिल पास

 कहते हैं कि जिस पर ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव मेहरबान हो जाएं तो उसके बारे न्यारे होने शुरू हो जाते हैं यही आलम ग्राम पंचायत खन्नौधी का है जहां ग्राम पंचायत में दो मटेरियल सप्लायरों से मुरुम की खरीदी की पर सोचने और समझने की बात यह है कि एक मटेरियल सप्लायर सुनिल कुमार तिवारी जो मुरूम 350 रुपए प्रति ट्राली के रेट से ग्राम पंचायत को देता है और बिल भी देता है जिसे ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव ने पास कर दिया 350 रू प्रति परिवाहन सहित के हिसाब से 52.65 क्युविक घन मीटर का कुल राशि 184 27 .50 बिना जिएसटी के बिल लगा कर रुपए 18427.50 का भुगतान मटेरियल सप्लायर सुनिल कुमार तिवारी ने प्राप्त कर लिया।पर सबसे बड़ा सवाल अभी खड़ा है साहब सरपंच सचिव के भ्रष्टाचार को जरा गौर से समझिए वही डीएस इंडस्ट्रीज के संचालक ऋशभ सिंह ने 600रू प्रति ट्राली परिवाहन सहित के हिसाब से 60ट्राली का कुल राशि 36000 बिना जिएसटी के बिल लगा कर रुपए 36000 का भुगतान प्राप्त कर लिया वहीं डीएस इंडस्ट्रीज के संचालक ऋशभ सिंह ने दुसरा बिल 1000रू प्रति ट्राली परिवाहन के हिसाब से 22 ट्राली कुल राशि 22000बिना जिएसटी के बिल लगा कर रुपए 22000 का भुगतान डीएस इंडस्ट्रीज के संचालक ऋशभ सिंह प्राप्त कर लिया  जो जांच का विषय है पर अपने सुना होगा कि  ”बाप बढ़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया” कि तर्ज पर चल रहा ग्राम पंचायत खन्नौधी मैं हर काम का कमीशन दो और जमकर भ्रष्टाचार करो और सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस तरह ग्राम पंचायत के संबंधित कर्मचारियों के भ्रष्टाचार के कारण ग्राम पंचायत के विकास में ग्रहण लगता जा रहा है और सरकार की मनसा पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा पीसीसी रोड

खन्नौधी ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर 7 में पीसीसी रोड बनाया गया है ।पीसीसी सड़क निर्माण कार्य अंजुम के घर से गोविन्द कचेर के घर तक दूरी 465 मीटर कुल लागत लगभग 13 लाख 98 हजार है निर्मला भी निर्माणधीन पीसीसी रोड को अगर देखा जाए तो उसकी गुणवत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है बता दें कि सबसे खराब सीमेंट का उपयोग साथ में मिट्टी युक्त रेत का इस्तेमाल किया जा रहा है वहीं उपसरपंच राजेश तिवारी ने बताया कि हमारे खन्नौधी ग्राम पंचायत में सरपंच पति भूरा बैगा दबंग प्रभारी सचिव प्यारेलाल सिंह एवं एक तथाकथित दलाल के द्वारा पूर्व से प्रस्तावित वार्ड नंबर 9 में पीसीसी रोड स्वीकृत था जिसमें इन लोगों द्वारा दिन को छोड़ रात में काम लगाकर फ्यूरिल मशीन के माध्यम से काम किया जा रहा था जो गुणवत्ता विहीन था जिसका विरोध मोहल्ले के लोगों ने जताया उनकी ना सुनने पर उन्होंने मुझे फोन से शिकायत की शिकायत के आधार पर मैं मौके पर गया जहां पूर्णतः गलत तरीके से चोरी छुपे काम किया जा रहा था जिस पर समझाइश देते हुए गुणवत्ता के साथ और सही काम किए जाने की बात रखने पर सरपंच पति भुरा बैगा एवं उसका छोटा भाई शराब की नशे में धुत दबंगई दिखाते हुए हम जैसा चाहेंगे वैसा करेंगे जिसको जो करना हो कर ले परिस्थितियों को भांपते हुए मैं गोहपारू सीईओ जनपद को कई बार एवं एसडीओ गोहपारू तथा उप यंत्री पवन बर्मन को भी कई बार फोन लगाया लेकिन किसी ने फोन रिसीव नहीं किया ग्रामीणों की सूचना से मौके में देखने से रात में अचानक काम लगाकर घटिया सीसी रोड का निर्माण किया जा रहा था फ्यूरील मशीन का उपयोग करते हुए दो प्रकार के सस्ते सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा था उस पर भी कम मात्रा में सीमेंट डाला जा रहा था एवं घटिया मिट्टी वाला रेता का इस्तेमाल किया जा रहा था जिसमें सुधार के लिए बात रखने पर अभद्रता पर उतारू थे।

एक छूट भैया नेता की संक्षिप्त कहानी

ग्राम पंचायत खन्नौधी के एक छूट भैया नेता की कहानी है जो आज अपने आप को बहुत बड़ा सफेद पोस नेता समझता है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह छुट भैया सडक छाप नेता कभी समोसा चाय बेचकर कब प्लेट धोकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था फिर अचानक से रुपए की बरसात हो गई और आज कप प्लेट धोना छोड़कर ब्याज में रुपया बांटना शुरू कर दिया और कई भ्रष्टाचार में आंतरिक रूप से सनलिप्त भी है पर शायद यह भूल गया कि तीसरी आंख इसे देख लिया संविधान ने इसीलिए चौथा स्तंभ बनाए जब तीनों स्तंभ काम ना करें तो चौथा स्तंभ अपना काम करना शुरू कर देता है।कुछ दो कौड़ी के छोटे भैया नेता जो कभी कप प्लेट भी धोया करते थे अपने इतिहास को भूल गए और राजनीति का चोला ओढ़ कर पंचायत में जमकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं और यह सोचते हैं कि हमें कोई नहीं देख रहा है पर संविधान का चौथे स्तंभ की तीसरी आंख ने इन्हें अच्छे से देख लिया।इस छूट भैया नेता की पूरी कहानी बहुत जल्द आप सभी पाठकों को पढ़ने को मिलेगी खैर बात ग्राम पंचायत खन्नौधी के भ्रष्टाचार की है तो आप आगे और भी भ्रष्टाचार को पढेंगे तथा भुक्तन  हो गये बिलों की होगी पड़ताल कि कैसे बिलों में सरपंच पति और सचिव ने किया भ्रष्टाचार, कैसे ग्राम पंचायत की राशि का दुरुपयोग कर रहे हैं।

पढ़ते रहिए ग्राम पंचायत खन्नौधी मे हो रहे भ्रष्टाचार की अगली कहानी अगले अंक में…..

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