ग्राम भगत का पुरा (खुर्द) में 25 वर्षों से सड़क की बाट जोह रहे ग्रामीण, अब आंदोलन की चेतावनी

पोरसा– ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला छोटा सा गांव भगत का पुरा (खुर्द) बीते 25 वर्षों से पक्की सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है। गांव को जोड़ने वाला एकमात्र कच्चा रास्ता हर साल बरसात में कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे यहां के निवासी रोजमर्रा की जिंदगी में भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते, महिलाएं फिसलकर गिर जाती हैं और बीमारों को अस्पताल ले जाना तक एक जोखिम भरा कार्य बन जाता है। गांव की सीमा देवी बताती हैं कि “बच्चे कीचड़ में फिसल जाते हैं और दवाइयाँ लेने जाना तक दूभर हो गया है।” वहीं गीता शर्मा का कहना है कि “हर बार आश्वासन मिलता है, मगर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”
कच्ची सड़क का अभाव न केवल शिक्षा और स्वास्थ्य बल्कि रोजगार और व्यापार को भी प्रभावित कर रहा है। किसान समय पर अपनी उपज नहीं पहुंचा पाते और व्यापारी वाहन फंसने से माल लाने-ले जाने में हानि उठा रहे हैं। ट्रैक्टर और मोटर साइकिल अक्सर रास्ते में फंस जाते हैं जिससे रोज़गार और खेती में बाधा आती है। ग्रामीणों ने पंचायत, तहसील, जनपद पंचायत से लेकर लोक निर्माण विभाग तक कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन अभी तक केवल आश्वासन ही मिले हैं, जमीन पर कोई काम नहीं हुआ।
गांव वालों की अब मांग है कि इस कच्चे रास्ते को पक्की सड़क में बदला जाए, जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए और निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाए ताकि गांव विकास की ओर बढ़ सके। उनका कहना है कि यदि अब भी प्रशासन नहीं चेता, तो वे धरना, प्रदर्शन और अनशन जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे।
गांव के इस लंबे इंतजार और पीड़ा को अब जल्द ही किसी ठोस निर्णय की दरकार है, ताकि यह उपेक्षित गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके और उसके निवासी सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

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