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कृषि में मशीनों का महत्व एवं फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर आयोजित किया गया प्रशिक्षण

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विकास सचदेवा की ब्यूरो रिपोर्ट

मिट्टी में दबी पराली, बढाती है मिट्टी की उर्वराशक्ति

किसान, सुपरसीडर मशीन का करें उपयोग
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– कृषि विज्ञान केंद्र शहडोल एवं किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग शहडोल के संयुक्त तत्वाधान में जनपद पंचायत बुढार के ग्राम नौगई में कृषि में मशीनों का महत्व एवं फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमे कृषि वैज्ञानिक डॉ. ब्रजकिशोर प्रजापति ने कृषकों को बताया कि खेती में मशीनों का महत्व उत्पादन को बढ़ाने, लागत कम करने, समय बचाने और श्रम पर निर्भरता कम करने के लिए है। मशीनें बुवाई, कटाई और छिड़काव जैसे कार्यों को अधिक कुशलता से करती हैं, जिससे ज्यादा उपज मिलती है और मौसम या कीटों से फसल खराब होने का जोखिम कम हो जाता है। ये स्थिरता, सटीक इनपुट उपयोग और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में भी मदद करती है। यह बीज, उर्वरक और सिंचाई जल जैसे इनपुट का कुशल उपयोग करके दक्षता बढ़ाता है और मृदा क्षरण जैसी पर्यावरणीय समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। मशीनीकरण कृषि को एक आकर्षक और लाभकारी पेशा बना सकता है, जिससे ग्रामीण युवाओं को कृषि की ओर आकर्षित करने में मदद मिलती है।  कृषि यंत्रों के उपयोग से 15 से 20 प्रतिशत बीज और उर्वरक, 20 से 30 प्रतिशत समय तथा श्रमिकों की बचत की जा सकती है। इसके साथ ही उत्पादकता में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि की जा सकती है।
   कृषि विभाग के डॉ. प्रजापति ने जानकारी दी कि किसान सुपर सीडर मशीन का उपयोग करें। सुपर सीडर एक ऐसी मशीन में जिसकी सहायता से किसान खेत की जुताई किए बिना पिछली फसल के अवशेषों को टुकड़ों में काटकर मिट्टी के नीचे दबाने के साथ ही बीजों की बुवाई का काम भी आसानी से पूरा कर सकते है। मिट्टी में दबी पराली गलकर खाद में बदल जाती है। यह खाद मिट्टी की उर्वराशक्ति को बढ़ाती है जिससे पैदावार अधिक मिलती है। सुपर सीडर मशीन से बुवाई करने पर बीज की मात्रा भी कम लगती है और अंकुरण भी 90 से 100 प्रतिशत रहता है जो एक फसल के लिए काफी अच्छा होता है। यह मशीन एक साथ कई काम कर सकती है जिसमें ये मशीन बीज की बुवाई, खेत की जुताई, मल्चिंग और खाद फैलाने का काम एक साथ कर सकती है। इस मशीन का इस्तेमाल कर किसान अपने समय और रुपए दोनों की बचत कर सकते है।
    वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी बुढ़ार श्री शिशुपाल राजपूत ने कृषकों को बताया किसानों को आधुनिक यांत्रिकीकरण का लाभ खेती को अधिक उत्पादक और किफायती बनाता है। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनी उपकरण जैसे मल्चर्स और हैप्पी सीडर्स इस्तेमाल कर फसल अवशेषों को प्रभावी ढंग से मृदा का आवरण बनाए रखने से जल वाष्पीकरण कम होता है और जल रिसाव में सुधार होता है। जिससे मृदा में नमी बनी रहती है और सतही बहाव को रोका जाता है। मिट्टी में दबी पराली गलकर खाद में बदल जाती है। यह खाद मिट्टी की उर्वराशक्ति को बढ़ाती है जिससे पैदावार अधिक मिलती है।

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