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शंकराचार्य जी के पावन सान्निध्य में त्रिदिवसीय पूर्णिमा महोत्सव का आयोज

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वाराणसी।वर्तमान में काशीवास कर रहे परमाराध्य परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामिश्री:अविमुक्तेश्वरानंद:सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य में काशी के केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में संवत 2082 विक्रमी कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक तदनुसार 3 से 5 नवंबर तक त्रिदिवसीय पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया गया है।जिसके अंतर्गत प्रथम दिवस त्रयोदशी को राष्ट्रीय कवि दमदार बनारसी के अगुवाई में आयोजित कवि सम्मेलन में अनेक स्वनामधन्य कवि काव्यपाठ करेंगें।द्वितीय दिवस चतुर्दशी को डॉ दिव्या श्रीवास्तव के नेतृत्व में ख्यातिलब्ध कलाकार नृत्य नाटिका की प्रस्तुति देंगे।एवं  तृतीय दिवस पूर्णिमा को डॉ श्रावणी विश्वास एवं शारवनी मुखर्जी के नेतृत्व में विख्यात कलाकार शंकराचार्य जी महाराज एवं भक्तों के समक्ष भावविभोर कर देने वाले भजनों को प्रस्तुत करेंगे।

उक्त जानकारी देते हुए शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि प्रार्थनापूर्वक पूछने पर ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य जी महाराज ने कार्तिक पूर्णिमा को मनाए जाने वाले देवदीपावली के महत्व को निरूपित करते हुए परमधर्माधिश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज ने बताया कि देवदीपावली का पर्व काशी में विशेष महत्व रखता है।पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान ने त्रिपुरासुर का वध किया तब समस्त देवतागण अत्यंत प्रसन्न हुए और अपनी प्रसन्नता को व्यक्त करने के लिए एवं भगवान शिव का आभार व्यक्त करने हेतु सभी देवी देवता काशी नगरी आकर गंगा तट पर दीपोत्सव का आयोजन किया।और आज भी देवताओं द्वारा शुरू किए गए उपक्रम को प्रत्येक काशीवासी हर्षोल्लास के साथ प्रतिवर्ष मनाते आ रहे हैं। त्रिदिवसीय पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन ब्रम्हचारी परमात्मानंद जी के कुशल मार्गदर्शन व हजारी कीर्ति नारायण शुक्ला के संयोजन में सम्पन्न होगा।कार्यक्रम प्रतिदिन सायं 4:30 से 7 बजे तक चलेगा।

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