अंबाह में 5 डिग्री तक लुढ़का पारा, आदेशों के बावजूद 9 बजे खुल रहे स्कूल

आशीष सिंह की रिपोर्टिंग
अंबाह। अंबाह में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन बेहाल कर दिया है। मंगलवार सुबह तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, वहीं घना कोहरा और शून्य विजिबिलिटी ने हालात और भी मुश्किल बना दिए। इसके बावजूद मुरैना जिले में स्कूलों का संचालन जारी है। जिला शिक्षा विभाग ने 05 जनवरी से 31 जनवरी तक कक्षा 8वीं तक के छात्रों के लिए स्कूल संचालन का समय सुबह 10 बजे निर्धारित किया है, लेकिन अंबाह क्षेत्र में अधिकांश स्कूल सुबह 9 बजे से ही संचालित हो रहे हैं।
आदेश बेअसर, स्कूलों की मनमानी जारी
कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच दैनिक भास्कर टीम ने जब सुबह स्कूल संचालन को लेकर अभिभावकों से बात की तो वे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित नजर आए। महासुखपुरा निवासी अभिभावक बंटी तोमर ने बताया कि मुरैना जिले को छोड़कर आसपास के कई जिलों में कक्षा 8वीं तक के बच्चों की छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं, जबकि अंबाह में तापमान और भी कम होने के बावजूद बच्चों को ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल जाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, “मजबूरी में बच्चों को स्कूल तो छोड़ रहे हैं, लेकिन डर बना रहता है कि कहीं बच्चा बीमार न हो जाए।”
अभिभावकों की मांग—छोटे बच्चों की हो छुट्टी
अभिभावकों का कहना है कि जब जिला शिक्षा विभाग ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि सुबह 10 बजे से पहले स्कूल संचालित न हों, तो फिर अंबाह में सुबह 9 बजे से स्कूल कैसे खोले जा रहे हैं। आदेशों के बावजूद स्कूल प्रबंधन समय बढ़ाने को तैयार नहीं हैं, जो बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ है।
शिक्षा विभाग की उदासीनता पर सवाल
इस संबंध में जब शिक्षा विभाग अंबाह के बीआरसी राम सिंह सिकरवार से बातचीत की गई तो उन्होंने स्कूलों के नाम बताने पर नोटिस जारी करने की बात कही, लेकिन स्वयं निरीक्षण करने की जरूरत नहीं समझी।
बीआरसी का कहना था—
“हमें बताइए कौन-कौन से स्कूल सुबह 9 बजे संचालित हो रहे हैं, हम उन्हें नोटिस जारी करेंगे। जिला शिक्षा विभाग ने कक्षा 8वीं तक के छात्रों के लिए सुबह 10 बजे से पहले स्कूल संचालित न करने के निर्देश दिए हैं।”
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब आदेश स्पष्ट हैं, तो उनका पालन क्यों नहीं कराया जा रहा? क्या शिक्षा विभाग खुद मैदान में उतरकर निरीक्षण करेगा या अभिभावकों को ही शिकायतें दर्ज करानी होंगी। ठंड के इस मौसम में बच्चों की सेहत को लेकर प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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