दस्तक अभियान का द्वितीय चरण 19 मार्च तक
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विक्रम लालवानी जिला रिपोर्टर
– मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा ने बताया कि दस्तक अभियान द्वितीय चरण का अभियान 17 फरवरी से 19 मार्च तक 2026 तक चलाया जा रहा है। उन्होंने ने बताया कि ड्यू लिस्ट में हितग्राहियों की संख्या के आधार पर दस्तक अभियान द्वितीय चरण की व्यवस्था केन्द्रवार माइक्रोप्लानिंग जिला टीकाकरण के निर्देशन में तैयार की गयी है। माइकोप्लानिंग नियमित व्ही. एच.एन.डी. की तिथियों के आधार पर मंगलवार नियत की गयी है तथा अगले दिवस माप-अप दिवस के रूप में मैदानी कार्यकर्ता जिसमे ए.एन.एम. आशा कार्यकर्ता, एवं आंगनवाडी कार्यकर्ता शामिल है। घर-घर दस्तक देकर विटामिन-ए की खुराक एवं एनीमिक बच्चों के हीमोग्लोबिन जाँच, फालो-अप एवं उपचार प्रबंधन करेंगे। इस अभियान के अन्तर्गत प्रथम दिन व्ही.एच.एन.डी. दिवस के दिन आँगनवाडी केन्द्र में एनीमिक 06 माह से 05 वर्ष तक के बच्चों की हीमोग्लोबीन जाँच, फालो-अप एवं प्रबंधन किया जाना है एवं 09 माह 05 वर्ष के 104429 बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाना है। इस अभियान में सेवाप्रदाता महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनवाडी कार्यकर्ता होंगी जो व्ही.एच.एन. डी. दिवस के दिन आंगनवाडी केन्द्रों में टीकाकरण सत्र में बच्चों को विटामीन-ए की खुराक पिलायेंगी। हीमोग्लोबीन की जाँच महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा किया गया जायेगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा ने बताया कि विटामीन-ए कमी के कारण प्रमुख रूप से मां का पहला गाढा दूध न पिलाना, पहले छः महिने स्तन पान न कराना, 06 महा पश्चात् स्तनपान के साथ-साथ उपरी आहर शुरू न करना तथा छः माह के बाद पूर्ण रूप से स्तनपान बन्द कद देना है तथा बच्चों को खिलाये जाने वाले आहार मे विटामीन ए युक्त भोजन का न होना जिसके फलस्वरूप खसरा, दस्त जैसे संक्रमण बार-बार होना। बच्चों में रतौंधी रोगो की क्षमता से लड़ने की कमी संक्रमणजनित एनीमिया मे बढोतरी एवं बच्चों में समुचित वृद्धि न होना है। इसी प्रकार बाल्यकालीन एनीमिया के मुख्य कारण गर्भावस्था मे मां के द्वारा आयरन की गोली का सेवन न करना, जिससे नवजात शिशु में आयरन भण्डारण न होना, बच्चे को पहले 06 माह में मां का दूध न पिलाना, आहार में लौह तत्व वाले पदार्थ जैसे हरे पत्तेदार सब्जी, अंकुरित दाले, अंडा, मछली, कलेजी एवं खट्टे फल आदि न लेना, साफ-सफाई की कमी व पेट में बार-बार मलेरिया होना है। इसके दुसपरिणाम स्वरूप बच्चें मे चिडचिडापन, भूख में कमी, बच्चे का जल्दी थकना, सांस फूलना, आम बीमारी जैसे दस्त, उल्टी, सर्दी, खांसी, फोडे-फुन्सी आदि बार-बार होना, उम्र के अनुसार शारीरिक व मानसिक विकास न होना, शरीर में सूजन आ जाती है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा ने जिले के नागरिको से अपील की है कि दस्तक अभियान अपना सहयोग एवं सहभागिता कर अभियान को सफल बनाये।

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