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पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश, तहसीलदार कोर्ट ने लगाया ‘स्टे’; पुलिस और नगर पालिका की भूमिका संदिग्ध!

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शहडोल (मध्य प्रदेश): सोहागपुर तहसील के ग्राम मतनी में एक गरीब परिवार की पुश्तैनी जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा जबरन कब्जे के प्रयास का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जहाँ एक तरफ तहसीलदार न्यायालय सोहागपुर ने त्वरित कड़ा रुख अपनाते हुए विवादित भूमि पर ‘स्थगन आदेश’ (Stay Order) जारी कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ इस मामले में स्थानीय पुलिस और नगर पालिका की संदिग्ध कार्यप्रणाली को लेकर जनता में भारी आक्रोश है।

क्या है पूरा विवाद?
मामला ग्राम मतनी (पटवारी हल्का शहडोल, वार्ड नंबर 22/29) स्थित आराजी खसरा नंबर 2/33/1 (रकबा 0.0150 हेक्टेयर) का है। यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में स्वर्गीय केमला केवट के नाम दर्ज है, जिसके वैध वारिस शंकर लाल केवट और उनके भाई हैं। पीड़ितों का आरोप है कि बीते 30 अप्रैल 2026 से विपक्षी आशा उर्फ अल्ली पाण्डेय और अवध पाण्डेय ने उनकी पुश्तैनी जमीन के करीब 870 वर्ग फीट हिस्से पर अवैध रूप से पिलर खड़े कर बाउंड्रीवाल का पक्का निर्माण शुरू कर दिया। जब पीड़ितों ने विरोध किया, तो आरोपी गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी (फौजदारी) पर आमादा हो गए।

सवालों के घेरे में खाकी: पुलिस ने क्यों झाड़ा पल्ला?
इस पूरे मामले में स्थानीय कोतवाली पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित शंकर लाल केवट ने 15 मई 2026 को ही थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी जमीन पर जबरन कब्जा किया जा रहा है और उनके साथ मारपीट की आशंका है।

बड़ा सवाल: कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदार पुलिस ने मौके पर जाकर काम रुकवाने या दबंगों पर कार्रवाई करने के बजाय पीड़ितों को ‘राजस्व कोर्ट से स्टे लाने’ की नसीहत देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। अगर इस बीच कोई अप्रिय घटना या खूनी संघर्ष हो जाता, तो इसका जिम्मेदार कौन होता? पुलिस का यह ढुलमुल रवैया अपराधियों को शह देने जैसा प्रतीत होता है।

नगर पालिका की चुप्पी: बिना अनुमति कैसे खड़ा हो गया पक्का निर्माण?
शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के पक्के निर्माण के लिए नगर पालिका से नक्शा पास कराना और निर्माण अनुमति (Building Permission) लेना अनिवार्य है।

संदेह के घेरे में नपा: बिना किसी वैध मालिकाना हक और बिना नगर पालिका की अनुमति के, आरोपी धड़ल्ले से पिलर खड़े कर बाउंड्रीवाल का निर्माण करते रहे, लेकिन नगर पालिका के अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानकर भी अनजान बने रहे, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

तहसीलदार कोर्ट का सख्त रुख, 23 मई की पेशी
जब पीड़ितों को पुलिस और नगर पालिका से कोई मदद नहीं मिली, तब उन्होंने अधिवक्ता श्री हेमंत तिवारी के माध्यम से म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 250 के तहत तहसीलदार कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार महोदय सोहागपुर ने 18 मई 2026 को सख्त आदेश जारी करते हुए:

विवादित स्थल पर चल रहे अवैध निर्माण को तुरंत रोककर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का हुक्म दिया।

थाना प्रभारी शहडोल को निर्देशित किया कि वे पुलिस बल भेजकर कोर्ट के ‘स्टे’ का कड़ाई से पालन करवाएं और इसकी रिपोर्ट अदालत में दें।

हल्का पटवारी को पेशी से पहले मौके की जांच कर स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

इस मामले में आगामी कार्रवाई 23 मई 2026 को होने वाली अदालती पेशी के बाद तय होगी। लेकिन फिलहाल, इस कांड ने यह साफ कर दिया है कि रसूखदारों के आगे स्थानीय पुलिस और नगर पालिका का अमला किस कदर पंगु नजर आता है। बेबाक शक्ति न्यूज़ इस पूरे मामले की प्रशासनिक जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करता है।

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