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राम मंदिर में चोरी करोड़ों सनातनी हिंदुओं की आस्था पर डकैती, भ्रष्ट ट्रस्ट को तुरंत भंग कर क्षत्रिय समाज को मिले उचित प्रतिनिधित्व: शक्ति सिंह चंदेल

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शहडोल/मध्य प्रदेश:अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय मंत्री एवं प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष शक्ति सिंह चंदेल ने अयोध्या के पावन राम मंदिर परिसर में हुए महाघोटाले और चोरी की घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ठाकुर जैनेन्द्रसिंह पंवार के बयानों का पूर्ण समर्थन किया है। उन्होंने इस घटना को केवल एक साधारण चोरी नहीं, बल्कि समूचे सनातन जगत और प्रभु श्रीराम के वंशजों की आस्था पर एक सोची-समझी डकैती करार दिया है।

प्रेस को जारी अपने कड़े बयान में शक्ति सिंह चंदेल ने कहा:

“500 वर्षों के लंबे संघर्ष, अनगिनत बलिदानों और कानूनी लड़ाई के बाद हमारे आराध्य प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर अस्तित्व में आया। लेकिन ट्रस्ट के कुछ भ्रष्ट लोगों ने अपनी काली करतूतों से इस पावन धाम को कलंकित करने का दुस्साहस किया है। जिस परिसर की सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये का ढिंढोरा पीटा जाता है, वहाँ राम लला के चढ़ावे, सोने-चांदी की ईंटों और चंदे की चोरी होना यह सिद्ध करता है कि ट्रस्ट के लोग ही डाकुओं जैसा आचरण कर रहे हैं। ऐसे ‘भ्रष्ट ट्रस्ट’ को तत्काल नष्ट (भंग) किया जाना चाहिए।”

बयान के मुख्य बिंदु और माँगें:

दिल्ली और नागपुर में बैठे हैंडलर्स का हो पर्दाफाश: आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह जी द्वारा उठाए गए तीखे सवालों का समर्थन करते हुए चंदेल ने कहा कि एसआईटी और पुलिस जांच के नाम पर केवल कुछ छोटे और अदने कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर मुख्य सरगनाओं को बचाने का प्रयास न किया जाए। चंपतराय और उनके साथी तो केवल मोहरे हैं, इनके असली हैंडलर दिल्ली और नागपुर में बैठे हैं। मामले की तह तक जाने के लिए एक बड़े और निष्पक्ष ऑपरेशन की आवश्यकता है।

क्षत्रिय समाज को मिले 50% प्रतिनिधित्व: इतिहास गवाह है कि जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने प्रभु श्रीराम के वंशजों पर सवाल उठाया था, तब जयपुर राजघराने की महारानी दिया कुमारी जी और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (राम वंशज) के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष स्व. राजा राजेन्द्रसिंह रायबरेली ने कोर्ट में पुख्ता ऐतिहासिक दस्तावेज और वंशावली पेश की थी। प्रभु श्रीराम क्षत्रिय कुल के गौरव हैं, हमारे पूर्वज और कुलदेवता हैं। यदि ट्रस्ट के गठन के समय ही क्षत्रिय समाज की 50 प्रतिशत सहभागिता की मांग मान ली गई होती, तो आज सनातन धर्म को लूट का यह कलंक न देखना पड़ता।

ट्रस्ट का हो पुनर्गठन: हमारी सरकार से पुरजोर मांग है कि इस दागी ट्रस्ट को तुरंत भंग कर इसका नए सिरे से पुनर्गठन किया जाए। नए ट्रस्ट में पूज्य शंकराचार्य जी, वैष्णवाचार्य जी, केंद्र व राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ-साथ प्रचुर मात्रा में क्षत्रिय समाज (राम वंशज) और अन्य हिंदू समाजों को उचित स्थान दिया जाए। साथ ही पदेन प्रधानमंत्री और पदेन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को इसका मानस सदस्य बनाया जाए।

सरकार को खुली चेतावनी:
शक्ति सिंह चंदेल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सत्ताधारी दल यह न भूले कि अगर प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से दो सांसदों वाली पार्टी पूर्ण बहुमत की सरकार बना सकती है, तो सनातनी आस्था से खिलवाड़ और प्रभु के अपमान के अभिशाप से वह ‘जीरो बटे सन्नाटा’ भी हो सकती है। सरकार समय रहते चेते, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दे और चंपतराय व उनके साथियों को कड़ी सुरक्षा प्रदान करे ताकि मुख्य हैंडलर्स तक पहुँचा जा सके और आंदोलनकारियों व बलिदानियों की आत्मा को शांति मिल सके।

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