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EOW की दहलीज पर शहडोल का धान घोटाला, NAN और वेयरहाउस प्रबंधन पर बड़े भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

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बेबाक शक्ति न्यूज | शहडोल

कागजों में हेराफेरी और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर, मानवाधिकार संगठन ने EOW से की निष्पक्ष जांच की मांग

शहडोल। जब अन्न के भंडारों की रखवाली करने वाले ही गड़बड़ी करने लगें तो सिस्टम पर सवाल उठना लाजमी है। शहडोल जिले में धान खरीदी में 38 किलो की जगह 40 किलो का फर्जी तौल दिखाकर सरकारी अनाज में हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में नागरिक आपूर्ति निगम और निजी वेयरहाउस संचालकों की मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के संभागीय अध्यक्ष ने इस पूरे मामले की शिकायत दस्तावेजों के साथ EOW भोपाल के महानिदेशक को सौंपी है। शिकायत में आरोप है कि जिले के कई उपार्जन केंद्रों और गोदामों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं।

*38 किलो की बोरी, 40 किलो का फर्जी चालान*

आरोपों के मुताबिक सबसे बड़ा खेल वजन में किया गया। किसानों से जो धान लिया गया उसकी वास्तविक मात्रा 36 से 38 किलो प्रति बोरी थी, लेकिन ट्रांसपोर्ट और स्वीकृति के कागजों पर उसे 40 किलो दिखा दिया गया। इस तरह कागजों पर पूरा स्टॉक स्वीकृत कर लिया गया, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही थी।

सूत्रों का कहना है कि शहडोल, जैतपुर, बुढ़ार, जैसिंहनगर, रसमोहनी, धनपुरी, ब्यौहारी, अमझोर समेत कई समितियों में इसी पैटर्न से चालान काटे गए।

*बोरियों में धान की जगह रेत और मलबा*

इससे भी चौंकाने वाला आरोप वेयरहाउसों से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार अमझोर केंद्र-1, टहकी जरखरा, करकी बनसकुली और कनौजिया खुर्द के गोदामों में जब बोरियों की जांच हुई तो उनमें धान की जगह रेत, मिट्टी और कंकड़ ज्यादा मिला। एक केंद्र पर अनियमितता मिलने पर बोरियों को हटाने का आदेश भी दिया गया था, लेकिन संबंधित प्रबंधन ने उसे नजरअंदाज कर पूरे स्टॉक को स्वीकृत बता दिया।

*D.O. और मिलर्स की भूमिका पर सवाल*

2021-22 से 2024-25 तक ओपन कैप और गोदामों में सुरक्षा और फ्यूमिगेशन के नाम पर हर महीने लाखों के बिल पास होने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि उचित रखरखाव न होने से करोड़ों का अनाज सड़ गया, जिसे चूहों और कीड़ों ने नुकसान पहुंचाया और फिर मिलर्स के साथ सांठगांठ कर बाजार में खपा दिया गया।

*ट्रांसपोर्ट में भी जादूगरी का आरोप*

एक और आरोप ट्रांसपोर्ट चालान को लेकर है। शिकायत के अनुसार ट्रक में लोड धान की मात्रा गोदाम पहुंचने तक कागजों में बदल दी जाती थी। इससे शासन को आर्थिक क्षति के साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली भी प्रभावित हुई।

*EOW से कार्रवाई की मांग*

मानवाधिकार संगठन ने मांग की है कि EOW भोपाल की विशेष टीम बिना पूर्व सूचना के शहडोल के सभी ओपन कैप, वेयरहाउस और गोदामों का औचक निरीक्षण करे और 38 किलो भराव वाली बोरियों को तौल कांटे पर दोबारा तौल कर सच्चाई सामने लाए। साथ ही D.O., जिला प्रबंधक, ट्रांसपोर्टर और मिलर्स को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाए।

संगठन का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह घोटाला और बड़ा रूप ले सकता है। अब सबकी निगाहें EOW भोपाल की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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