(Rewa, MP) हाईवे में गोवंशों के मरने का सिलसिला जारी, प्रतिदिन मौत के गाल में समा रहे दर्जनों गौवंश जबकि गौशाला निर्माण कार्य ठप्प

बूचड़खाने के लिए सब्सिडी देने वाली पार्टियों से गोवंशों की सुरक्षा की आशा करना बन्द करें – शिवानन्द द्विवेदी
👉 आवारा पशुओं का हाइवे में जमावड़ा, प्रतिदिन मौत के गाल में समा रहे गौवंश
👉 सरकारी गौशाला निर्माण कार्यठप्प
👉 हिंदूवादी पार्टियों का नही कोई पता
👉 हिन्दू संगठन गायों के नाम पर सेंक रहे रोटियां जबकि एनजीओ का नही कोई पता।
👉 राजनीतिक पशु गाय को न तो अब समाज और न ही सरकार में कोई जगह
👉 अब गायों के लिए किसी कृष्ण के अवतार की है बची आस
👉 मानव के लिए गाय मात्र दुग्ध उत्पाद तक ही सीमित, दूध खाने के बाद छोंड़ रहे आवारा
रीवा। प्रदेश भर में गौवंश की प्रताड़ना को देखते हुए कमलनाथ सरकार द्वारा लगभग 900 से भी ज्यादा गौशाला खोलने का एलान किया गया था जिसमें कुछ गौशालाओं का कार्य आरंभ भी कर दिया गया था लेकिन मौजूदा हाल में एक भी गौशाला पूर्ण रूप से बनकर तैयार नहीं हो सकी।
आपको बता दें कि एनएच-30 चाकघाट से मनगवां के बीच मढ़ी से एस्सार पेट्रोल पंप तक में दो मृतक एवं एक घायल अवस्था में गाय मिली लेकिन स्थानीय पशुविभाग को कानों कान खबर तक नही लगी।
आवारा पशुओं के लिए बने हेल्पलाइन- शिवानन्द द्विवेदी
प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध हेल्पलाइन नम्बर 1962 में सिर्फ़ पालतू पशुओं के लिए चिकित्सा व्यवस्था की गई है लेकिन पूरे प्रदेश में गौशाला निर्माण कार्य पूर्ण न हो पाने के कारण सबसे ज्यादा रोड दुर्घटना आवारा पशुओं के द्वारा हो रही है इसके बाबजूद भी आवारा पशुओं के लिए सरकारी तंत्र के द्वारा कोई उचित व्यवस्था अब तक नहीं की गई। आलम ये है कि तेज रफ़्तार से दौड़ने वाले बाहनों की चपेट में आए दिन सड़क दुर्घटना में आवारा पशु शिकार होते हैं। वर्तमान में उपलब्ध पशुधन संजीवनी में जब लोगो द्वारा जानकारी दी जाती है तब रोड में दुर्घटना ग्रस्त पशुओं की दवा हेतु किसी तरह की मदद नहीं मिल पाती है।
चाकघाट- मनगवां हाईवे बना गोवंशों का कबरिस्तान
रीवा जिले से जुड़े राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 30 में चाकघाट से मनगवां नेशनल हाईवे पर आए दिन गोवंश मर रहे हैं। रेलमपेल दौड़ते हुए अनियंत्रित वाहनों की चपेट में लगभग रोज ही बेसहारा गोवंश आ रहे और अपनी जान गवां रहे। आलम यह है कि न तो समाज मे वह संवेदनशीलता बची की इन पशुओं के बारे में सोच पाए और सरकार का क्या कहना क्योंकि सरकारें तो कभी संवेदनशील होती ही नहीं। आज बेसहारा गोवंश एक राष्ट्रीय समस्या बन चुके हैं। इन गोवंशों से जहाँ किसानों की फसल नुकसानी हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ इनके प्रति समाज की सोच भी बदल गयी है। इस बदली सोच का परिणाम ही है कि शायद ही कोई व्यक्ति आज गायों को माता स्वीकार रहा हो। गाय मात्र एक भार बनकर रह गयी है जिसका मालिक मात्र भगवान है।
गोवंशों की भारत मे स्थिति पर क्या कहना है गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी का
इस बीच निरंतर गोवंशों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने समाज और सरकार दोनो को आड़े हांथों लेते हुए जमकर हमला बोला है। एक्टिविस्ट द्विवेदी ने कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व अंग्रेजों ने अपनी पेट पूजा के लिए देश मे और देश से बाहर बीफ एक्सपोर्ट करवाना प्रारम्भ किया था और यही स्थिति स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी जारी रही जिसमे सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस ने राजस्व के नाम पर विदेशों में बीफ का एक्सपोर्ट किया। गोहत्याबंदी सम्बन्धी कोई भी कानून भारत जैसे देश मे ही सम्भव थे जहाँ गाय को धार्मिक मान्यताओं से जोड़ा जाता है लेकिन इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने मात्र गाय को राजस्व प्राप्ति का आधार बनाया। इसके बाद हिंदूवादी पार्टियों और संगठनों ने भी इस विषय को भुनाने का भरपूर प्रयास किया और भाजपा जैसी कुछ पार्टियों ने सरकार भी बना ली। आज सबको पता है की कभी नक्से से गायब भाजपा आज हिंदुओं के मुद्दों और गोवंशों के कारण ही सरकार बना पाई है। कभी बीजेपी के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल गोहत्याबंदी आज मात्र कागजों और बातों तक ही सीमित रह गयी है। जब इनकी सरकार बनी और कुछ करने का समय आया तो भाजपा सरकार कांग्रेस से भी कई कदम आगे निकल गयी और आधुनिक बूचड़खाने खोलवाने के लिए 30 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी भी दे डाली। शिवानन्द द्विवेदी ने आगे कहा कि शायद यह घटना भारत के इतिहास में सबसे काला दिन था क्योंकि यह वही बात हो गयी कि यदि गायें भी बोल सकतीं और कहतीं की जिस पर गायों को सबसे ज्यादा विश्वास रहा होगा वही उनका सबसे बड़ा दुश्मन निकला। श्री द्विवेदी ने कहा कि गायों की सुरक्षा करना तो दूर की बात रही ऊपर से आधुनिक तौर पर सुसज्जित बूचड़खाने खोलवाने का फैसला भारत जैसे हिन्दू प्रधान देश मे किसी हिंदूवादी पार्टी द्वारा किया जाना एक बेहद शर्मनाक फैसला कहा जायेगा।
जहां आज समाज ने गोवंशों को पूर्णतया बहिष्कृत किया है वहीं सरकार के लिए पशु राजस्व एकत्रित करने का साधन मात्र बचे हैं।
Subscribe to my channel
Comments are closed.