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(Rewa/Shahdol, MP Breaking) 10 रु का आरटीआई आवेदन लेने से मना किया तो अधिकारी पर लगा 25 हज़ार का जुर्माना (एकबार फिर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने की जबरदस्त कार्यवाही, सूचना आयोग के इतिहास का अहम फैसला, धारा 18 के तहत हुई कार्यवाही)

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10 का आरटीआई आवेदन लेने से मना करना अधिकारी को पड़ा महंगा 
👉 लोक सूचना अधिकारी पर लगा 25 हज़ार का जुर्माना
  👉  मध्यप्रदेश सूचना आयोग के इतिहास का एक और अहम फैसला 
  👉 राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने 25 हज़ार रुपये का ठोका जुर्माना
👉  शहडोल के जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री हरीश तिवारी के उपर लगा जुर्माना
👉 अपीलकर्ता किसान देवेंद्र तिवारी ने लगानी चाही थी आरटीआई
     सूचना आयोग के इतिहास में एक और अध्याय जुड़ गया जब अभी हाल ही में अपने एक ऐतिहासिक निर्णय में मप्र सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने शहडोल के कार्यपालन यंत्री अपर पुरवा नहर के ऊपर आवेदन के साथ 10 रुपए की फीस न लेने के चलते दोषी पाए जाने पर 25 हज़ार रुपये का जुर्माना ठोंक दिया।
   बताया गया कि हरीश तिवारी पूर्व में कार्यपालन यंत्री अपर पुरवा नहर रीवा में भी पदस्थ थे। इसी दौरान उनके सामने एक आरटीआई आवेदन दायर हुआ था। उनके ख़िलाफ़ राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह के पास शिकायत की गयी कि हरीश तिवारी ने आरटीआई की 10 रुपये की फीस के लिए आरटीआई अपीलकर्ता से स्टाम्प लाने को कहा जबकि अपीलकर्ता नगद पैसा जमा करना चाहता था। 
अपीलकर्ता किसान के खेत मे पानी रिसाव का था मामला
    अपीलकर्ता देवेंद्र तिवारी पेशे से किसान हैं। रीवा में इनके खेत के ऊपर गुजर रही जल संसाधन विभाग की  नहर से पानी के रिसाव की वजह से इनके खेत में पानी भर रहा है। नहर में लीकेज खराब कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की वजह से था जिसके चलते तिवारी के 6 एकड़ खेत में इस वजह से हर साल 5 लाख रुपये का नुकसान होता है। पिछले 15 सालों से वे इसकी शिकायत हर स्तर पर कर चुके हैं लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। 
कार्यपालन यंत्री द्वारा मात्र स्टाम्प से ही फीस देने पर दिया गया दबाब
     परेशान देवेंद्र तिवारी ने विभाग को कानूनी नोटिस भी भिजवाया था लेकिन समस्या का कोई हल न निकल पाया अंत मे हारकर देवेंद्र तिवारी ने इस बात की शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई है यह जानने के लिए आरटीआई आवेदन लगाने अपर पुरवा नहर संभाग के कार्यालय पहुंचे वहां पर अधिकारियों ने उनको 10 रुपये के स्टांप लेकर आने को कहा जबकि तिवारी नगद भुगतान कर रसीद लेकर आरटीआई आवेदन दायर करना चाहते थे। तत्कालीन कार्यपालन यंत्री हरीश तिवारी ने आवेदन के ऊपर बाबू से लिखवा दिया की 10 रुपये स्टांप पेपर लगाने के बाद ही आरटीआई आवेदन मान्य किया जाएगा। जबकि सूचना के अधिकार अधिनियम में फीस कार्यालय में नगद रुपए जमा कर रसीद लेकर, स्टांप, बैंक चालान, ऑनलाइन ट्रेजरी में जमा कर और पोस्टल आर्डर के माध्यम से देने का प्रावधान  है। 
आरटीआई की धारा 18 की शिकायत पर हुई कार्यवाही
   इस प्रकरण में शिकायत प्राप्त होने के बाद राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अधिनियम की धारा 18  के तहत पूरे मामले की जांच की। जांच के दौरान दोषी अधिकारियों ने आयोग को गुमराह करने की कोशिश भी की। कार्यपालन यंत्री हरीश तिवारी ने आयोग को सुनवाई में कहा कि आवेदक ने स्वयं कार्यालय की सील ही लगा ली है और टीप भी दर्ज कर दी है। हालांकि इसके उलट विभाग के बाबू ने सूचना आयुक्त राहुल सिंह के समक्ष  स्वीकार किया  कार्यपालन यंत्री  हरीश तिवारी के आदेश पर टीप उन्होनें  दर्ज की थी, और  सील भी उन्होंने लगा करके दिया था। आयुक्त राहुल सिंह ने कार्यपालन यंत्री हरीश तिवारी को यह भी कहा कि अगर आवेदक द्वारा फर्जी तरीके से सील लगाई गई है तो विभाग ने पुलिस में इसकी शिकायत क्यों नहीं की तो इसका वह कोई जवाब न दे पाए। 
 जब आवेदक बिना फीस के आवेदन जमा कर रहा था तो यह टीप क्यों नहीं लिखी
      सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने आरोप लगाया कि आवेदक बिना फीस के आवेदन लेकर आए थे इसलिए स्वीकार नहीं किया गया। सिंह ने जांच में पाया की आवेदक की मंशा फ़ीस देने की रही थी और जब अधिकारी का वहां से स्थानांतरण हो गया तब वे फ़ीस देकर यही जानकारी प्राप्त कर पाए वहीं आवेदक अपने खर्चे पर रीवा से राज्य सूचना आयोग भोपाल तक आए शिकायत दर्ज कराने इससे साफ है कि 10 रुपये की नियत फीस देने की आवेदक की हमेशा से मंशा रही थी। सूचना आयुक्त  सिंह ने  जब यह पूछा  कि अगर आवेदक  बिना फीस के आवेदन जमा करना चाह रहा था तो यह टीप क्यों नहीं दर्ज की गई तो इसका जवाब भी विभाग के अधिकारी नहीं दे पाए। 

इसके पहले भी चालान द्वारा फीस जमा करने की बाध्यता पर उठे सवाल
      राहुल सिंह ने अपने आदेश में कहा कि आयोग पूर्व में ऐसे प्रकरणों से भी अनजान नहीं है जहां पर 10 रुपये फीस के लिए अपीलकर्ता को परेशान किया गया हो ताकि वह हतोत्साहित होकर आरटीआई आवेदन दायर न करें। इससे पहले भी आयोग के समक्ष आए एक प्रकरण में अपीलकर्ता से सिर्फ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चालान के माध्यम से ही आरटीआई आवेदन की फीस जमा करने के लिए कहा गया था। यह सब विधि विरुद्ध है क्योंकि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की मंशा जानकारी बहुत ही सुलभ तरीके से अपीलकर्ता को उपलब्ध कराने की है । इसीलिए कानून में इसके लिए  विशेष प्रावधान किए गए हैं।
भविष्य के लिए हों सचेत वरना लोक सूचना अधिकारी जुर्माने से बच न पाएंगे
   राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने इस बात पर चिंता जताई कि पहले ही आरटीआई आवेदनों का न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप निराकरण न होने से अपना आयोग के समक्ष शिकायतों और अपीलों का अंबार लगा हुआ है। अधिकांश मामलों में प्रथम दृष्टया सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की घोर अवहेलना हो रही है। ऐसे मे इस तरह की शिकायत जहा आरटीआई आवेदन लगाने में ही लोक सूचना अधिकारी विधि विरुद्ध तरीके से जानबूझकर आवेदक के साथ असहयोग करते हुए सूचना तक पहुंचने में अड़ंगा लगाते हैं पर सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है। ताकि भविष्य में इस तरह के प्रकरणो पर लगाम लग सके।

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