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आरटीआई की धारा 19(8) सूचना आयुक्त की शक्तियां पर आयोजित हुआ मानसून सत्र का 10 वां ज़ूम वेबीनार,

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   (शिवानन्द द्विवेदी)
    सूचना के क्षेत्र में क्रांति की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मानसून सत्र का दसवां जूम मीटिंग वेबीनार का आयोजन किया गया। इस बीच प्रत्येक रविवार सुबह 11:00 बजे से 1:00 बजे के बीच में आयोजित होने वाले वेबीनार में राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने अध्यक्षता की एवं कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त श्री शैलेश गांधी एवं माहिती अधिकार मंच भोपाल के अध्यक्ष भास्कर प्रभु विशिष्ट अतिथि रहे।      कार्यक्रम का संचालन एवं प्रबंधन एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा किया गया।
आरटीआई की धारा 19(8) की सूचना आयुक्त की शक्तियों पर हुई विस्तृत चर्चा
    सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 में धारा 19 8 की चर्चा करते हुए राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने कहा की धारा 18 की तरह ही धारा 19 में सूचना आयोग को विशिष्ट शक्तियां दी गई है जिसमें आयोग सूचना के अधिकार अधिनियम को लागू करने के लिए जो भी उचित निर्देश होंगे वह सब दे सकते हैं जिसमें सूचना तक पहुंच केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी अफवाह राज लोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति करना विशेष सूचना को प्रकाशित करना या वर्गीकृत करना पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट के तहत उसमें कोई बदलाव लाना जिससे दस्तावेजों का संधारण प्रबंधन और उन्हें कब कैसे नष्ट किया जाय, सूचना के अधिकार से जुड़े हुए अधिकारियों और कर्मचारियों की समय-समय पर ट्रेनिंग करवाना साथ में कोई भी जानकारी धारा 4 की उप धारा 1 के तहत संधारित्र किस प्रकार से की जाए उसके विषय में वार्षिक रिपोर्ट तैयार करवाना और अंत में सबसे महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में यदि कोई लोक सूचना अधिकारी किसी अभ्यर्थी को निरंतर परेशान करें उसे मानसिक प्रताड़ना दे उसके धन का अपव्यय करवाएं उस स्थिति में उस लोक सूचना अधिकारी को आदेश देकर पीआईओ के स्वयं के पैसे से अपील आरती के लिए हर जाने दिए जाने के आदेश पारित करना आदि सम्मिलित है।
कानून की जानकारी नहीं होने के बहाने पर 10 हज़ार के स्थान पर लगाए जाएंगे 20 हज़ार के जुर्माने – सूचना आयुक्त राहुल सिंह
    अपने कार्यकाल का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने बताया कि अभी पिछले दिनों रीवा जिला के मनरेगा लोकपाल से संबंधित कुछ ऐसे ही प्रश्न आए थे जहां लोक सूचना अधिकारी नियुक्त नहीं था इस विषय में आयुक्त ने कहा कि उनके द्वारा एक्शन लिया गया। विश्व विद्यालय संबंधी मार्कशीट परीक्षा पुस्तिका आदि से संबंधित सूचना के अधिकार पर बताया गया कि जब तक द्वितीय अपील आयोग में पहुंचती है तो यह दस्तावेज नष्ट कर दिए जाते हैं लेकिन इस विषय पर भी उनके द्वारा एक्शन लिया गया है एवं निर्देश जारी किए गए है। एक पेंशन के मामले का हवाला देते हुए उन्होंने बताया लोक सूचना अधिकारी ने कहा की का ज्ञात पुराने हो गए हैं इसलिए नष्ट किए जा रहे हैं इस पर उनके द्वारा ऐसे महत्वपूर्ण कागजात के संधारण के लिए निर्देश पारित किए गए। सबसे विशेष तौर पर तल्ख टिप्पणी करते हुए आयुक्त श्री सिंह ने कहा यदि कोई लोक सूचना अधिकारी यह कहे कि 15 वर्षों से उसे सूचना के अधिकार की जानकारी नहीं है और यदि उसे 10हज़ार रुपये का फाइन लगाया जाना है इस स्थिति में वह 20 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाना उचित समझते हैं क्योंकि अधिकारियों की यह सब बहानेबाजी नहीं चलेगी।
हर्जाना लगाने के लिए एक मजबूत आधार होना आवश्यक – सूचना आयुक्त राहुल सिंह
      इस बीच आरटीआई की धारा 19(8)(बी) की चर्चा करते हुए आयुक्त श्री सिंह ने कहा की दिल्ली हाईकोर्ट का एक निर्देश है जिसमें कहा गया है की लोक सूचना अधिकारी को हर्जाना लगाने के पहले एक मजबूत आधार होना आवश्यक है। अतः जब भी अपीलार्थी आयोग के समक्ष कोई द्वितीय अपील एवं धारा 18 के तहत शिकायत प्रस्तुत करें तो उन्हें मजबूत और पुख्ता आधार बताना पड़ेगा। लोक सूचना अधिकारी के ऊपर हर्जाना क्यों लगाया जाए? यदि लोक सूचना अधिकारी आवेदक को बार-बार परेशान करता है, आवेदक के खर्चे से उसे बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है, मानसिक और शारीरिक तौर पर आवेदक की प्रताड़ना होती है अथवा लोक सूचना अधिकारी द्वारा कोई विशेष कागज न दिए जाने के कारण यदि अपीलार्थी को वित्तीय क्षति पहुंचती है अथवा नौकरी से हाथ धोना पड़ता है इस स्थिति में आयोग लोक सूचना अधिकारी के ऊपर हर्जाना लगा सकता है।     दिल्ली यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेज के कई प्रिंसिपल को बैठाया था हर्जाना – पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी
     इस बीच जूम वेबीनार में उपस्थित पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त श्री शैलेश गांधी की तरफ इशारा करते हुए एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने धारा 19(8) की शक्तियों पर अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया तो श्री गांधी जी ने बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में काफी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं जिसमें विभागों को हर सप्ताह अपनी वेबसाइट अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। अंडर ट्रायल प्रिजनर्स जिनकी 40% के आसपास जिंदगी जेल में कट चुकी है उनकी जानकारी साझा करने के निर्देश दिए और साथ में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में दिल्ली यूनिवर्सिटी से संबंधित कॉलेज के प्राचार्य के एक मामले में उन्होंने कई प्राचार्य पर जुर्माने लगाए हैं और साथ में हर्जाना भरने के लिए कहा था।
स्टेट लेवल की पब्लिक कमेटी बनाई जाए जिसमें जनता की हो सहभागिता- भास्कर प्रभु
    इस बीच माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक श्री भास्कर प्रभु ने अपने आरटीआई एक्टिविस्ट के तौर पर अनुभव को शेयर करते हुए बताया कि उन्होंने 19(8) की शक्तियों के विषय में काफी कुछ कार्य करने का प्रयास किया है और महाराष्ट्र स्टेट इनफॉरमेशन कमिशन को कार्य करने के लिए मजबूर भी किया है। इसी विषय में उन्होंने महाराष्ट्र सूचना आयोग से एक राज्यस्तरीय कमेटी का गठन करने के लिए प्रयास किया जिसमें पब्लिक का सीधे पार्टिसिपेशन करने की मांग की। इस पर महाराष्ट्र सूचना आयोग ने संज्ञान भी लिया और महाराष्ट्र सरकार के समक्ष ऐसी कमेटी गठित करने के लिए प्रपोजल भी प्रस्तुत किया लेकिन श्री प्रभु ने बताया की कमीशन के इस निर्देश के बावजूद भी महाराष्ट्र सरकार ने कमेटी गठित नहीं की और महाराष्ट्र हाईकोर्ट में कमीशन के विरुद्ध राज्य सरकार ने स्टे ले लिया है जो सूचना के अधिकार अधिनियम को कमजोर करने का प्रयास है।
धारा 4 के तहत आने वाली जानकारी न मिले तो पीआईओ को जुर्माने के साथ भरना पड़े हर्जाना – भास्कर प्रभु 
       आरटीआई की धारा 19(8) की शक्तियों पर चर्चा करते हुए श्री भास्कर प्रभु ने कहा कि आयोग को हमेशा यह देखना चाहिए कि कौन सी जानकारी धारा 4 के तहत सार्वजनिक करने योग्य है। यदि जानकारी धारा 4 की श्रेणी में आती है जिसके लिए अपीलार्थी को अनावश्यक तौर पर आरटीआई लगाकर जानकारी निकालनी पड़ रही है ऐसी स्थिति में भले ही अपीलार्थी हर्जाने की मांग न करें लेकिन उस स्थिति में भी सूचना आयोग को ऐसे समस्त पीआईओ पर जुर्माने के साथ साथ हर्जाने की कार्यवाही भी की जानी चाहिए। यदि ऐसा होने लगेगा तो बहुत ही जल्दी सूचना के क्षेत्र में क्रांति आ जाएगी और जो अधिकारी विभागों में सांप की तरह कुंडली मारकर बैठे हैं उन्हें अपने दायित्वों का बोध होने लगेगा।
 क्या 90 वर्ष से अधिक पुराने दस्तावेज की प्रमाणित प्रति मिल सकती है? 
     वेबीनार के दौरान केशव पारीक ने प्रश्न किया कि उन्हें 90 वर्ष पुराने दस्तावेज की जानकारी चाहिए थी लेकिन लोक सूचना अधिकारी द्वारा बताया गया की जानकारी काफी पुरानी है और ढूंढी जा रही है। इस पर भास्कर प्रभु ने कहा कि हर कार्यालय में पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट एवं मेंटेनेंस एक्ट के तहत नियम होते हैं कि किस दस्तावेज को कब तक रखना है। यह दस्तावेज संधारित होगा तो प्रमाणित प्रति मिलेगी और यदि नहीं होगा तो नहीं मिलेगी। इस पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि कई बार इस प्रकार की बातें सामने आती है और फिर वह धारा 18 के तहत स्वयं दस्तावेज मंगवा कर जांच करते हैं। यदि दस्तावेज नहीं मिल रहे और आवश्यक दस्तावेजों की श्रेणी में आते हैं उस स्थिति में वह स्वयं भी आदेश देते हैं की आवश्यक दस्तावेजों को पुनर्निर्मित किया जाए।
अधिकारियों द्वारा आम नागरिक के अधिकारों का सम्मान किया जाना आवश्यक – सूचना एक राहुल सिंह
    भारत में अमूमन देखा यह जाता है कि बड़े अधिकारी जैसे कलेक्टर, एसपी, आयुक्त एसडीएम आदि अपने आप को इतना बड़ा समझते हैं की लोकतंत्र में आम नागरिकों के अधिकारों के प्रति उनके मन में कोई सम्मान का भाव नहीं होता है। ऐसे ही एक मामले का जिक्र करते हुए श्री सिंह ने कहा कि हमारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान किसी कलेक्टर कार्यालय में एक बुजुर्ग व्यक्ति आये और वह हाथ जोड़े खड़े थे कि कलेक्टर साहब कुछ सुन लें लेकिन कलेक्टर ने उन्हें बैठने के लिए नहीं कहा तब हमने कहा कि उस बुजुर्ग व्यक्ति का आप सम्मान करें और उसको आप पहले बैठाएं। बैठने के बाद बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी समस्याएं बताई। इस प्रकार अधिकारियों को आम जनता के प्रति एवं उनके अधिकारों के प्रति सम्मान का भाव रखना आवश्यक है। चाहे कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो वह जनता का सेवक है यह बात नहीं भूलना चाहिए।
वेबीनार के दौरान यह कार्यकर्ता रहे उपस्थित
    दिनांक 30 अगस्त 2020 दिन रविवार को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक आयोजित ह्यूमन मीटिंग वेबीनार में उपस्थित कार्यकर्ताओं में अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी एवं सर्वेश सोनी, पत्रिका से मृगेंद्र सिंह, सुरेश उपाध्याय, प्रदीप उपाध्याय, गोविंद देशवारी, राज तिवारी, अंकुश कुमार बरुआ, प्रमोद सिंह, सर्वेश सोनी, संजीव विश्वकर्मा, स्वतंत्र शुक्ला, रवि मिश्रा, गोपाल कृष्ण गौतम, ददन तिवारी, मदन गोपाल, अंकुर कुमार मिश्रा, राजेश शर्मा, आशीष राय, शैलेंद्र प्रताप सिंह, सत्येंद्र सिंह सिकरवार, सुरेंद्र सिंह पवार, कपिल, बिन्नू मिश्रा, मनीष दुबे, सूरज गिरी, सुरेंद्र भनोट, प्रबल प्रजापति आदि पचास से अधिक पार्टिसिपेंट्स ने भाग लिया और अपनी बातें और समस्याओं को रखकर उसका समाधान पाया।

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