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पताई-विशेषर में करोड़ों का भ्रष्टाचार जिम्मेदार बोले जनता करा ले कार्यों की उच्चस्तरीय जांच,

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पताई विशेषर में करोड़ों का भ्रष्टाचार जिम्मेदार बोले जनता करा ले कार्यों की उच्चस्तरीय जांच
 👉 ग्रामीण बोले – तानाशाही का आलम जनप्रतिनिधियों से डर किलो के भाव में बिक जाते हैं अधिकारी

 👉 आरटीआई का शुल्क जमा कराने के बाद भी नहीं मिली जानकारी आवेदक जाएंगे एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के साथ आयोग
  👉 एक्टिविस्ट का गॉव बचाओ अभियान, शिवानंद द्विवेदी टीम के साथ पंचायत में पहुंच कर स्थानीय लोगों के साथ उठाएंगे भ्रष्टाचार की आवाज़
रीवा, देवतालाब। पंचायती विकास के नाम पर बहती गंगा जब अपने रौद्र रूप को धारण करने पर मजबूर हो जाती है तब तबाही का सिलसिला शुरू हो जाता है। पिछले कई दिनों से यह तबाही रीवा की ग्राम पंचायतों में देखने को मिल रही है एक तरफ सभी जनपद सीईओ को जुर्माना तो वहीं दूसरी तरफ 88 सचिव का वित्तीय अधिकार छिनने के साथ सरपंचों का पद से पृथक्करण और एफआईआर जी हां हम बात कर रहे हैं उस ग्राम स्वराज की जिसका सपना कभी महात्मा गांधी ने देखा था। हर गॉव में हर तरह की सुख सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पंचायती राज अधिनियम बना जिससे विकास की कड़ी आगे बढ़े और देश की जनता खुशहाल हो लेकिन वर्तमान स्थिति का आलम ऐसा की जब तक जनता रोड में नहीं उतरती, नारेवाजी, चक्काजाम, टायर, और धरना प्रदर्शन नही करती तब तक अंग्रेजी सल्तनत की तरह जनप्रतिनिधियों का सौतेला व्यवहार जनता के साथ जारी रहता है। 
अनियमितता के साथ करोड़ो का भ्रष्टाचार
प्रसिद्ध देवतालाब मंदिर से महज 3-4 किलोमीटर कीचड़ से लबालब सड़क को पार करते हुए एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने गॉव बचाओ अभियान को लेकर जब पताई विशेषर पंचायत में अपनी टीम के साथ गॉव में समीक्षा करने पहुंचे तो ग्रामवासियों का हुजूम उमड़ पड़ा।  विकास कार्यों के नाम पर की गई अनियमितता एवं लाखों करोड़ों की राशि का सरपंच सचिव द्वारा गवन करने पर लोगों ने तालाब के किनारे बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर न्याय की गुहार लगाने लगे। लोगों का कहना था कि तालाब सौंदर्यीकरण, मेड़ बंधान, पंचपरमेश्वर, पीसीसी सड़क निर्माण, नाली निर्माण, जैसे अनेकों कार्यों के नाम से राशि आहरित कर ली गई है लेकिन धरातल में कोई भी कार्य नहीं हुआ। लोगों ने आरोप लगाया कि न हम गॉव में थे न मजदूरी किए फिर भी खाते में मनरेगा का पैसा आ गया और अब हमसे पैसा मांगा जा रहा है।
पंचायत भवन में अंदर से तालाबंद, चल रही सरेआम तानासाही   भीड़ का हुजूम जब पंचायत भवन की ओर बढ़ा तो सरपंच के पति की दवंगई का नजारा ही कुछ और था। पंचायत भवन में अंदर से ताला बंद कर  सचिव सहायक सचिव के साथ बैठे सरपंच के पति की धौस को सुनते ग्रामवासी अपने हक और अधिकार को मांगने लगे। ग्रामीण जन किए गए कार्यों की लिस्ट RTI से मागे तो फीस जमा करा ली गई लेकिन जानकारी नहीं दी गई। विकराल स्थिति को काबू करने के लिए जब थाना लौर की डायल 100 पुलिस पंचायत भवन पहुंची तो प्रशासन को देखकर सरपंच के पति बौखला गए। आखिरकार प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ता ने जनता को समझा कर स्थिति को काबू किया।
उपसरपंच ने लगाया तानाशाही का आरोप
ग्रामवासियों के साथ धरने में बैठे गॉव के उप सरपंच ने  गांव के सरपंच के पति के ऊपर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हमें न तो पंचायत भवन में आने देते हैं न ही कार्यों की जानकारी देते हैं जब हम पंचायत भवन में आते हैं तब अंदर से ताला बंद कर दिया जाता है।
शांतिपूर्ण ढंग से मास्क के साथ धरने में उपस्थित रहे ग्रामवासी
    पंचायती भ्रष्टाचार एवं अनियमितता की जांच की मांग करते हुए  पंचायत निवासी रोहित गौतम, संदीप दुबे, संतोष दुबे, प्रभा, विमला साकेत, छोटेलाल साकेत, राकेश शुक्ला, विनोद पण्डेय, कमलेश साकेत, गनपत प्रसाद, हीरालाल साकेत, शिवम शुक्ला, राजेश शुक्ला, अंकित शुक्ला, विवेक शुक्ला, रामभजन शुक्ला, सूर्यभान शुक्ला, धीरज, अनुराग पण्डेय, बृजेन्द्र प्रसाद मिश्रा आदि सैकड़ों ग्रामवासियों ने पंचायती भ्रष्टाचार एवं अनियमितता की जमकर शिकायत की और तत्काल जांच की माग की। 
ग्राम पंचायत के भ्रष्टाचार की जांच करवाई जाएगी और वसूली तथा पद से पृथक की कार्यवाही होगी – एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी
     इस बीच मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी ने कहा कि मामले को उच्चस्तर पर रखा जाएगा और जल्द ही जांच की माग की जाएगी और दोषियों के ऊपर दंडात्मक कार्यवाही करते हुये सरपंच सचिव से रिकवरी और पद से पृथक करने की माग की जाएगी। जहां आवश्यकता पड़ेगी वहां सूचना के अधिकार के तहत भ्रष्टाचार की संपूर्ण जानकारी निकाली जाएगी और कार्यवाही की माग की जाएगी।

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