MP//Rewa// इको टूरिज्म बोर्ड और वन विभाग की नाकामी की वजह से खत्म हो रहा रीवा टूरिज्म, सिरमौर के टोंस वाटरफॉल की उखाड़ दी रेलिंग तोड़ दिया डस्टबिन वाटरफॉल बना नशेड़ियों का डेरा, टूरिज्म से प्राप्त हुई आमदनी हजम कर खत्म किया जा रहा पर्यटन क्षेत्र

रीवा जिले में काफी पर्यटन क्षेत्र हैं लेकिन उनका समुचित प्रबंधन न हो पाने के कारण आलम यह है कि ज्यादातर पर्यटन क्षेत्र सरकारी उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं और जो नाम उन्हें मिलना चाहिए नहीं मिल पा रहा है। यू देखा जाए तो क्योटी एवं बहुती जलप्रपात से जुड़े हुए पर्यटन क्षेत्र रीवा जिले के काफी महत्वपूर्ण स्थानों में से माने जाते। लेकिन सरकार द्वारा समुचित प्रबंधन के अभाव एवं बजट आवंटन न हो पाने के कारण पर्यटक स्थलों पर नहीं पहुंच पाते और यदि कुछ पहुच भी पाते हैं तो विभिन्न प्रकार की दुर्घटनाएं होती रहती है जिससे पर्यटन क्षेत्र का नाम भी खराब होता है। अभी हाल ही में केवटी जलप्रपात में हुई एक ऐसी ही घटना उल्लेखनीय है जिसमें उत्तर प्रदेश से आए हुए 6 सैलानी जलप्रपात के भीतर गिरकर मौत का शिकार हो गए जिसके बाद रीवा जिले के पर्यटन क्षेत्र पर प्रश्न चिन्ह लग गया है कि क्या वाकई सरकार पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है अथवा मात्र दिखावा करना चाहती है? विशेषज्ञों की माने तो जो पर्यटन क्षेत्र जंगल से जुड़े हुए पर्यटन क्षेत्रों में सम्मिलित होते हैं इसमें वन विभाग का बहुत बड़ा रोल होता है जिसकी वजह से यह पर्यटन क्षेत्र विकसित नहीं हो पा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर वन विभाग को इन पर्यटन क्षेत्रों को विकसित करने में और सरकार का राजस्व बढ़ाने में क्या समस्या हो सकती है?
टोंस वाटरफॉल की स्थिति दयनीय, उखाड़े रेलिंग तोड़ दिया बैठका
जिले के सिरमौर क्षेत्र अंतर्गत आने वाले 2 वाटरफॉल टोंस वाटरफॉल पर्यटन क्षेत्र की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। यदि देखा जाए तो टोंस वाटरफॉल में प्रतिदिन हजार पर्यटक पहुंच रहे हैं जिसकी वजह से रोज का हजारों रुपए मुनाफा हो रहा है लेकिन इसके एवज में इको इको टूरिज्म बोर्ड द्वारा एवं जंगल विभाग के द्वारा कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है जिसकी वजह से उदंड पर्यटन तोड़ दी है भीड़ इकट्ठा होने की वजह से कोई अप्रिय घटना होने की संभावना निरंतर बनी हुई है। नाम दिया है इको टूरिज्म बोर्ड का लेकिन देखा जाए तो पूरे वाटरफॉल के आसपास इतनी गंदगी प्लास्टिक कचरा इकट्ठा हो गया है जिसकी वजह से इको शब्द हटाना ज्यादा बेहतर है।
रीवा टूरिज्म की बदतर स्थिति और घटिया प्रबंधन के पीछे इको टूरिज्म बोर्ड और वन विभाग जिम्मेदार – एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी
दिनांक 16 सितंबर 2020 को टोंस वाटरफॉल इको टूरिज्म स्पॉट पर दौरा करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया कि वन विभाग की लापरवाही और नाकामी की वजह से रीवा जिले के सभी इको टूरिस्ट प्लेस बर्बाद होने की कगार पर हैं और इसके लिए ईकोटूरिज्म बोर्ड बराबर का जिम्मेदार है। एक्टिविस्ट ने बताया की इको टूरिस्ट प्लेस से आने वाले पैसे का बंदरबांट कर लिया जाता है और राशि का सही तरीके से उपयोग न हो पाने के कारण टूरिस्ट प्लेस को विकसित नहीं किया जा रहा है और न ही सही तरीके का प्रबंधन किया जा रहा है इसके लिए वन विभाग जिम्मेदार है जिसमें वन मंडल अधिकारी, मुख्य वन संरक्षक, और संबंधित रेंज ऑफिसर सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं जिनकी नाकामी की वजह से उदंड पर्यटक रेलिंग तोड़ रहे हैं जिससे पर्यटन स्थल की सूरत भी बिगड़ रही है और साथ में रेलिंग टूटने की वजह से किसी भी समय कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। इस बात को लेकर एक्टिविस्ट द्विवेदी ने प्रशासन से कार्यवाही की मांग की है और जल्दी ही व्यवस्था सुधारने के लिए कहा है। क्या कहना है टूरिज्म एक्टिविस्ट सर्वेश सोनी का
क्षेत्र में टूरिज्म के लिए कार्य करने वाले एक्टिविस्ट सर्वेश सोनी ने बताया कि शासकीय ईकोपर्यटन केंद्र टोंस वॉटरफॉल सिरमौर में ईकोपर्यटन संरचनाओ रेलिंग्स, सीढ़ी स्टील लैडर, सिट आउट्स, पैगोड़ा, आदि के समुचित रख रखाव, नियमित मेंटेनेंस कराये जाने एवं अपशिष्ट प्रबंधन हेतु बेहतर उपाय किये जाने की आवश्यकता है। संवहनीय संचालन व्यवस्था बनाना डीएफओ सीसीएफ की जवाबदेही जिम्मेदारी है जिसके लिए ईकोपर्यारण केंद्रों में उनके नियमित दौरे होना आवश्यकता है जिसमे लापरवाही दोनों ही अफ़सरो के द्वारा बरती जा रही है


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